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Shimla Mirch Ki Kheti: शिवपुरी जिले के किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ रहे हैं. गेहूं-चना की जगह सब्जी उत्पादन, शिमला मिर्च, टमाटर और संरक्षित खेती को अपनाया जा रहा है. मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई और पॉलीहाउस जैसी तकनीकों से लागत कम, उत्पादन अधिक और पानी की बचत हो रही है. बाजार की मांग के अनुसार खेती करने से किसानों की आय बढ़ी है और युवा भी कृषि की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
रिपोर्टर आशीष पांडे,
Shimla Mirch Ki Kheti: शिवपुरी जिले में किसान अब परंपरागत खेती को छोड़कर आधुनिक तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. पहले जहां गेहूं और चना जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भरता थी, वहीं अब किसान सब्जी उत्पादन, शिमला मिर्च, टमाटर और संरक्षित खेती अपना रहे हैं. मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई और पॉलीहाउस जैसी तकनीकों से लागत कम और उत्पादन अधिक हो रहा है. नई पद्धतियों से पानी की बचत भी हो रही है. बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती करने से किसानों की आय में वृद्धि हुई है और युवा किसान भी कृषि से जुड़ने लगे हैं.
शिवपुरी जिले के लुकवासा गांव में किसान आधुनिक तकनीक के जरिए शिमला मिर्च की खेती से लाखों की कमाई कर रहे हैं. 35 बीघा में शिमला की फसल लेकर किसान मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई का उपयोग कर रहे हैं. किसान राजकुमार रघुवंशी बताते हैं कि यह खेती जोखिम भरी जरूर है, लेकिन मौसम और बाजार साथ दे तो प्रति बीघा एक लाख रुपये तक की आमदनी संभव है. नई तकनीक से उत्पादन बढ़ा है और पानी की बचत भी हो रही है.
मल्चिंग की प्रक्रिया
मल्चिंग में सबसे पहले खेत को अच्छी तरह जुताई कर समतल किया जाता है. इसके बाद बेड (क्यारियां) तैयार की जाती हैं. क्यारियों पर काली या सिल्वर प्लास्टिक मल्च शीट मशीन या हाथ से बिछाई जाती है. मल्च शीट को किनारों से मिट्टी डालकर अच्छी तरह दबा दिया जाता है ताकि हवा से न उड़े. तय दूरी पर गोल छेद किए जाते हैं, जहां पौधों की रोपाई की जाती है. मल्चिंग से खरपतवार कम उगते हैं, नमी बनी रहती है, मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है और उत्पादन बेहतर मिलता है.
ड्रिप लगाने की प्रक्रिया
ड्रिप सिंचाई के लिए सबसे पहले पानी के स्रोत के पास मुख्य पाइप लाइन बिछाई जाती है. इसके बाद खेत की क्यारियों के अनुसार सब-मेन और लेटरल पाइप डाले जाते हैं. प्रत्येक पौधे के पास ड्रिपर लगाया जाता है, जिससे बूंद-बूंद पानी सीधे जड़ों तक पहुंचता है. फिल्टर और वॉल्व लगाए जाते हैं ताकि पानी साफ रहे और दबाव नियंत्रित रहे। ड्रिप सिस्टम से पानी की 40–60 प्रतिशत तक बचत होती है और खाद भी घोलकर आसानी से दी जा सकती है. इससे पौधों की बढ़वार तेज और पैदावार बेहतर होती है.
शिमला मिर्च की खेती के लिए शिवपुरी की जलवायु
शिवपुरी की जलवायु शिमला मिर्च की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है. यहां का मौसम अर्ध-शुष्क है, जहां सर्दियों में तापमान 10 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जो शिमला मिर्च के पौधों की बढ़वार और फूल आने के लिए उपयुक्त है. गर्मियों में तापमान अधिक होने से फसल प्रभावित हो सकती है, इसलिए किसान मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई का सहारा लेते हैं. औसत वर्षा मध्यम है, लेकिन जल निकासी की अच्छी व्यवस्था जरूरी रहती है. सही मौसम और तकनीक के साथ शिवपुरी में शिमला मिर्च से अच्छी पैदावार और लाभ संभव है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें