विदिशा शीतलधाम में समवसरण मंदिर की मुख्य बेदी का शिलान्यास: पत्थरों से निर्मित 135 फीट ऊंचे मंदिर का कार्य अंतिम चरण में – Vidisha News

विदिशा शीतलधाम में समवसरण मंदिर की मुख्य बेदी का शिलान्यास:  पत्थरों से निर्मित 135 फीट ऊंचे मंदिर का कार्य अंतिम चरण में – Vidisha News




विदिशा के शीतलधाम में 1008 भगवान शीतलनाथ स्वामी के भव्य समवसरण मंदिर का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। दो दिनों से चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों के बीच रविवार को मंदिर की मुख्य बेदी और लगभग 100 फीट ऊंचे डोम पर शिखर निर्माण का विधिवत शिलान्यास संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज के शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि संभवसागर, मुनि निस्सीम सागर और मुनि संस्कार सागर के सानिध्य में आयोजित किया गया। बाल ब्रह्मचारी तरुण भैया (इंदौर) के निर्देशन में मुंबई निवासी धर्मानुरागी प्रशांत जैन व दिव्या जैन परिवार तथा प्रदेश के पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया व सुधा मलैया परिवार ने शिलान्यास की विधि संपन्न की। शीतलधाम में चल रहे इन अनुष्ठानों में विदिशा सहित अन्य जिलों से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने समवसरण मंदिर की मुख्य बेदी पर शिला स्थापित कर पुण्य लाभ अर्जित किया। निर्माण कार्य वर्ष 2008 से चल रहा
शीतलविहार न्यास के अध्यक्ष सचिन जैन ने बताया कि समवसरण मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 2008 से जारी है और अब यह पूर्णता की ओर है। मंदिर की कुल ऊंचाई लगभग 135 फीट होगी। इसकी विशेष बात यह है कि इसका निर्माण बिना लोहा और सीमेंट के, पूरी तरह पत्थरों से किया जा रहा है। मंदिर में चार दिशाओं में भगवान शीतलनाथ की प्रतिमाएं और 72 जिन प्रतिमाएं विराजमान होंगी। सचिन जैन ने यह भी बताया कि निर्माण कार्य में अभी लगभग डेढ़ वर्ष का समय और लगेगा, जिसके बाद आचार्य समयसागर महाराज के सानिध्य में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव आयोजित किए जाने की संभावना है। प्रवक्ता अविनाश जैन ने मंच से घोषणा की कि मुख्य बेदी और शिखर का कार्य लगभग चार माह में पूर्ण कर लिया जाएगा। पत्थरों में एक का वजन लगभग नौ टन
मुनि श्री ने अपने उद्बोधन में 2008 में हुए शिलान्यास की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि तब जो बीज बोया गया था, आज वह विशाल समवसरण मंदिर के रूप में आकार ले चुका है। उन्होंने बताया कि 100 फीट ऊंचाई पर शिखर स्थापना के दौरान अद्भुत शिल्पकला का अनुभव हुआ। डोम पर स्थापित किए गए पत्थरों में एक पत्थर का वजन लगभग नौ टन है। विशेष आर्किटेक्चरल तकनीक से चार भागों में तैयार किए गए इन पत्थरों को सावधानीपूर्वक स्थापित किया गया। मुनि श्री ने कारीगरों, इंजीनियरों और मजदूरों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि मंदिर केवल दान से नहीं, बल्कि श्रमिकों के पसीने और परिश्रम से बनते हैं। इतनी ऊंचाई पर पत्थर कार्य करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सभी ने धैर्य और सावधानी से इसे पूर्ण किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि प्रत्येक परिवार मुख्य बेदी पर एक शिला अवश्य स्थापित करे, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी समवसरण का आशीर्वाद प्राप्त होता रहे।



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