आम के गुच्छों में लग रही ये खतरनाक बीमारी, समय रहते जानें बचाव का उपाय

आम के गुच्छों में लग रही ये खतरनाक बीमारी, समय रहते जानें बचाव का उपाय


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आम के गुच्छों में लग रही ये खतरनाक बीमारी, समय रहते जानें बचाव का उपाय

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Agriculture News: आम के पेड़ों में यह रोग उत्तर भारत में ज्यादा पाया जाता है. अक्टूबर से फरवरी माह तक कम तापमान रहने के चलते पेड़ों में मालफॉर्मेशन की समस्या बढ़ जाती है. इसी कारण से एथिलीन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो गुच्छा रोग को बढ़ावा देता है.

सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र का सुंदरजा आम अपनी खास मिठास और खुशबू के लिए विश्व प्रसिद्ध है. फरवरी का महीना आम के लिए टर्निंग पॉइंट माना जाता है. जनवरी की कड़ाके की ठंड और शीतलहर के कारण आम के पेड़ों की वृद्धि रुक जाती है लेकिन फरवरी में मौसम बदलने के साथ पेड़ों में दोबारा ग्रोथ शुरू हो जाती है. इसी समय पेड़ों पर छोटी फलियां निकलनी शुरू हो जाती हैं. सीधी की ब्लॉक अधिकारी दिव्यानी सिंह राजपूत ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि फरवरी के महीने में गर्मियों की आहट के साथ आम के बागों में रौनक बढ़ जाती है लेकिन यही समय सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत की होती है. यदि इस समय थोड़ी सी लापरवाही की जाए, तो फल झड़ने लगते हैं और पैदावार पर सीधा असर पड़ता है, खासकर गुच्छा रोग, जिसे स्मॉल फॉर्मेशन या मालफॉर्मेशन भी कहा जाता है.

दिव्यानी सिंह ने बताया कि गुच्छा रोग में टहनियों पर निकलने वाली पत्तियां और शाखाएं छोटी होकर गुच्छे का रूप ले लेती हैं. इससे पौधे की सामान्य वृद्धि रुक जाती है और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए, तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है.

यह रोग उत्तर भारत में अधिक
उन्होंने आगे बताया कि यह रोग उत्तर भारत में अधिक पाया जाता है. अक्टूबर से फरवरी तक कम तापमान रहने के कारण पेड़ों में मालफॉर्मेशन की समस्या बढ़ जाती है. इसी वजह से एथिलीन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो गुच्छा रोग को बढ़ावा देता है. एक सूक्ष्म मकड़ी भी इस रोग को पूरे पेड़ में फैलाने का काम करती है, जिससे सभी गुच्छे प्रभावित हो सकते हैं और फलियां खराब हो जाती हैं.

रोगग्रस्त गुच्छों को फौरन जलाएं
कृषि अधिकारी के मुताबिक, नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत, मैंकोजेब 63 प्रतिशत और अल्फा नेफथाइल एसिटिक एसिड 4.5 प्रतिशत एसएल का छिड़काव लाभकारी हो सकता है. आवश्यकता पड़ने पर कीटनाशक और कॉपर ऑक्सिक्लोराइड का भी प्रयोग किया जा सकता है. साथ ही फल तोड़ने के बाद रोगग्रस्त गुच्छों को काटकर तुरंत जला देना चाहिए ताकि संक्रमण दोबारा न फैले. समय पर देखभाल और उचित दवा के प्रयोग से किसान अपनी आम की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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