खून मांगती भोपाल की सड़कें! एक्सीडेंट बनी पहचान, ये इलाके-चौराहे सबसे खतरनाक

खून मांगती भोपाल की सड़कें! एक्सीडेंट बनी पहचान, ये इलाके-चौराहे सबसे खतरनाक


रिपोर्ट- वासु चौरे, भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सड़कों पर सफर करना खौफ में बदलता जा रहा है. सरकारी आंकड़ों की मानें, तो पिछले तीन वर्षों में भोपाल की सड़कों पर 645 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. प्रशासन ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को सुधारने का दावा तो कर रहा है लेकिन धरातल पर स्थितियां अब भी चिंताजनक बनी हुई हैं. भोपाल में हर दूसरे दिन सड़क हादसे में एक जान जा रही है. पिछले तीन सालों का डेटा सिस्टम की विफलता और रफ्तार के कहर को बयां करता है. आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2023 में 2906 सड़क हादसे हुए. इनमें 196 लोगों की मौत हुई. साल 2024 सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से सबसे घातक साल साबित हुआ था. उस साल सड़क हादसों में 235 मौतें हुई थीं. वहीं 2025 में हादसों में मामूली गिरावट दिखी, पर खतरा बरकरार रहा. पिछले साल 214 एक्सीडेंट्स में मौतें हुई थीं.

साल 2022 से 2024 के आंकड़ों केअनुसार, चिह्नित 16 ब्लैक स्पॉट्स पर कुल 99 गंभीर हादसे हुए, जिनमें 27 लोगों की जान गई. फरवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल पुलिस ने शहर के 16 चिह्नित ब्लैक स्पॉट्स में से पांच को सुरक्षित घोषित कर सूची से हटा दिया है. इनमें डीबी मॉल क्रॉसिंग, चिरायु अस्पताल चौराहा और बेस्ट प्राइस क्रॉसिंग जैसे व्यस्त इलाके शामिल हैं. हालांकि अभी भी 11 सक्रिय ब्लैक स्पॉट्स शहर के लिए सिरदर्द बने हुए हैं.

ये इलाके और चौराहे सबसे खतरनाक
मिसरोद थाना क्षेत्र (सबसे घातक): यह क्षेत्र शहर का सबसे बड़ा डेंजर जोन बना हुआ है. साल 2025 में यहां 183 हादसों में 26 लोगों की मौत हुई. यहां का ‘ग्यारह मील’ (11 Mile) चौराहा शहर का दूसरा सबसे घातक ब्लैक स्पॉट है.

प्लेटिनम प्लाजा (अटल पथ): इसे शहर का सबसे खतरनाक शहरी जंक्शन माना गया है, जहां पिछले तीन वर्षों में 16 हादसों में 8 मौतें दर्ज की गईं.

खजूरी सड़क (इंदौर-भोपाल हाईवे): 2024 में यह सबसे घातक क्षेत्र था लेकिन 2025 में सुरक्षा उपायों के बाद मौतों में 56 फीसदी की कमी आई और आंकड़ा 25 से घटकर 11 पर आ गया.

अन्य प्रभावित क्षेत्र: कोहेफिजा में 21 मौतें, कोलार में 18 मौतें और छोला मंदिर क्षेत्र में 15 मौतें दर्ज की गईं.

बजट बनाम हकीकत
हादसों को रोकने के लिए सरकार ने नगर निगम को 3.98 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते अब तक इनका कोई खास उपयोग नहीं हुआ है. सड़कों के लेफ्ट टर्न चौड़े करने, रंबल स्ट्रिप लगाने और अवैध कट प्वाइंट्स को बंद करने जैसे जमीनी काम अभी भी फाइलों में अटके हैं. भोपाल ट्रैफिक पुलिस के एडिशनल डीसीपी बसंत कौल ने दावा किया कि पुलिस लगातार नगर निगम, पीडब्ल्यूडी जैसी एजेंसियों से मीटिंग और पत्राचार कर शहर की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का काम कर रही है.

सड़क सुरक्षा पर सवाल बरकरार
बीआरजीएस कॉरिडोर हटने के बाद चौड़ी हुई सड़कों ने वाहनों की रफ्तार तो बढ़ा दी है लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम अब भी अधूरे हैं. जब तक ‘ब्लैक स्पॉट्स’ के इंजीनियरिंग डिफेक्ट्स को पूरी तरह ठीक नहीं किया जाता, भोपाल की सड़कें इसी तरह लोगों का खून मांगती रहेंगी. वहीं शहर और ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए बनाए गए ओवर ब्रिज भी अपने डिजाइन को लेकर विवादों में हैं, चाहें बात 90 डिग्री वाले ब्रिज की हो, बावड़ियां कला की हो या अन्य रास्तों की, आम लोग हर जगह परेशान होते दिखाई देते हैं.



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