Sagar News: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में कमाल! 9 साल के बच्चे की जबड़े की जटिल सर्जरी सफल, अब खा सकेगा रोटी-गोलगप्पे

Sagar News: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में कमाल! 9 साल के बच्चे की जबड़े की जटिल सर्जरी सफल, अब खा सकेगा रोटी-गोलगप्पे


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Sagar News: डॉक्टरों का कहना है कि अब यह 9 साल का बच्चा रोटी और गोलगप्पे भी आराम से खा सकता है और कुछ दिनों बाद सामान्य जीवन जी सकेगा. जब से उसके जबड़े में चोट लगी थी और मुंह बंद हो गया था. उसकी हालत यह थी कि वह रोटी का टुकड़ा भी सीधे नहीं डाल सकता था और अधिकतर चीजें लिक्विड फॉर्म में ही लेनी पड़ती थी. रोटी खाने की इच्छा होने पर उसे दूध या पतली सब्जी में मिलाना पड़ता था. लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह परेशानी बढ़ गई.

सागरः सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में जबड़े की समस्या से पीड़ित एक बच्चे की सफल सर्जरी की गई है. जिसे टेम्पोरो-मैंडिबुलर जॉइंट (TMJ) एंकायलोसिस कहा जाता है. डेंटल और एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने मिलकर इस बच्चे का सफल ऑपरेशन किया है. यह बच्चा पिछले तीन वर्षों से अपना मुंह नहीं खोल पा रहा था और केवल लिक्विड डाइट पर निर्भर था. इस ऑपरेशन के बाद बुंदेलखंड के लोगों के लिए यह अच्छी खबर है कि अब मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के लिए मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि इस प्रकार की सफल सर्जरी सागर में भी संभव हो गई है और इसका उत्कृष्ट उदाहरण इस बच्चे की सर्जरी है.

दरअसल 9 साल का यह बच्चा जब लगभग 6 वर्ष का था तब गिरकर उसके जबड़े की हड्डी टूट गई थी और गलत तरीके से जुड़ने के कारण उसका मुंह खुलना बंद हो गया था. वह न तो सही से बोल पाता था और न ही किसी चीज को चबा पाता था. पिछले तीन साल से वह इस समस्या से जूझ रहा था. लेकिन ऑपरेशन के बाद अब उसका मुंह 3 से 4 सेंटीमीटर (30mm) तक खुलने लगा है. फिलहाल उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है.

डॉक्टरों का कहना है कि अब यह 9 साल का बच्चा रोटी और गोलगप्पे भी आराम से खा सकता है और कुछ दिनों बाद सामान्य जीवन जी सकेगा. जब से उसके जबड़े में चोट लगी थी और मुंह बंद हो गया था. उसकी हालत यह थी कि वह रोटी का टुकड़ा भी सीधे नहीं डाल सकता था और अधिकतर चीजें लिक्विड फॉर्म में ही लेनी पड़ती थी. रोटी खाने की इच्छा होने पर उसे दूध या पतली सब्जी में मिलाना पड़ता था. लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह परेशानी बढ़ गई. ऐसे में उसके माता-पिता उसे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए लाए. डेंटल विभाग की डॉक्टर श्वेता भटनागर ने पूरा चेकअप किया और थ्री डी सी टी स्कैन में ज्वाइंट जुड़े हुए पाए गए. जिसके बाद टीम ने सर्जरी का निर्णय लिया. 3 घंटे की मेहनत के बाद सर्जरी सफल रही और अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है.

डॉ. सर्वेश जैन ने बताया कि बच्चे का मुंह पूरी तरह बंद था. इसलिए सामान्य तरीके से बेहोश करना (Intubation) असंभव था. डॉ. शशि वाला के नेतृत्व में एनेस्थीसिया टीम ने ‘नेजल फाइबर-ऑप्टिक इंट्यूबेशन’ जैसी विशेष तकनीक का उपयोग कर इस बाधा को पार किया. सर्जरी डॉ. श्वेता भटनागर और उनकी टीम द्वारा अत्यंत सटीकता के साथ की गई. अब नियमित फिजियोथेरेपी से बच्चे की स्थिति में और भी बेहतर सुधार होगा.



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