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Jabalpur Gilli Danda Competition: जबलपुर में जिला पंचायत द्वारा गिल्ली-डंडा की भव्य जिला स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है. इस पारंपरिक खेल को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने का उद्देश्य है. प्रतियोगिता की शुरुआत जनपद स्तर से होगी और हर जनपद से एक टीम जिला स्तर पर पहुंचेगी. विजेता टीम को 21 हजार रुपये तक की इनामी राशि और ट्रॉफी दी जाएगी. 22 फरवरी 2026 तक खिलाड़ी अपनी जनपद टीम के लिए आवेदन कर सकते हैं.
Jabalpur News: तैयार हो जाइए! फिर से वही बचपन वाला जोश लौटने वाला है. जबलपुर में अब गिल्ली-डंडा सिर्फ यादों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े मंच पर खेला जाएगा. डिजिटल दौर में जहां बच्चे मोबाइल गेम्स में खो गए हैं, वहीं जिला पंचायत जबलपुर ने एक अनोखी पहल की है. ‘गिल्ली-डंडा’ को फिर से जिंदा करने के लिए जिला स्तरीय पारंपरिक खेल प्रतियोगिता का ऐलान कर दिया गया है.
हमारी परंपरा, हमारी पहचान
इस प्रतियोगिता का मकसद साफ है हमारी पुरानी खेल परंपरा को बचाना और नई पीढ़ी को उससे जोड़ना. स्लोगन भी दिया गया है कि “हमारी परम्परा, हमारी विरासत” और “पारंपरिक खेल हमारी पहचान.” सबसे खास बात ये है कि प्रतियोगिता की शुरुआत गांव स्तर से होगी. पहले जनपद स्तर पर टीमों का चयन होगा. जबलपुर जिले के हर जनपद से सिर्फ एक बेहतरीन टीम चुनी जाएगी. कुल 7 टीमें जिला स्तरीय फाइनल मुकाबले में भिड़ेंगी.
जीतने वालों पर होगी इनामों की बारिश
इस प्रतियोगिता को और रोमांचक बनाने के लिए शानदार इनामी राशि भी रखी गई है.
प्रथम पुरस्कार: 21,000 रुपये और ट्रॉफी
द्वितीय पुरस्कार: 11,000 रुपये और ट्रॉफी
तृतीय पुरस्कार: 5,100 रुपये और ट्रॉफी
सांत्वना पुरस्कार: 1,100 रुपये (कुल 4 टीमों को)
यानी खेल के साथ सम्मान और अच्छी-खासी रकम भी मिलेगी.
कौन ले सकता है भाग?
इस प्रतियोगिता में सिर्फ जबलपुर जिले के निवासी खिलाड़ी ही हिस्सा ले सकते हैं. अगर आप पारंपरिक खेलों में रुचि रखते हैं तो अपनी जनपद टीम में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं. टीम चयन की आखिरी तारीख 22 फरवरी 2026 तय की गई है. जिला प्रशासन के इस फैसले के बाद युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. अब देखना होगा कि गिल्ली-डंडा का यह जुनून कितनी दूर तक जाता है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें