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Gardening Tips: रामसिया पटेल ने लोकल 18 से कहा कि गुड़हल को पोटैशियम बहुत पसंद होता है. इसके लिए केले के छिलके घरेलू खाद का काम करते हैं. 2-3 केले के छिलकों को धूप में सुखाकर पीस लें और पाउडर बना लें. महीने में एक बार इस पाउडर को मिट्टी में मिला दें.
सीधी. फरवरी का महीना गार्डन में नए पौधे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है. इस दौरान तापमान का संतुलन पौधों को तेजी से जड़ पकड़ने में मदद करता है. खासतौर पर गुड़हल का पौधा अगर इस समय लगाया जाए, तो गर्मियों की शुरुआत में ही उस पर सैकड़ों फूल खिल सकते हैं. मध्य प्रदेश के सीधी के गार्डन एक्सपर्ट माली रामसिया पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि सर्दियों के बाद गुड़हल की मिट्टी अक्सर सख्त हो जाती है. ऐसी स्थिति में जड़ों तक हवा और पोषण सही तरीके से नहीं पहुंच पाता, इसलिए फरवरी के आखिरी दिनों में मिट्टी की हल्की गुड़ाई करना बेहद जरूरी है. किसी नुकीले औजार की मदद से ऊपर की मिट्टी को हल्के-हल्के ढीला करें लेकिन ध्यान रखें कि जड़ों को नुकसान न पहुंचे. गुड़ाई से मिट्टी में हवा का संचार बढ़ता है और पानी का ड्रेनेज बेहतर होता है. इससे जड़ें तेजी से बढ़ती हैं और पौधा नई शाखाएं और ज्यादा कलियां बनाने के लिए तैयार हो जाता है. गुड़ाई करने के बाद दो दिन तक पौधे में पानी नहीं देना चाहिए ताकि जड़ें मजबूत बन सकें.
रामसिया पटेल के मुताबिक, गुड़हल को पोटैशियम बहुत पसंद होता है. इसके लिए केले के छिलके बेहतरीन घरेलू खाद का काम करते हैं. 2-3 केले के छिलकों को धूप में सुखाकर पीस लें और उसका पाउडर बना लें. इस पाउडर को महीने में एक बार मिट्टी में मिला दें. इससे पौधे को जरूरी मिनरल्स मिलते हैं, फूलों का आकार बड़ा होता है और रंग ज्यादा गहरा और आकर्षक बनता है. यह पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित तरीका है, जिससे मिट्टी की सेहत भी बेहतर रहती है.
चायपत्ती भी गुड़हल के लिए फायदेमंद
इसके अलावा इस्तेमाल की हुई चायपत्ती भी गुड़हल के लिए फायदेमंद साबित होती है. अक्सर लोग चायपत्ती फेंक देते हैं लेकिन अगर इसे अच्छी तरह धोकर सुखा लिया जाए, तो यह बेहतरीन जैविक खाद बन सकती है. ध्यान रखें कि चायपत्ती में दूध या चीनी न बची हो. सूखी चायपत्ती को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इसमें मौजूद हल्की अम्लीय प्रकृति गुड़हल के लिए अनुकूल मानी जाती है, जिससे पौधा स्वस्थ रहता है और फूल ज्यादा समय तक टिके रहते हैं.
अगर फरवरी में ये छोटे-छोटे उपाय अपना लिए जाएं, तो मार्च-अप्रैल में गुड़हल का पौधा रंग-बिरंगे, बड़े और आकर्षक फूलों से लदा नजर आएगा. थोड़ी सी मेहनत से आपका गार्डन न सिर्फ हरा-भरा रहेगा बल्कि घर बैठे प्रकृति का सुकून और ताजगी भी देगा.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.