खंडवा. खंडवा शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है. इन्हीं धरोहरों में गणेश तलाई क्षेत्र में स्थित करीब 500 साल पुराना श्री गणेश मंदिर शामिल हैं, जिसे स्वयंभू मंदिर माना जाता है. मान्यता है कि यहां भगवान गणेश स्वयं प्रकट हुए थे और तभी से यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया. यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका इतिहास भी शहर की पहचान से जुड़ा हुआ है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, आज जहां मंदिर बना हुआ है, वहां पहले एक बड़ा तालाब हुआ करता था, जिसे गणेश तलाई कहा जाता था. यह खंडवा की ऐतिहासिक तीन तलाईयों में सबसे प्रमुख और बड़ी तलाई मानी जाती थी. उसी तालाब के बीच एक बेड़ी (चबूतरे) पर भगवान गणेश की पूर्वमुखी स्वयंभू प्रतिमा विराजित थी. धीरे-धीरे यहां भक्तों की आस्था बढ़ती गई और बाद में मंदिर का निर्माण कराया गया. भगवान गणेश के नाम पर ही इस पूरे क्षेत्र का नाम गणेश तलाई पड़ गया, जो आज खंडवा का प्रमुख और घनी आबादी वाला इलाका है.
50 वर्षों से लगातार सेवा कर रहे हैं पुजारी
मंदिर के पुजारी चंद्रशेखर दीक्षित ने Local 18 से बातचीत में बताया कि यह मंदिर करीब 500 साल पुराना है और इसे स्वयंभू मंदिर के रूप में जाना जाता है. उन्होंने बताया कि इस मंदिर में सबसे पहले शंकर महाराज ने सेवा की थी और अब वे स्वयं पिछले 50 वर्षों से यहां पूजा-अर्चना कर रहे हैं. उनकी उम्र 85 वर्ष हो चुकी है, लेकिन आज भी वे पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की सेवा कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि मंदिर की सेवा अब उनकी अगली पीढ़ी भी संभाल रही है, जिससे यह परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है. मंदिर में भगवान गणेश के साथ रिद्धि-सिद्धि की प्रतिमाएं भी विराजित हैं, जिन्हें करीब 20 साल पहले स्थापित किया गया था. इसके अलावा मंदिर परिसर में भगवान शिव और हनुमान जी के मंदिर भी बने हुए हैं, जहां श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.
दूर-दूर से पहुंचते हैं भक्त
मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. नागपुर से शादी करके खंडवा आई एक महिला ने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से इस मंदिर में दर्शन करने आ रही हैं. उनका कहना है कि उन्होंने यहां कई चमत्कार देखे हैं और भगवान गणेश से जो भी मांगा, उन्हें प्राप्त हुआ.
मंदिर के पास रहने वाली 62 वर्षीय कविता सिंह कुशवाहा ने बताया कि उनका बचपन इसी क्षेत्र में बीता है और वह बचपन से इस मंदिर को देखती आ रही हैं.पहले यहां जंगल हुआ करता था और बहुत कम मकान थे। उस समय मंदिर कच्चे ओटले पर बना हुआ था, लेकिन बाद में इसका जीर्णोद्धार किया गया और मंदिर को भव्य रूप दिया गया. उन्होंने कहा कि आज गणेश तलाई क्षेत्र में हजारों लोग रहते हैं और सभी की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है.
गणेश उत्सव पर लगता है भक्तों का मेला
मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है, लेकिन गणेश चतुर्थी के दौरान यहां विशेष आयोजन होते हैं. 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव में यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं. इस दौरान भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. स्थानीय महिलाएं भी उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं.
गणेश तलाई का यह प्राचीन मंदिर खंडवा की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत उदाहरण है.सैकड़ों वर्षों से यह मंदिर लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. यहां आने वाले भक्त न सिर्फ भगवान के दर्शन करते हैं, बल्कि इस प्राचीन धरोहर के इतिहास को भी महसूस करते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मंदिर शहर की पहचान है और आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और संस्कृति की अमूल्य धरोहर बना है.