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Indore News: मेट्रो प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए पिपलिया खाल स्थित वेयर हाउस के पास की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. आधिकारिक रिकॉर्ड में यहां 16 मकान दर्ज है. मेट्रो प्रबंधन ने इनके पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन को 1.29 करोड़ रुपये की राशि भी सौंप दी है. प्रशासन की योजना इन परिवारों को रंगवासा स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के ताप्ती परिसर में शिफ्ट करने की है.
इंदौर में मेट्रो के अगले फेज के लिए निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. बड़ा गणपति क्षेत्र के पिपलिया खाल में प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए 16 मकानों को हटाए जाने की बात कही जा रही है. यहां के निवासियों को विस्थापित कर रंगवासा में बनाए गए फ्लैट्स दिए जाएंगे. हालांकि, यहां के लोगों का कहना है कि वे कई सालों से यहां रह रहे है, जबकि रंगवासा में किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं हैं और उन्हें इसके बदले उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए.
दरअसल, मेट्रो प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए पिपलिया खाल स्थित वेयर हाउस के पास की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. आधिकारिक रिकॉर्ड में यहां 16 मकान दर्ज है. मेट्रो प्रबंधन ने इनके पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन को 1.29 करोड़ रुपये की राशि भी सौंप दी है. प्रशासन की योजना इन परिवारों को रंगवासा स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के ताप्ती परिसर में शिफ्ट करने की है.
किरण समेत यहां के रहवासियों का कहना है कि वे करीब 50 साल से यहां रह रहे है. घरों में छोटा-मोटा काम करके अपनी रोजी-रोटी चलाते है. यहां उनके अपने जमीन पर बने मकान है. कई लोगों के घरों में परिजनों को गंभीर बीमारियां है. रंगवासा में जहां उन्हें स्थानांतरित करने की बात की जा रही है, वह बहुत दूर है। वहां कामकाज के अवसर नहीं मिलेंगे और आने-जाने का साधन भी नहीं है. वे प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उन्हें अपनी जमीन के बदले गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा दिया जाए या फिर इतनी जमीन पर बने हुए मकान दिए जाएं. रहवासियों का दावा है कि उनके पास राजीव गांधी आश्रय मिशन के तहत वैध पट्टे है. इसलिए उन्हें महज अतिक्रमणकारी न मानकर उचित मुआवजा और सम्मानजनक विस्थापन दिया जाए.
रहवासियों का कहना है कि यहां स्टेशन बन रहा है जिसके लिए दिन-रात बड़ी-बड़ी मशीनें चलती रहती है. 24 घंटे यहां मशीनों की आवाज आती है, जिससे लोगों को ब्लड प्रेशर, चक्कर आना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो रही है. रातभर सो नहीं पाते, जिससे अगले दिन काम पर भी परेशानी होती है. बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. कई बार कलेक्टर से मिलकर बात करने की कोशिश की गई. लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं मिला है.