Explained: सुपर-8 फॉर्मेट पर हो रही आईसीसी की आलोचना, टी20 वर्ल्ड कप में क्या है नया विवाद?

Explained: सुपर-8 फॉर्मेट पर हो रही आईसीसी की आलोचना, टी20 वर्ल्ड कप में क्या है नया विवाद?


T20 World Cup Controversy: टी20 वर्ल्ड कप के अगले राउंड के लिए क्वालीफाई करने वाली 8 टीमों के नाम फाइनल हुए, आईसीसी ‘प्री-सीडिंग’ फॉर्मेट को लेकर सोशल मीडिया पर तूफान के बीच फंस गई. सभी चार ग्रुप विनर एक ही सुपर 8 ग्रुप में हैं, जबकि 4 रनर-अप को दूसरे ग्रुप में रखा गया है.

  1. T20 World Cup 2026 Controversy: इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच नए विवाद में फंसता हुआ नजर आ रहा है. भारत-श्रीलंका की मेजबानी में हो रहे इस टूर्नामेंट में ग्रुप दौर के मैच 20 फरवरी को समाप्त हो जाएंगे. उसके बाद सुपर-8 राउंड की शुरुआत होगी. 20 में से 8 टीमों ने इसमें अपनी जगह पक्की कर ली है. अब उनके बीच ट्रॉफी जीतने के लिए लड़ाई होने वाली है. इस बार ऑस्ट्रेलिया की टीम नॉकआउट राउंड में नहीं है. उसे जिम्बाब्वे ने बाहर करके अगले दौर में जगह बनाई है.

  2. ‘प्री-सीडिंग’ फॉर्मेट ने किया परेशान

  3. जैसे ही टूर्नामेंट के अगले राउंड के लिए क्वालीफाई करने वाली 8 टीमों के नाम फाइनल हुए, आईसीसी ‘प्री-सीडिंग’ फॉर्मेट को लेकर सोशल मीडिया पर तूफान के बीच फंस गई. सभी चार ग्रुप विनर एक ही सुपर 8 ग्रुप में हैं, जबकि 4 रनर-अप को दूसरे ग्रुप में रखा गया है. प्री-सीडिंग सिस्टम से सुपर 8 ग्रुप असमान हो गया है.  आईसीसी ने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही टॉप टीमों को फिक्स्ड स्लॉट (जैसे, A1, B1, C1, और D1) दे दिए थे.

  4. आईसीसी का नियम

    – ग्रुप 1 में अब वे सभी चार टीमें हैं जो अपने ग्रुप में टॉप पर थीं (इंडिया, जिम्बाब्वे, वेस्ट इंडीज और साउथ अफ्रीका).

    – ग्रुप 2 में पूरी तरह से रनर-अप (पाकिस्तान, श्रीलंका, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड) हैं.

  5. किसे फायदा, किसे नुकसान?

  6. यह फॉर्मेट गारंटी देता है कि पहले राउंड से टूर्नामेंट की सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाली दो टीमें सेमीफाइनल से पहले बाहर हो जाएंगी. वहीं, जो टीम अपने ग्रुप में सिर्फ दूसरे नंबर पर रही, उसके लिए अब सेमीफाइनल में पहुंचने का रास्ता आसान हो गया है. परंपरागत रूप से टूर्नामेंट में ग्रुप विनर्स को मदद दी जाती है, लेकिन इस फॉर्मेट में टॉप पर रहने से बहुत कम फायदा होने वाला है.

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  8. सह-मेजबान श्रीलंका को घाटा

  9. उदाहरण के लिए- साउथ अफ्रीका ने अपना ग्रुप जीता लेकिन उसे लोअर सीड माना गया क्योंकि न्यूजीलैंड को पहले से ही ऊंची रैंक दी गई थी.  न्यूजीलैंड अपने ग्रुप में दूसरे नंबर पर रहा था. नतीजतन एक बार टॉप आठ टीमें कन्फर्म हो जाने के बाद फाइनल ग्रुप-स्टेज मैच सुपर 8 के लिए वैल्यू खो देते हैं, जिससे टूर्नामेंट से वह रोमांचक ड्रामा खत्म हो जाता है जिसकी फैंस उम्मीद करते हैं. आलोचकों ने यह भी बताया है कि यह शेड्यूल सह-मेजबान श्रीलंका को कैसे नुकसान पहुंचाता है. अब तक अपने सभी मैच घर पर खेलने के बावजूद अगर टीम सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करती है, तो उसे भारत आने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. श्रीलंका की टीम को कोलंबो में अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेलने का मौका नहीं मिलेगा. 

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  11. आईसीसी की क्या मजबूरी?

  12. आईसीसी ने लॉजिस्टिक चुनौतियों का हवाला देते हुए इस कदम का बचाव किया है. भारत और श्रीलंका में टूर्नामेंट को बेहतर तरीके से आयोजित करने के लिए पहले से प्लानिंग की जरूरत है. गवर्निंग बॉडी का कहना है कि वेन्यू और शेड्यूलिंग को मैनेज करने के लिए प्री-सीडिंग सिस्टम जरूरी था.
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