गठिया को न समझें सिर्फ बुढ़ापे की बीमारी: समय पर इलाज से सामान्य जीवन संभव; भोपाल में विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय – Bhopal News

गठिया को न समझें सिर्फ बुढ़ापे की बीमारी:  समय पर इलाज से सामान्य जीवन संभव; भोपाल में विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय – Bhopal News




गठिया को लेकर समाज में कई तरह की गलत धारणाएं फैली हुई हैं। अधिकतर लोग इसे केवल बढ़ती उम्र की बीमारी मानते हैं या यह सोचते हैं कि इसकी दवाओं से किडनी खराब हो जाती है और स्टेरोइड्स हमेशा नुकसान पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये धारणाएं पूरी तरह सही नहीं हैं। अस्थि रोग विभाग के विभाध्यक्ष डॉ. आशीष गोहिया ने स्पष्ट किया कि गठिया किसी भी उम्र में हो सकता है और विशेषज्ञ की निगरानी में दी गई दवाएं सुरक्षित होती हैं। समय पर पहचान और सही इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। इसी रोग को लेकर गांधी मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग द्वारा “आर्थराइटिस अपडेट” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम डॉ. आशीष गोहिया के नेतृत्व में अधिष्ठाता डॉ. कविता एन. सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक हमीदिया चिकित्सालय डॉ. सुनीत टंडन सहित मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सिम्मो दुबे और शिशु रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मंजूषा गोयल उपस्थित रहीं। सुबह की जकड़न हो सकती है शुरुआती संकेत डॉ. गोहिया ने बताया कि यदि सुबह उठते ही आधे घंटे तक जोड़ों में जकड़न बनी रहती है तो यह गठिया का शुरुआती लक्षण हो सकता है। यह ब्लड प्रेशर और शुगर की तरह एक क्रोनिक बीमारी है, जिसकी दवा लंबे समय तक लेनी पड़ सकती है। “आर्थराइटिस अपडेट” कार्यक्रम में गठिया से संबंधित बताए गए तथ्य:
1. गठिया केवल वृद्धावस्था का रोग नहीं है, यह युवाओं और बच्चों में भी हो सकता है।
2. रूमेटाइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून रोग है, जो समय पर उपचार न मिलने पर स्थायी विकृति उत्पन्न कर सकता है।
3. सुबह की जकड़न सूजन वाले गठिया का महत्वपूर्ण लक्षण है, परंतु इसके अभाव में भी रोग संभव है।
4. प्रारंभिक 3 से 6 महीनों को उपचार की महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है।
5. डीएएस 28 स्कोर द्वारा रोग की सक्रियता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाता है।
6. पूर्ण नियंत्रण हेतु “ट्रीट टू टारगेट” रणनीति अपनाना आवश्यक है।
7. बायोलॉजिकल दवाओं के उपयोग से पूर्व संक्रमण की आवश्यक जाँच करना अनिवार्य है।
8. समय पर औषधीय उपचार से शल्य चिकित्सा की आवश्यकता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
9. बहु-विषयक दृष्टिकोण रोगी के समग्र उपचार के लिए आवश्यक है।
10. रोगी की जागरूकता, नियमित फॉलोअप एवं जीवनशैली में सुधार सफल उपचार की आधारशिला हैं। गठिया के दो प्रमुख प्रकार विशेषज्ञों ने बताया कि गठिया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला ऑस्टियोआर्थराइटिस, जो बढ़ती उम्र और जोड़ों के घिसाव के कारण होता है। दूसरा ऑटोइम्यून गठिया, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही जोड़ों पर हमला करती है। ऑटोइम्यून समूह में रुमेटोइड आर्थराइटिस, एंकीलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस, लुपस और सोरायसिस संबंधी गठिया शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर ये रोग स्थायी विकृति तक पैदा कर सकते हैं। पुरुषों और महिलाओं में अलग लक्षण कार्यक्रम में बताया गया कि महिलाओं में गठिया अक्सर कलाई और हाथ के छोटे जोड़ों से शुरू होता है, जबकि पुरुषों में यह रीढ़ और कमर को प्रभावित करता है। सुबह की जकड़न और दर्द इसके सामान्य संकेत हैं। इलाज में देरी होने पर जोड़ों में टेढ़ापन आ सकता है। आधुनिक इलाज और ‘ट्रीट टू टारगेट’ रणनीति केस आधारित पैनल चर्चा में रुमेटोइड आर्थराइटिस के शुरुआती निदान, आवश्यक जांच, डीएएस 28 स्कोर, बूलियन रेमिशन मानदंड और आधुनिक औषधीय उपचार पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि शुरुआती 3 से 6 महीने इलाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। “ट्रीट टू टारगेट” रणनीति अपनाकर रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। बायोलॉजिकल दवाओं के उपयोग से पहले संक्रमण की जांच जरूरी है। समय पर दवा शुरू करने से सर्जरी की जरूरत काफी हद तक कम की जा सकती है। जागरूकता और नियमित फॉलोअप जरूरी विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि गठिया केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है, यह युवाओं और बच्चों में भी हो सकता है। रोगी की जागरूकता, नियमित फॉलोअप और जीवनशैली में सुधार सफल उपचार की आधारशिला हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य रेजिडेंट डॉक्टरों और संकाय सदस्यों को नवीनतम दिशानिर्देशों और साक्ष्य आधारित चिकित्सा से अवगत कराना था। सक्रिय सहभागिता के साथ कार्यक्रम सफल रहा और भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक आयोजन करने का संकल्प दोहराया गया।



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