राम भक्ति में डूबा सीधी! 63 साल से अखंड संकीर्तन का जाप, 2070 तक का संकल्प

राम भक्ति में डूबा सीधी! 63 साल से अखंड संकीर्तन का जाप, 2070 तक का संकल्प


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Sidhi News: अध्यात्म रामायण मंदिर के पुजारी शत्रुघ्न दास महाराज जी ने लोकल 18 से कहा कि गोपाल दास महाराज को स्वयं हनुमान जी से ‘जय सियाराम जय जय सियाराम’ मंत्र की प्रेरणा प्राप्त हुई थी. उन्होंने साल 1962 में मणिकूट आश्रम में अखंड संकीर्तन आरंभ किया था.

सीधी. मध्य प्रदेश के सीधी जिले में पिछले 63 साल से एक मंदिर में अखंड संकीर्तन ‘जय सियाराम जय जय सियाराम’ चल रही है. अखंड संकीर्तन की शुरुआत पुजारी रहे गोपाल दास महाराज जी ने की थी, जो अब अध्यात्म रामायण मंदिर के पुजारी शत्रुघ्न दास महाराज जी की देखरेख में आगे बढ़ रही है. यह अध्यात्म रामायण मंदिर अमरपुर के वार्ड नंबर 10 में स्थित है. इस मंदिर को मणिकूट आश्रम के नाम से भी जाना जाता है. वर्ष 1962 में ब्रह्मलीन ब्रह्मर्षि स्वामी गोपाल दास महाराज ने हनुमान जी की प्रेरणा से यहां अखंड संकीर्तन की शुरुआत की थी, जो आज भी बिना रुके निरंतर जारी है. गर्मी, बरसात या कड़ाके की ठंड किसी भी मौसम ने इस रामधुन नहीं रुकी. मंदिर परिसर में जहां एक ओर अखंड ‘जय सियाराम जय जय सियाराम’ की ध्वनि गूंजती रहती है, वहीं दूसरी ओर अखंड ज्योत भी वर्षों से प्रज्वलित है.

यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित एक प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां अर्जी लगाता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है. श्रद्धालु हनुमान जी के समक्ष नारियल चढ़ाकर अपनी प्रार्थना रखते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर ‘जय सियाराम जय जय सियाराम’ का पाठ करवाते हैं. यही कारण है कि मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से राम भक्त यहां पहुंचते हैं.

12 वर्षों के लिए रखा गया था संकीर्तन
अध्यात्म रामायण मंदिर के पुजारी शत्रुघ्न दास महाराज जी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गोपाल दास महाराज को स्वयं हनुमान जी से ‘जय सियाराम जय जय सियाराम’ मंत्र की प्रेरणा प्राप्त हुई थी. उन्होंने 1962 में मणिकूट आश्रम में अखंड संकीर्तन आरंभ किया था. प्रारंभ में इसे 12 वर्षों के लिए रखा गया था. पहले 12 साल तक साधु-संतों द्वारा बिना किसी शुल्क के निर्धारित समय पर संकीर्तन किया जाता था. साधुओं की ड्यूटी तय रहती थी, जो सुबह 4 से 6 बजे तक संकीर्तन करता, वही शाम 4 से 6 बजे तक भी अपनी सेवा देता. सभी साधु प्रसाद ग्रहण कर बड़ी श्रद्धा और अनुशासन से इस परंपरा को निभाते थे.

भरपूर फसल उत्पादन से खुश हुए क्षेत्रवासी
शत्रुघ्न दास ने कहा कि संकीर्तन शुरू होने के बाद एक-दो वर्षों तक क्षेत्र में अनावृष्टि हुई, जिससे कुछ लोगों ने संदेह जताया कि संकीर्तन के कारण वर्षा नहीं हो रही लेकिन अगले ही वर्ष इतनी अच्छी वर्षा हुई कि पिछले वर्षों की कमी पूरी हो गई. भरपूर फसल उत्पादन से क्षेत्र के लोग खुश हो गए और उनकी आस्था और मजबूत हो गई. वर्ष 2006 में महाराज जी का देहावसान हो गया. उस समय कुछ समय के लिए संकीर्तन की गति प्रभावित हुई, लेकिन परंपरा रुकी नहीं. अब संकीर्तन की व्यवस्था शुल्क आधारित हो गई है, जिसे श्याम दास जी द्वारा संचालित किया जा रहा है.

आस्था, भक्ति और विश्वास का अद्भुत संगम
शत्रुघ्न दास ने आगे कहा कि हनुमान जी की विशेष कृपा और प्रेरणा से यह अखंड संकीर्तन चल रहा है और यह परंपरा 108 वर्षों तक निरंतर जारी रहेगी. मंदिर के पास से गुजरने वाले लोग भी ‘जय सियाराम जय जय सियाराम’ की धुन में डूबे बिना नहीं रह पाते. 6 दशक से अधिक समय से गूंजती यह रामधुन आज सीधी की पहचान बन चुकी है और श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान आस्था, भक्ति और विश्वास का अद्भुत संगम है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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