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साउथ इंडिया के किसान अपने खेतों में अब कोदो की खेती अच्छी कर रहे हैं. इसका बीज रीवा में तैयार कर सभी अनुसंधान केन्द्रों को भेजा गया था. जहां साउथ के अनुसंधान केंद्र ने इस बीज को तैयार किया और किसान इसकी बोनी कर रहे हैं. रीवा की यह कोदो की फसल कम लागत में अच्छे मुनाफे की फसल साबित हो रही है. देशभर में इसकी डिमांड हो रही है.
रीवा. रीवा संभाग की प्रमुख फसलों में कोदो की खेती को लेकर स्थानीय किसानों के साथ-साथ, विंध्य में तैयार उन्नत किस्म का कोदो दक्षिण भारत में धूम मचा रहा है. साउथ के तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक तमिलनाडु जैसे राज्यों के किसान इसे काफी पसंद कर रहे हैं. विंध्य की यह फसल अब साउथ की जमीन पर लहलहा रही है.
कुछ समय से देखा जा रहा है कि रीवा और शहडोल संभाग की प्रमुख फसलों में कोदो की खेती को लेकर स्थानीय किसानों की रुचि घट गई है, लेकिन अब किसानों के बीच में फिर से कम लागत और अच्छे मुनाफे के कारण लोकप्रिय फसल हो रही है. औषधीय गुणों से भरपूर कोदो के महत्व को देखते हुए कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र रीवा ने जेके-49 कोदो तैयार किया था. इसे देश के सभी अनुसंधान केन्द्रों में भेजा गया है. साउथ के अनुसंधान केन्द्र में इसको रिसर्च के बाद तैयार किया गया और किसानों को बीज उपलब्ध कराया गया है. जिसका अच्छ परिणाम देखने को इस सीजन में मिला है.
कोदो औषधीय तत्वों से भरपूर
रीवा कृषि विभाग के उप-संचालक यू.पी. बागरी ने Local18 को बताया कि कोदो विंध्य क्षेत्र में तैयार होता था उसे और बेहतर बनाया गया. यह कोदो औषधीय तत्वों से भरपूर है. कोदो का अनाज शरीर के लिए लाभकारी है. डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है. इसे शुगर फ्री चावल के नाम से भी अब पहचान मिल रही है. कम पानी में यह फसल तैयार हो जाती है और इसमें बीमारी भी ज्यादा नहीं लगती है.
क्यों है ये खास?
पहले जो कोदो तैयार होता था, उसके पौधे लचीले होते थे और हवा पानी में गिर जाते थे. कृषि कॉलेज के वैज्ञानिकों ने अनुसंधान केन्द्र में इसे और मजबूती देकर नया बीज जेके 49 तैयार किया. अब यह फसल खेत में मजबूती के साथ तैयार होती है और पानी हवा का इतना असर इसमें नहीं पड़ता है. कृषि वैज्ञानिकों ने कोदो की जो नई किस्म तैयार की है वह फार्म हाऊस के नियमानुसार अगर खेतों में तैयार की जाए तो 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होगा. सामान्य रूप से खेती करने पर 15 से 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से जेके-49 कोदो किसान तैयार कर सकते हैं. मंडी में कोदो के अनाज की कीमत भी अब बढ़ने लगी है और 70 से 80 रुपए प्रति किलो बिक रहा है. और सरकार से अनुदान भी दिया जा रहा है.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें