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Ground Report: मध्य प्रदेश के खंडवा में 100 साल पुराना स्कूल किसी खंडहर से कम नहीं. यहां के लगभग सभी कमरे बंद हो चुके हैं. एक कमरे में कक्षा 5 तक की पढ़ाई चल रही है. बरसात में यहां छुट्टी घोषित कर दी जाती है. क्योंकि, पानी भर जाने से पढ़ाने की स्थिति नहीं रहती.देखें हालात…
Khandwa News: मध्य प्रदेश में खंडवा के गणेशगंज इलाके में स्थित शासकीय प्राइमरी स्कूल आज भी अंग्रेजों के जमाने की याद दिलाता है. करीब 100 साल पहले 1926 में बना यह स्कूल अब खंडहर में तब्दील हो चुका है, इसके बावजूद छोटे-छोटे बच्चे इसी जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं. स्कूल की छत का खपरैल टूटकर गिर रहा है. दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है. बारिश के दिनों में पूरा कमरा पानी से भर जाता है.
स्कूल की हालत इतनी खराब है कि सुरक्षा के लिहाज से पीछे के कई कमरों को बंद कर दिया गया है. पहली से पांचवीं तक के सैकड़ों बच्चों के लिए अब सिर्फ एक कमरा बचा है, जहां सभी कक्षाएं एक साथ लगती हैं. बारिश होने पर छत से पानी टपकने लगता है, जिससे बच्चों को मजबूरी में छुट्टी करनी पड़ती है. कई बार माता-पिता भी डर के कारण बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्कूल मिट्टी और पुराने कवेलू से बना हुआ है, जिसकी मरम्मत वर्षों से नहीं हुई. दीवारों से मिट्टी झड़ती रहती है और छत इतनी कमजोर हो चुकी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. बावजूद इसके, गरीब परिवारों के बच्चे यहीं पढ़ाई कर रहे हैं, क्योंकि उनके माता-पिता निजी स्कूलों की फीस भरने में सक्षम नहीं हैं. शायद यही वजह है कि सरकार भी ध्यान नहीं दे रही.
कई बार शिकातय पर सुनवाई नहीं
Local 18 से बातचीत में गणेशगंज के पार्षद प्रकाश यादव ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से स्कूल की मरम्मत और नए भवन की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उनका कहना है कि नगर निगम शिक्षा उपकर के रूप में हर साल करोड़ों रुपये वसूलता है, लेकिन स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर कोई काम नजर नहीं आता. स्कूल में पढ़ने वाले चौथी कक्षा के छात्र बताया कि बारिश के समय छत से पानी टपकता है और फर्श पूरी तरह गीली हो जाती है. ऐसे में पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है. कई बार शिक्षकों को छुट्टी घोषित करनी पड़ती है.
अफसर नहीं दे रहे जवाब!
यह स्कूल अब पांचवीं पीढ़ी के बच्चों को शिक्षा दे रहा है, लेकिन सुविधाएं आज भी अंग्रेजों के समय जैसी ही हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, फिर भी जमीनी स्तर पर बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण क्यों नहीं मिल पा रहा है? यह स्थिति न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनी हुई है. शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. जब जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया इसके बाद उनके कार्यालय पहुंचने पर भी डीईओ मौजूद नहीं मिले.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें