जबलपुर में ‘सड़क चोरी’, हाईकोर्ट ने पूछा, कागज में तैयार तो मौके से कहां गई?

जबलपुर में ‘सड़क चोरी’, हाईकोर्ट ने पूछा, कागज में तैयार तो मौके से कहां गई?


Jabalpur News: जबलपुर से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां एक गांव की सड़क कागजों पर तो बन गई, लेकिन हकीकत में उसका कोई अता-पता नहीं है. ग्रामीणों ने तमाम जगह ‘सड़क चोरी’ की शिकायत की, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हुई. इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा. चीफ जस्टिस की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई की और सरकार से जवाब मांग लिया. इससे अब हड़कंप मचा है.

दरअसल, मामला कटंगी तहसील के छपरी गांव का है. छपरी से सिमरिया के बीच 2.6 km लंबी सड़क 2018 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2018 में स्वीकृत हुई थी. योजना के तहत सड़क निर्माण के लिए फंड जारी किया गया, लेकिन गांव वालों का आरोप है कि सड़क कभी बनी ही नहीं. इसके बावजूद, अधिकारियों ने कागजों में इसे पूरा दिखा दिया और गांव के बाहर निर्माण का बोर्ड भी लगा दिया.

याचिका में लगाए ये आरोप
मामले को लेकर गांव के निवासी रामकिशन पटेल ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में जनहित याचिका दायर की. याचिका में आरोप लगाया कि योजना के तहत आवंटित धन का दुरुपयोग हुआ है और सड़क न बनने से ग्रामीणों को भारी असुविधा हो रही है. वे बारिश में कीचड़ भरे रास्तों पर चलने को मजबूर हैं, जबकि कागजों पर सड़क ‘पूर्ण’ दर्ज है. पटेल ने याचिका में मांग की कि इस घोटाले की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए.

कोर्ट ने पूछा ये सवाल
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई की. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और पीएमजीएसवाई से जुड़े अधिकारियों को नोटिस जारी किया. अदालत ने इन सभी से शपथ पत्र के माध्यम से जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि अगर सड़क नहीं बनी तो कागजों में कैसे पूरी हो गई? यह सरकारी धन के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है.

वकील ने पेश किए कई सुबूत
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील दिनेश उपाध्याय ने दस्तावेज पेश किए, जिसमें सड़क निर्माण के लिए जारी टेंडर, फंड रिलीज और पूरा होने की रिपोर्ट शामिल थी, लेकिन मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं दिखा. वहीं, गांव वालों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है. ग्रामीण इलाकों में अक्सर ऐसी योजनाओं में भ्रष्टाचार होता है, जहां कागजी कार्रवाई से काम पूरा दिखा दिया जाता है.

ग्रामीणों को ऐसे पड़ी भनक
अधिवक्ता ने बताया, 2018 में जब छपरी गांव के लोगों ने चुनाव बहिष्कार किया, तब रोड स्वीकृत की गई थी. कागज के अनुसार 2018 से रोड बनने लगी थी और 2022 में सड़क बनकर तैयार हो गई. ग्रामीणों को आश्चर्य तब हुआ जब पौड़ी-सिमरिया रोड पर छपरी-सिमरिया रोड का बोर्ड लगा दिया गया. इसी वक्त सबको पता चला कि सिमरिया से छपरी रोड काजग पर बन गई, लेकिन हकीकत में कहीं रोड नहीं थी.

अगली सुनवाई 18 मार्च को
छपरी गांव के लोगों ने बताया, सड़क न होने से बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत होती है. आपात स्थिति में एम्बुलेंस भी नहीं पहुंच पाती. स्थानीय प्रशासन ने पहले शिकायतों को नजरअंदाज किया, जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा. हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी.



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