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MP Vidhansabha: नगरीय विकास विभाग की चर्चा के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तीन महीने में फायर सेफ्टी एक्ट लागू करने का ऐलान किया. अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन जारी है और एक साल में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना है. इसी बीच मास्टर प्लान में हो रही देरी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए.
शिवकांत आचार्य,
एमपी विधानसभा: नगरीय विकास एवं आवास विभाग की अनुदान मांगों पर विधानसभा में चर्चा के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि प्रदेश में तीन महीने के भीतर फायर सेफ्टी एक्ट लागू किया जाएगा. इसके लिए अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है. साथ ही एक साल के भीतर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना बनाई जा रही है. मंत्री ने कहा कि आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ी 3 से 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचनी चाहिए. इसके लिए नगर निगम और नगर पालिकाओं से जानकारी जमा की जा रही है.
सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
वहीं, भोपाल, इंदौर और अन्य शहरों में नए मास्टर प्लान को लागू करने को लेकर सदन में विपक्ष ने सरकार पर जमकर दबाव बनाया. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल किया कि आखिर मास्टर प्लान किस समय लाया जाएगा, जबकि मंत्री ने पिछले जून में इसे पेश करने का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया. विधायक जयवर्धन सिंह और डॉ. राजेंद्र सिंह ने भी इस मुद्दे को उठाया. इसके जवाब में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मामला सरकार के फैसले पर छोड़ दिया. वहीं, सत्ताधारी दल के अन्य विधायकों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदर सिंह परमार और विश्वास सारंग को घेरते हुए उनके विभागों में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग की है.
इसी चर्चा के दौरान मास्टर प्लान में हो रही देरी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए. सदन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मास्टर प्लान का मुद्दा पहले भी उठाया गया था. उनका कहना था कि अंतिम मास्टर प्लान वर्ष 1995 में जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे, पेश किया गया था. नियमानुसार हर दस वर्ष में मास्टर प्लान पेश किया जाना चाहिए, लेकिन 2005 के बाद से अब तक कोई नया मास्टर प्लान पेश नहीं हुआ. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2020 में मास्टर प्लान पेश किया गया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ाया गया.
जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि अगर मास्टर प्लान लागू हो जाता है तो भवन निर्माण, आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं तथा उद्योग स्थापना में पारदर्शिता आएगी और लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय में गंभीर नहीं है. वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मास्टर प्लान से जुड़े सवालों पर कहा कि उन्होंने जो कहना था, वह सदन में साफ तौर से कह दिया है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें