घर को बनाया विदेशी पार्क, सरकार को देना पड़ा पुरस्कार, बिजनेसमैन का अनोखा शौक

घर को बनाया विदेशी पार्क, सरकार को देना पड़ा पुरस्कार, बिजनेसमैन का अनोखा शौक


Last Updated:

Success Story: खंडवा के उद्योगपति अरुण सेठी का गार्डन अब सिर्फ उनका शौक नहीं, बल्कि लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. 70 साल की उम्र में भी उनका यह जुनून यह साबित करता है कि अगर मन में लगन हो तो घर का आंगन भी विदेशी फूलों का स्वर्ग बन सकता है.

Khandwa News: खंडवा के जाने-माने उद्योगपति अरुण सेठी ने अपने घर के आंगन को ऐसा खूबसूरत गार्डन बना दिया है, जो किसी विदेशी फ्लावर पार्क से कम नहीं लगता. प्रकृति के प्रति उनके प्रेम और वर्षों की मेहनत का ही नतीजा है कि उन्हें मध्य प्रदेश शासन की राज्यस्तरीय पुष्प प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उनके घर की बगिया आज न सिर्फ शहर, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है.

यहां फूल तोड़े ही नहीं जाते…
अरुण सेठी ने अपने घर में 84 से ज्यादा प्रजाति के फूलों के पौधे लगाए हैं. इनमें स्वीडन का डहेलिया, कैलिफोर्निया का पापी, एंटीरेनम, फ्लॉक्स, कैलेंडुला, साल्विया, डेजी, सूरजमुखी और होलीहॉक जैसे कई विदेशी फूल शामिल हैं. खास बात ये कि इन फूलों की देखभाल परिवार के सदस्य बच्चों की तरह करते हैं. उनका गार्डन देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं और इसकी खूबसूरती की तारीफ करते हैं. अरुण सेठी इन पौधों को तोड़ते नहीं, बल्कि उन्हें पूरी तरह खिलने देते हैं, ताकि हर कोई उनकी सुंदरता का आनंद ले सके.

बचपन से था पौधों से लगाव, अब बन गया जुनून
LOCAL 18 से बातचीत में अरुण सेठी ने बताया कि उन्हें पौधों से प्रेम अपनी माताजी से विरासत में मिला है. उन्होंने दूसरी-तीसरी कक्षा से ही पौधे लगाना शुरू कर दिया था. समय के साथ यह शौक जुनून में बदल गया. उन्होंने बताया कि विंटर सीजन फूलों के लिए सबसे अच्छा होता है. दिवाली से पहले बीज ट्रे में तैयार किए जाते हैं. फिर उन्हें गमलों और क्यारियों में लगाया जाता है. पौधों को समय पर पानी, खाद और दवा देने से वे बेहतर तरीके से विकसित होते हैं और कई गुना ज्यादा खुशी देते हैं.

राज्यस्तरीय प्रदर्शनी में मिला पहला स्थान
मप्र शासन के उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा भोपाल में आयोजित राज्यस्तरीय पुष्प प्रदर्शनी में अरुण सेठी ने अपने गार्डन में लगे डहेलिया के गमले प्रदर्शित किए थे. उनकी इस प्रस्तुति को प्रथम स्थान मिला. इस उपलब्धि पर खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने उन्हें प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया. इससे पहले भी उनकी बगिया नगर और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में अव्वल रह चुकी है.

बिजनेस के साथ प्रकृति सेवा भी
सेठी परिवार का ऑटोमोबाइल और टायर का बड़ा कारोबार है, लेकिन इसके बावजूद अरुण सेठी हर दिन अपने गार्डन के लिए समय निकालते हैं. वे रविवार का पूरा दिन पौधों की देखभाल में बिताते हैं. उनका कहना है कि प्रकृति हमें बहुत कुछ देती है, इसलिए हमें भी प्रकृति को कुछ लौटाना चाहिए. यही वजह है कि वे कई प्रकृति प्रेमियों को मुफ्त में पौधे भी देते हैं.

प्रेरणा बन चुका गार्डन
अरुण सेठी का यह गार्डन अब सिर्फ उनका शौक नहीं, बल्कि लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. 70 साल की उम्र में भी उनका यह जुनून साबित करता है कि अगर मन में लगन हो तो घर का आंगन भी विदेशी फूलों का स्वर्ग बन सकता है.

About the Author

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



Source link