साइबर ठगी ने लोगों की जमा-पूंजी ही नहीं मुस्कान भी छीनी। भरोसा और आत्मविश्वास भी लूट लिया। शर्म, डर और टूटते रिश्तों के बीच कई पीड़ित चुपचाप जीने को मजबूर हो गए। घरों में ताने सुनने को मिले- सब चला गया। कहीं झगड़े बढ़े, कहीं जीवनसाथी ने साथ छोड़ दिया। कई लोग महीनों घर से बाहर नहीं निकले। पड़ोसी और रिश्तेदारों ने ताने कसे- पढ़े-लिखे होकर भी ठग गए। सबसे दर्दनाक यह रहा कि समाज ने सहारा देने के बजाय पीड़ितों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्हें ही दोषी बना दिया। मदद की उम्मीद लेकर पुलिस के पास पहुंचे तो सुनने को मिला- गलती आपकी है। कुछ पीड़ितों का आरोप है कि थानों में उनकी पीड़ा कम करने के बजाय उनका मजाक तक उड़ाया गया। दैनिक भास्कर ने साइबर ठगी के शिकार 30 लोगों से बात की तो ठगी के बाद का ‘साइलेंट इफेक्ट’ सामने आया। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी पीड़ित के दर्द को न कुरेदें। उन्हें आपके साथ और सहयोग की जरूरत है। इन केसों से समझिए… ठगी के बाद कितने दर्द में रहे लोग… क्या-क्या सुना और सहा पति ने छोड़ा साथ, पुलिस कह रही- गलती आपकी, भुगते हम:
हाथीखाना निवासी माया यादव (बदला नाम) ब्यूटी पार्लर चलाती थीं। इंस्टाग्राम पर बने दोस्त ने उनसे 17 लाख ठग लिए। ठगी के बाद तनाव बढ़ा, पति ने साथ छोड़ दिया और रिश्तेदार ताने देते रहे। भाई के मुताबिक जीजा ने घर रखने से मना कर दिया। पुलिस के पास जाने पर भी उन्हें ही दोष दिया गया। कहते हैं कि खुद गलती करो और भुगते पुलिस। हर कोई पूछता है, पढ़े-लिखे होकर भी कैसे ठग गए?: 75 वर्षीय रिटायर्ड उप-पंजीयक बिहारी गुप्ता को ठगों ने आईपीएस-सीबीआई अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और 1.12 करोड़ रुपये ठग लिए। दर्द पैसे का कम, लोगों के तानों का ज्यादा है। उन्होंने पीएमओ-सीएमओ तक शिकायत की, पर कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस उल्टा शिकायत वापस लेने का दबाव बना रही है। पत्नी के सहारे अब थोड़ा संभले हैं। ठगों ने पैसा लूटा… समाज के तानों से सम्मान को ठेस लगी: 52 वर्षीय कविता शर्मा ने बीमार मां के इलाज के लिए गूगल पर मिले नंबर पर अपॉइंटमेंट के लिए कॉल किया, लेकिन वह ठगों का निकला और लाखों रुपये ठग लिए गए। बैंक वाले और रिश्तेदार मजाक उड़ाते रहे और लोग सवालों से घेरते रहे। महीनों तक उनकी हालत खराब रही। पुलिस से गुहार लगाई, पर मदद नहीं मिली- बस जवाब मिला, कुछ सफलता मिलेगी होगा तो बता देंगे। पत्नी रोज कहती सब चला गया…, मैं महीनों मुंह छिपाकर रहा:
45 वर्षीय रंजीत शर्मा ने घर के लिए लोन लेने गूगल पर नंबर खोजा, लेकिन ठगों के जाल में फंस गए। ठगों ने उनसे 9 लाख रुपये ऐंठ लिए। घटना के बाद वे तनाव में रहने लगे। पत्नी ताने देती- सब कुछ चला गया। वह मायके चली गई। रिश्तेदारों ने भी सहारा नहीं दिया। पुलिस से मदद नहीं मिली। रंजीत शर्म और दर्द में महीनों तक चुप रहे। धीरे‑धीरे संभल रहे हैं। इनकी भी पीड़ा फेसबुक पर लड़की के झांसे में आकर 1.41 लाख गंवाने वाले बुजुर्ग बोले- परिवार की नजरों में गिर गया। 32 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर 71.25 लाख ठग लिए जाने पर बीएसएफ इंस्पेक्टर ने कहा- बहुत कुछ खोया। वह पल याद आते ही रूह कांप जाती है। ठगी का शिकार छात्र कई दिन घर से नहीं निकला- डर था, गांव-समाज ताने देंगे। 38 लाख गंवाने वाले युवक ने कहा-किसी तरह घर का कलह थमा है। अब उस घाव को फिर से कुरेदना ठीक नहीं।
एक्सपर्ट – नागेंद्र सिंह सिकरवार, डीएसपी साइबर क्राइम टेक्नोलॉजी में फंसना गलती नहीं
साइबर ठग इतने शातिर हैं कि आपको नई-नई टेक्नोलॉजी और बातों में उलझा लेते हैं। आप इन टेक्नोलॉजी को नहीं समझ पाए तो गलती जैसी कोई बात नहीं है। आपको शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। आपने कोई गलती नहीं की। ठगी से बचने का सबसे बड़ा तरीका सावधानी है। टेक्नोलॉजी से अपडेट होते रहें। किसी भी अनजान कॉल, लिंक, क्यूआर कोड या डिजिटल अरेस्ट जैसे डराने वाले दावों पर भरोसा न करें। पहले जांच करें, फिर ही कोई कदम उठाएं। अगर कहीं पुलिस मदद करने के बजाय हंसती है या गंभीरता नहीं दिखाती, तो शर्मनाक है। ऐसे मामलों की जांच होगी।
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