मुरार नदी को पुनर्जीवित करने के मामले में हाई कोर्ट ने अब और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अंतर्गत नदी की सफाई का काम किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का काम कर रही एजेंसी को अब यह बताना है कि उसे किस विभाग से क्या मदद चाहिए ? एजेंसी को इसके संबंध में एक सूची तैयार कर कोर्ट में पेश करना होगी। हाई कोर्ट ने नदी क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए की जा रही कार्रवाई पर भी जानकारी पेश करने के लिए कहा है। दूसरे चरण के लिए 32 करोड़ स्वीकृत
नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अंतर्गत मुरार नदी को साफ करने पहले चरण में 39करोड़ रुपए मिले। पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल के अनुसार, इसमें से अभी तक केवल 12 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।ये राशि खत्म होती, उससे पहले ही दूसरे चरण के लिए 32 करोड़ स्वीकृत कर लिए गए। नमामि गंगे प्रोजेक्ट सफाई पर फोकस कर रहा है।लेकिन जब नदी में पानी नहीं रहेगा तो सफाई किस काम आएगी? हाई कोर्ट में दिए नगर निगम के जवाब पर याची ने जताई आपत्ति
नगर निगम की ओर से बताया गया कि नदी के मध्य से 25-25 मीटर नाप कर सीमांकन का कार्य किया जा रहा है। एक भाग पूर्ण हो गया है, जबकि इतना ही काम अभी बाकी है। कैचमेंट एरिया का पता लगाने जल संसाधन विभाग को पत्र लिखा है और सीवर को नदी में गिरने से रोकने डीपीआर तैयार कर स्वीकृति के लिए भेज दी गई है। याची दिनेश शर्मा की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट धर्मेंद्र द्विवेदी ने हाई कोर्ट को बताया- नगर निगम ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया कि नदी की चौड़ाई कितनी है ? मुरार नदी के आसपास सी एंड डी वेस्ट पड़ा हुआ है, जिसे अभी तक हटाया नहीं गया। केवल जुर्माना वसूलकर नगर निगम द्वारा खानापूर्ति की जा रही है। ऐसे समझें मुरार नदी को पुनर्जीवित करने का मामला
मुरार नदी को पुनर्जीवित करने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। इसकी सुनवाई में एनजीटी के उस आदेश को पेश किया गया, जिसमें नदी क्षेत्र में अतिक्रमण सहित अन्य समस्याओं को उजागर किया गया। इसमें दावा किया गया कि 12 किमी लंबे स्ट्रेच यानी कि रमौआ से जडेरुआ बांध के बीच जगह-जगह अतिक्रमण के चलते नदी का बहाव प्रभावित हो रहा है। कई जगह नदी की चौड़ाई घटकर 20 फीट तक पहुंच गई है। यहां तक की कई जगह तो नदी क्षेत्र पर ही अतिक्रमण करते हुए बाउंड्रीवाल बना दी गई है।
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