सिर्फ 1.5 लाख में शुरू करें कभी न बंद होनेवाला बिजनेस, सालभर कमाई के साथ 35% तक सरकारी सब्

सिर्फ 1.5 लाख में शुरू करें कभी न बंद होनेवाला बिजनेस, सालभर कमाई के साथ 35% तक सरकारी सब्


Masala Processing Unit Setup Plan: बढ़ती महंगाई, सीमित नौकरी के अवसर और स्वरोजगार की बढ़ती जरूरत के बीच मसाला व्यापार तेजी से एक भरोसेमंद और लाभकारी स्टार्टअप मॉडल के रूप में उभर रहा है. रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाले हल्दी, धनिया, मिर्च, जीरा और सोंठ जैसे मसालों की मांग कभी कम नहीं होती और यही वजह है कि यह कारोबार सालभर चलता है और जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है. कम पूंजी में शुरुआत, स्थानीय स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता और अपने ब्रांड नाम से बाजार में पहचान बनाने की संभावनाओं ने युवाओं और महिलाओं को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया है. खास बात यह है कि सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर इस व्यवसाय को और भी मजबूत आधार दिया जा सकता है.

 कैसे शुरू करें मसाला प्रोसेसिंग यूनिट
मसाला व्यापार की शुरुआत छोटे स्तर पर भी की जा सकती है. लगभग 100 से 200 वर्गफुट की जगह में पल्वेराइज़र मशीन, वजन तोलने की मशीन और पैकिंग मशीन के साथ एक बेसिक यूनिट स्थापित की जा सकती है. शुरुआती निवेश 1.5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच हो सकता है जो मशीनों की क्षमता और उत्पादन स्तर पर निर्भर करता है. वहीं इस योजना के तहत बड़े स्तर पर ऑटोमैटिक यूनिट लगाकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.

कच्चा माल सीधे किसानों या थोक मंडियों से खरीदना अधिक लाभदायक रहता है. उदाहरण के तौर पर हल्दी या अदरक की खेती स्वयं कर या आसपास के गांवों से खरीदकर उसे प्रोसेस कर शुद्ध मसाले के रूप में पैक किया जा सकता है. अच्छी क्वालिटी और साफ-सुथरी, एयर-टाइट पैकेजिंग के साथ बाजार में उतारे गए उत्पाद तेजी से ग्राहकों का भरोसा जीतते हैं.

लाइसेंस और पंजीकरण की अनिवार्यता
चूंकि यह खाद्य उत्पाद से जुड़ा व्यवसाय है इसलिए कुछ कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करना आवश्यक है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया लाइसेंस, जीएसटी पंजीकरण, स्थानीय व्यापार लाइसेंस और एमएसएमई/उद्यम रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होता है. यदि भविष्य में निर्यात की योजना हो तो मसाला बोर्ड में पंजीकरण भी कराया जा सकता है. इन औपचारिकताओं को पूरा करने से व्यवसाय को वैध पहचान मिलती है और बड़े बाजारों तक पहुंच आसान हो जाती है.

 सरकारी योजना से मिलेगी आर्थिक मदद
लोकल 18 को जानकारी देते हुए सोहावल विकासखंड प्रभारी उन्नयन विकास अधिकारी सुधा पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत मसाला प्रोसेसिंग इकाई स्थापित करने पर 35 प्रतिशत तक सब्सिडी या फिर अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान इस योजना में है. यदि आवेदक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है तो इसमें बैंक लोन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है.

आवेदन के लिए आधार कार्ड, फोटो, बैंक पासबुक और जमीन से संबंधित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है. संबंधित उद्यानिकी विभाग में आवेदन करने के बाद डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जाती है जिसमें विभागीय विशेषज्ञ मार्गदर्शन करते हैं. इसके बाद फाइल बैंक को भेजी जाती है और स्वीकृति के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ती है.

स्थानीय बाजार से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक अवसर
मसाला व्यापार की सबसे बड़ी ताकत इसकी व्यापक मांग है. स्थानीय किराना दुकानों, थोक बाजारों और सुपरमार्केट के साथ साथ ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भी उत्पाद बेचे जा सकते हैं. सोशल मीडिया मार्केटिंग और आकर्षक ब्रांडिंग से कम समय में पहचान बनाई जा सकती है.

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामूहिक रूप से इस व्यवसाय को शुरू कर सकती हैं. इससे न केवल आय के नए स्रोत बनते हैं बल्कि गांव स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं. कम निवेश, स्थायी मांग और सरकारी सहायता के कारण मसाला व्यापार आज के दौर में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है.



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