शहर में होली की तैयारियां तेज हैं, लेकिन इस बार ‘होलिका दहन’ आमजन की जेब और पर्यावरण दोनों पर भारी पड़ने जा रहा है। नगर निगम कमिश्नर संघ प्रिय ने गो-काष्ट (गोबर की लकड़ी) से होली जलाने की अपील कर रहे हैं, मगर शहर में गो-काष्ट उपलब्ध ही नहीं है। कारण साफ है-लाल टिपारा स्थित आदर्श गौशाला का सारा गोबर बायो-सीएनजी प्लांट में सप्लाई हो रहा है, जिससे वहां गो-काष्ठ निर्माण पूरी तरह बंद हो गया है। यही गौशाला अब तक पूरे शहर में होली समेत अन्य अवसरों पर गो-काष्ठ की आपूर्ति करती थी। इसके बंद होते ही वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। शहर के अन्य स्थानों पर गो-काष्ठ निर्माण के लिए समय पर टेंडर तक जारी नहीं किए गए। सवाल यह है कि जब बाजार में सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो अपीलों का क्या मतलब?
2 हजार होलियां, 4 हजार क्विंटल लकड़ी की खपत:
शहर में लगभग 2 हजार होलियां जलाई जाती हैं। यदि औसतन 2 क्विंटल लकड़ी प्रति होली जले, तो करीब 4 हजार क्विंटल लकड़ी की खपत होगी। गो-काष्ट के उपयोग से हजारों पेड़ों की कटाई रोकी जा सकती थी और यह लकड़ी से 30-40% सस्ता भी पड़ता। शहर में अवैध डेयरियां, नालियों में बह रहा गोबर: शहर में अवैध डेयरियां संचालित हैं। कॉलोनी से लेकर मोहल्लों में यह हैं। इनसे रोजाना सैकड़ों टन गोबर नालियों और सीवर लाइनों में बहा दिया जाता है। यदि इसी गोबर का संग्रहण कर गो-काष्ट मशीनें लगाई जातीं, तो होली के लिए पर्याप्त ईंधन भी मिलता। लकड़ी 700 रु. क्विंटल, कंडे दोगुने दाम पर: गो-काष्ट न मिलने से लकड़ी की मांग बढ़ गई है। लकड़ी विक्रेता सोनू ने बताया कि लकड़ी 700 रुपए प्रति क्विंटल है। वहीं कंडे बेच रहे भोलाराम प्रजापति ने बताया कि इस बार छोटा कंडा 2 और बड़ा 3 रुपए में बिक रहा है। सराफा बाजार की बड़ी होली के लिए 25 हजार कंडे मुरैना से मंगाए हैं। गोकाष्ठ की करेंगे व्यवस्था
शासन के आदेश हैं कि होलिका दहन गोकाष्ठ से करें। हमारी कोशिश है कि गौशाला लालटिपारा और शहर के प्रमुख स्थलों पर व्यवस्था करें। अभी गो काष्ठ नहीं बनते हैं, लेकिन कल तक व्यवस्था जमा देंगे। नहीं तो ग्रामीण क्षेत्र से या कही और से व्यवस्था करेंगे। -संघ प्रिय, आयुक्त नगर निगम निगम पीआरओ ने पुराना फोटो जारी कर बताया- ऐसे दिखते हैं ‘गोकाष्ठ’ शनिवार को नगर निगम ने गो-काष्ठ के एक फोटो के साथ निगम आयुक्त संघ प्रिय का संदेश प्रेस नोट के रूप में जारी किया। जिसमें भाईचारे, स्वच्छता व पर्यावरण का संदेश भी दिया गया। जब प्रेस नोट जारी करने वाले नगर निगम पीआरओ उमेश गुप्ता से बातचीत की गई और फोटो के बारे में पूछा गया। तो वे बोले ‘यह तो हमने इंटरनेट से निकाला था।’ फिर बोले ‘पुराना है’, फिर ‘बोले पहले बनते थे तब का है।’ अंत में बोले कि फोटो सिंबोलिक (सांकेतिक) है।’ अफसर से पूछा शहर में गो-काष्ट कहां उपलब्ध है? होली वाले कहां से उसे खरीदें, हम क्या स्थान लिखें। इसपर वे कोई जवाब नहीं दे सके।
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