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हरदा में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पर विवाद खड़ा हो गया है. जिला पंचायत अध्यक्ष गजेंद्र शाह और पत्नी अंजना शाह लाटरी से चुने गए. वे अयोध्या-वाराणसी रवाना हो गए. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि योजना भाजपा नेताओं के लिए बन गई. स्टेशन पर NEWS18 टीम मौजूद रही लेकिन देरी हुई. वेटिंग में कई गरीब परिवार थे. योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.
हरदा के भाजपा नेताओं के नाम लॉटरी से चुने गए.
हरदा. मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना गरीबों और जरूरतमंद लोगों को धार्मिक यात्रा का अवसर देने के लिए शुरू की गई थी. लाटरी सिस्टम से चयन का दावा किया गया लेकिन हरदा जिले में योजना का लाभ लेने वाले नामों ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. जिला पंचायत अध्यक्ष गजेंद्र शाह और उनकी पत्नी अंजना शाह (जो भाजपा से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं) सहित अन्य भाजपा से जुड़े लोग चयनित होकर सोमवार तड़के सवा चार बजे वाराणसी-अयोध्या के लिए रवाना हो गए. योजना के तहत यात्रा का खर्च सरकार उठाती है और लक्ष्य वृद्धों व आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को तीर्थ दर्शन कराना है. लेकिन जब चयनित लोगों में प्रभावशाली नेता और उनके परिजन शामिल हो गए तो सवाल उठने लगे कि लाटरी में पारदर्शिता कहां गई. कांग्रेस ने इसे गरीबों के हक की हेराफेरी बताया और कार्रवाई की मांग की है.
दरअसल, हरदा रेलवे स्टेशन पर NEWS18 की टीम मौजूद रही लेकिन गजेंद्र शाह रात ढाई बजे तक नहीं पहुंचे जिससे और शक पैदा हुआ. वेटिंग लिस्ट में कई गरीब परिवारों के नाम थे जिन्हें जगह नहीं मिली. यह घटना न सिर्फ योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती है बल्कि सत्ताधारी पार्टी के जनप्रतिनिधियों द्वारा सरकारी सुविधा का लाभ उठाने की प्रवृत्ति को उजागर करती है. इस विवाद ने पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी है क्योंकि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को मोहन यादव सरकार ने गरीब कल्याण का बड़ा प्रोजेक्ट बताया था. हर साल हजारों जरूरतमंदों को राम मंदिर अयोध्या, काशी विश्वनाथ और अन्य तीर्थों की यात्रा कराई जाती है. लाटरी के जरिए नाम चुने जाते हैं ताकि कोई पक्षपात न हो लेकिन हरदा की घटना ने सिस्टम की कमजोरियों को सामने ला दिया.
क्या लाटरी वाकई निष्पक्ष थी? जिला पंचायत अध्यक्ष और उनका परिवार कैसे चुना गया
जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे पद पर बैठे व्यक्ति और उनका परिवार अगर लाटरी में आ जाता है तो आमजन का विश्वास कैसे बनेगा. कांग्रेस प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने साफ कहा कि योजना भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए बन गई है. स्टेशन पर वेटिंग वाले गरीबों की व्यथा देखकर स्थानीय लोग नाराज हैं. अधिकारियों ने नियमों का हवाला दिया लेकिन सवाल बरकरार है कि क्या लाटरी वाकई निष्पक्ष थी. यह मामला न सिर्फ हरदा तक सीमित नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार की योजनाओं की पारदर्शिता पर बहस छेड़ सकता है. योजना का उद्देश्य भक्ति बढ़ाना था लेकिन राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप इसे विवादास्पद बना रहा है.
कांग्रेस का आरोप और सियासी तूफान
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना गरीबों के लिए है लेकिन भाजपा के जनप्रतिनिधि और उनके परिवार इसे ले रहे हैं. जिला कांग्रेस प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने कहा कि योजना का निजीकरण हो गया है. उन्होंने कार्रवाई की मांग की और लाटरी की जांच कराने पर जोर दिया.
हरदा से रवाना हुए भाजपा नेता
हरदा जिला पंचायत अध्यक्ष गजेंद्र शाह और उनकी पत्नी अंजना शाह (टिमरनी से भाजपा विधानसभा प्रत्याशी रह चुकीं) सोमवार तड़के सवा चार बजे वाराणसी-अयोध्या के लिए रवाना हुए. टिमरनी मंडल अध्यक्ष अतुल बारगे के पिता जनपद सदस्य गोरीशंकर बारगे भी शामिल हैं. यात्रा 3 से 6 मार्च तक चलेगी.
तहसीलदार का दावा, चयन पूरी तरह लाटरी सिस्टम से ही हुआ
रेलवे स्टेशन पर NEWS18 की टीम पहुंची थी. गजेंद्र शाह रात ढाई बजे तक नहीं पहुंचे. मीडिया की मौजूदगी का पता चलते ही यात्रियों की रवानगी में देरी हुई जिससे पारदर्शिता पर और संदेह बढ़ा. योजना के तहत कई आर्थिक रूप से कमजोर परिवार वेटिंग लिस्ट में थे लेकिन उन्हें जगह नहीं मिली. चयनित सूची में भाजपा से जुड़े लोगों का नाम आने से गरीबों का हक मारा गया का आरोप लगा. जिला प्रशासन और तहसीलदार ने कहा कि चयन पूरी तरह लाटरी सिस्टम से हुआ है. नियमों के अनुसार कोई पक्षपात नहीं हुआ. फिर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या लाटरी में प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी गई?
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें