OPINION: सेमीफ़ाइनल में पहुँचकर भी परेशान है सूर्या की सेना

OPINION: सेमीफ़ाइनल में पहुँचकर भी परेशान है सूर्या की सेना


नई दिल्ली. कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में जब भारत ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ वर्चुअल क्वार्टरफ़ाइनल जैसा मुकाबला जीता, तो स्टेडियम जश्न में डूब गया लेकिन यह जीत सुकून देने वाली नहीं थी, बल्कि राहत देने वाली थी. भारत फिर अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में नहीं दिखा. उम्मीदें बड़ी थीं, लेकिन सफर उतना आसान नहीं रहा. फिर भी प्रतिभा इतनी है कि सूर्यकुमार यादव की अगुआई में टीम इंडिया टी20 विश्व कप 2026 के सेमीफ़ाइनल में पहुँच गई. फाइनल में जगह बनाना इस टीम के लिए न्यूनतम लक्ष्य होना चाहिए था, पर अंतिम चार तक पहुँचने में ही काफी ऊर्जा और मानसिक ताकत खर्च हो चुकी है.

यह टूर्नामेंट भारत के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा है. शुरुआत ही लगभग इतिहास के सबसे बड़े उलटफेर से होते-होते बची, जब अमेरिका ने भारत को 77/6 पर झुका दिया था. उस दिन सूर्यकुमार यादव ने जीवन की यादगार पारी खेलकर मैच पलटा फिर नामीबिया के खिलाफ स्पिन के सामने कमजोरी दिखी. पाकिस्तान के खिलाफ ईशान किशन ने बचाया, जबकि नीदरलैंड्स के खिलाफ गेंदबाज़ी सवालों में रही. अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को करारा झटका दिया. संभावना है कि 8 मार्च को यही मुकाबला फाइनल में फिर देखने को मिले लेकिन सुपर 8 के पहले मैच में प्रोटियाज़ ने भारत को जिस तरह हराया, उससे उन्हें आत्मविश्वास मिला होगा. जवाब में भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार बल्लेबाज़ी की, लेकिन 184 रन लुटा दिए और वेस्टइंडीज़ के खिलाफ तो हालात बेहद मुश्किल हो सकते थे, अगर संजू सैमसन न होते. सेमीफ़ाइनल की दहलीज़ पर खड़ी टीम इंडिया के सामने अभी भी छह बड़ी समस्याएँ हैं, जो गलत समय पर उभरकर खिताब छीन सकती हैं.

1. वरुण चक्रवर्ती की धार कहाँ गई?

पिछले टी20 विश्व कप से लेकर इस टूर्नामेंट तक किसी भी फुल-मेम्बर टीम के गेंदबाज़ ने वरुण चक्रवर्ती जितने विकेट नहीं लिए. उन्होंने टी20I में वापसी के बाद 28 पारियों में 57 विकेट झटके, हर 11.2 गेंद पर एक विकेट. लेकिन इस विश्व कप में उनकी चमक फीकी पड़ी है. ग्रुप स्टेज में कमज़ोर टीमों के खिलाफ प्रभावी रहे, पर जैसे ही सुपर 8 आया, उनकी धार कम हो गई. दक्षिण अफ्रीका ने उन्हें जमकर निशाना बनाया जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज़ के खिलाफ उनका इकोनॉमी रेट 9.3 से ऊपर रहा. वह आत्मविश्वास की कमी से जूझते दिखे, लंबाई छोटी रही और नियंत्रण कमजोर भारत जो उनके चार ओवर पर भरोसा करता था, अब असमंजस में है.

2. जसप्रीत बुमराह पर अत्यधिक निर्भरता

वरुण की फॉर्म गिरते ही सारा दबाव जसप्रीत बुमराह पर आ गया है. इस टूर्नामेंट में उनका इकोनॉमी 6.3 है, जबकि सभी टी20 विश्व कप मिलाकर 5.63 यह अविश्वसनीय है. लेकिन सवाल यह है कि जिस दिन बुमराह का दिन नहीं होगा, तब क्या होगा? वह मशीन नहीं हैं. विरोधी उन्हें खेलने की रणनीति बना सकते हैं ऐसे में दूसरा भरोसेमंद विकल्प कौन?इसके अलावा बुमराह के इस्तेमाल पर भी सवाल हैं. एशिया कप 2025 में उन्हें पावरप्ले में तीन ओवर तक डलवाए गए थे. अब कई बार पांचवें ओवर के बाद उन्हें लाया जाता है नई गेंद के साथ अर्शदीप के साथ उन्हें आक्रमण करना चाहिए, ताकि विपक्ष पर शुरुआत में दबाव बने.

3. क्या भारतीय फील्डर कैच पकड़ सकते हैं?

मैच के बाद फील्डिंग मेडल बांटना अलग बात है, लेकिन मैदान पर कैच पकड़ना ज्यादा जरूरी है सुपर 8 टीमों में भारत का कैचिंग रिकॉर्ड सबसे खराब है. पाकिस्तान और श्रीलंका को अक्सर कमजोर फील्डिंग टीम माना जाता है, लेकिन इस टूर्नामेंट में भारत उनसे भी पीछे रहा. युवा टीम होने का मतलब बेहतर फील्डिंग नहीं होता यह टीम इस बात का उदाहरण बन रही है.

4. सिर्फ व्यक्तिगत प्रदर्शन से टूर्नामेंट नहीं जीतते

अमेरिका के खिलाफ सूर्यकुमार, पाकिस्तान के खिलाफ ईशान, नीदरलैंड्स के खिलाफ शिवम दुबे, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बुमराह और वेस्टइंडीज़ के खिलाफ संजू सैमसन. हर मैच में कोई एक खिलाड़ी खड़ा हुआ है यह कहानी अच्छी लगती है, लेकिन टूर्नामेंट जीतने के लिए सामूहिक प्रदर्शन जरूरी है. टॉप ऑर्डर की निरंतरता बड़ी समस्या रही है. जिम्बाब्वे को छोड़ दें तो शीर्ष चार बल्लेबाज़ साथ में क्लिक नहीं कर पाए. मुंबई और अहमदाबाद जैसे मैदानों पर भारत को ज्यादा स्थिरता चाहिए.

5. सूर्यकुमार यादव का ‘SKY’ अभी दूर

अमेरिका के खिलाफ 49 गेंदों में 84* की पारी के बाद सूर्यकुमार का स्ट्राइक रेट गिर गया. अगले मैचों में उनका एसआर 92, 110, 121, 81 और 112 रहा। कुल स्ट्राइक रेट 135.9 है, जो आईपीएल 2025 के 168 से काफी कम है. टीमें उन्हें स्पिन के खिलाफ रोक रही हैं. खासकर बाएं हाथ के स्पिनरों के सामने वह संघर्ष करते दिखे. पहली 10 गेंदों में उनका स्ट्राइक रेट 118 है, जो उनके स्तर के खिलाड़ी के लिए कम है. विपक्षी उनकी फ्लिक शॉट लाइन को बंद कर रहे हैं फिर भी, उनकी प्रतिभा ऐसी है कि वह किसी भी दिन मैच पलट सकते हैं.

6. अभिषेक शर्मा का आत्मविश्वास डगमगाया

टूर्नामेंट से पहले 24 मैचों में 1029 रन, लगभग 200 का स्ट्राइक रेट और 45 का औसत लेकिन पिछले 8 मैचों में सिर्फ 110 रन, औसत 13.75 और चार शून्य. गेंदबाज़ अब उनकी स्टंप लाइन पर गेंदबाज़ी कर रहे हैं, जिससे उन्हें हाथ खोलने की जगह नहीं मिल रही. वेस्टइंडीज़ के खिलाफ अकील हुसैन की साधारण गेंद पर आउट होना आत्मविश्वास की कमी दर्शाता है. तकनीकी समस्या नहीं है यह मानसिक है और मानसिक समस्या कुछ गेंदों में ठीक भी हो सकती है जिम्बाब्वे के खिलाफ अर्धशतक ने उम्मीद जगाई, पर निरंतरता नहीं आई.

भारत सेमीफ़ाइनल में है, लेकिन पूरी तरह निश्चिंत नहीं अगर ये छह समस्याएँ फिर सिर उठाती हैं, तो खिताब का सपना टूट सकता है प्रतिभा, अनुभव और क्षमता सब मौजूद है अब जरूरत है सामूहिक प्रदर्शन, आत्मविश्वास और सही रणनीति की.



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