खरगोन की ब्रजधाम हवेली में ब्रज की तर्ज पर मनाया जा रहा 40 दिवसीय होली उत्सव संपन्न हो गया। इस अवसर पर 600 से अधिक वैष्णवों ने ठाकुरजी के साथ सखा भाव से होली खेली और रसिया भक्ति गीतों पर नृत्य किया। यह उत्सव बसंत पंचमी से शुरू होकर पूर्णिमा पर समाप्त हुआ। चंद्र ग्रहण के सूतक काल से पहले दोपहर में हर्बल रंगों से होली खेली गई। भक्तों का मानना था कि इस दौरान पूजन के बजाय होली खेलना उचित था। चंद्र ग्रहण के कारण दोपहर में ठाकुरजी के चार दर्शन हुए। पूर्णिमा के अवसर पर समापन
वैष्णव वैशाली शर्मा और कीर्तना ने बताया कि भक्तों ने ठाकुरजी के साथ सखा भाव से होली खेली। इस भाव में भक्त प्रभु से अपनी हर मनोकामना व्यक्त कर सकते हैं। रसिया गीत गाकर ठाकुरजी को रिझाया गया। चार दर्शनों के बाद उन्हें हिंडोले में झुलाकर विदाई दी गई। वैष्णवजन मदनमोहन महाजन और नवनीत महाजन ने जानकारी दी कि ब्रजधाम हवेली में बसंत पंचमी से 40 दिवसीय होली उत्सव मनाया गया, जिसका समापन पूर्णिमा पर हुआ। वैष्णवों का मानना है कि ठाकुरजी स्वयं इस उत्सव में शामिल होते हैं और भक्त उनसे अपने सुख-दुख साझा करते हैं।
Source link