बड़वानी, अंजड़, ठीकरी में खींचे गए आस्था के गाड़े: पुजारी के पैर रखने पर चल पड़े गाड़े; मन्नत पूरी होने पर किया गया तुलादान – Barwani News

बड़वानी, अंजड़, ठीकरी में खींचे गए आस्था के गाड़े:  पुजारी के पैर रखने पर चल पड़े गाड़े; मन्नत पूरी होने पर किया गया तुलादान – Barwani News




बड़वानी, अंजड़ और ठीकरी में धुलेंडी के मौके पर ‘गाड़ा खिंचाई’ की सदियों पुरानी और अनोखी परंपरा निभाई गई। इस हैरतअंगेज आयोजन को देखने के लिए पूरे प्रदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। मान्यता है कि खांडेराव महाराज की कृपा से इन भारी-भरकम गाड़ों को पुजारी के स्पर्श मात्र से गति मिल जाती है। बड़वानी: 15 गाड़ों को एक साथ खींचा गया बड़वानी शहर के नवलपुरा में धुलेंडी की शाम को यह चमत्कारिक दृश्य देखने को मिला। यहां एक के पीछे एक कुल 15 गाड़ों को आपस में बांधकर सजाया गया था। पूजन की रस्में बिल्कुल किसी विवाह समारोह की तरह निभाई गईं। पुजारी राकेश यादव को हल्दी लगाकर खांडेराव महाराज के जयकारों के बीच लाया गया। जैसे ही उन्होंने गाड़ों को छुआ, कई टन वजनी ये गाड़े खुद-ब-खुद चलने लगे। इस दौरान पूरा मार्ग ‘जय खांडेराव’ के जयघोष से गूंज उठा। अंजड़: पुजारी ने पैर रखा और चल पड़े 7 गाड़े अंजड़ में भी इसी तरह का रोमांचक आयोजन हुआ। यहां पुजारी संतोष धनगर को ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर से लाया गया। जैसे ही उन्होंने एक-दूसरे से बंधे 7 गाड़ों पर अपना पैर रखा, गाड़े तेजी से आगे बढ़ने लगे। इन गाड़ों पर भी बड़ी संख्या में लोग सवार थे। इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए लोगों की भीड़ मकानों की छतों तक जमा थी। ठीकरी: 768 वर्षों से कायम है हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल ठीकरी नगर में यह परंपरा पिछले 768 सालों से चली आ रही है। यहाँ के पुजारी एडू यादव ने बताया कि इस वर्ष 31 गाड़े खींचे गए। यह आयोजन न केवल आस्था बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता का भी प्रतीक है। इतिहास और मान्यता: कहा जाता है कि सदियों पहले संत खांडेराव महाराज और उनके मित्र पीर मोईनुद्दीन चिश्ती ठीकरी आए थे। उन्होंने ग्रामीणों को अपनी मित्रता की याद में यह आयोजन करने का आशीर्वाद दिया था। मान्यता है कि खांडेराव महाराज ने यहां एक कुंवारी गाय के दूध से चाय बनवाकर अपने वास्तविक रूप के दर्शन कराए थे। तभी से ताम्रपत्र पर लिखी विधि के अनुसार यह आयोजन किया जाता है। मन्नत पूरी होने पर किया तुलादान इस धार्मिक आयोजन के दौरान दूर-दूर से आए श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने पर मिठाइयों और फलों से ‘तुलादान’ करते हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस परंपरा के निर्वहन से गांव प्राकृतिक आपदाओं से बचा रहता है और सुख-समृद्धि आती है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरे समय मुस्तैद रहा।



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