इतना कुछ बीता लेकिन हिम्मत नहीं हारे परमेश्वर, 71 साल के बुजुर्ग की कहानी

इतना कुछ बीता लेकिन हिम्मत नहीं हारे परमेश्वर, 71 साल के बुजुर्ग की कहानी


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Balaghat News: परमेश्वर कावड़े साल 2013 में लोक निर्माण विभाग से रिटायर हुए थे. सेवानिवृत्ति से दो साल पहले यानी 2011 में उनकी जिंदगी खुशहाल थी. वह अपनी पत्नी और दो बच्चों (बेटा-बेटी) के साथ खुशी-खुशी जीवन बिता रहे थे.

बालाघाट. लोग रिटायरमेंट के बाद जीवन आराम से जीना चाहते हैं लेकिन जिनका जीवन संघर्षों से भरा हो, उन्हें आराम मंजूर नहीं होता. एक ऐसे ही शख्स मध्य प्रदेश के बालाघाट के रैन बसेरा में रहते हैं. एक हाथ में झोला और दूसरे हाथ में लाठी, 71 साल की उम्र में धीमी गति से चलते हुए वह हर मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में होने वाली जनसुनवाई में आते हैं. वह अपने लिए नहीं आते और न ही उनकी कोई समस्या है. दरअसल वह आते हैं दूसरों की मदद करने के लिए. गांव से आए लोगों को वह आवेदन बनाकर देते हैं और बताते हैं कि अपनी समस्या कलेक्टर के सामने कैसे रखनी है. जनसेवा का ऐसा जज्बा शायद ही कहीं देखने को मिलता है. लोकल 18 ने उनसे मुलाकात की और उनकी कहानी जानी.

बुजुर्ग का नाम परमेश्वर कावड़े है. वह साल 2013 में पीडब्ल्यूडी से रिटायर हुए थे. रिटायरमेंट से दो साल पहले यानी साल 2011 में उनकी जिंदगी खुशहाल थी. वह पत्नी, एक बेटा और एक बेटी के साथ खुशी-खुशी जीवन बिता रहे थे लेकिन एक वक्त ऐसा आया कि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों ने उनके साथ मारपीट की और ऊपर से परमेश्वर पर ही मामला दर्ज हो गया. परिवार में इकलौते कमाई करने वाले परमेश्वर की जिंदगी बदल गई. केस दर्ज होने के बाद विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया. फिर वह दो साल तक संघर्ष करते रहे और रिटायरमेंट से ठीक दो महीने पहले नौकरी बहाल हुई. इस बीच पहले पत्नी ने साथ छोड़ा और फिर 2015 में बेटी ने. बेटा भी उन्हें छोड़कर कहीं चला गया.

पेंशन को मंजूरी लेकिन अब तक नहीं मिली
रिटायरमेंट के बाद परमेश्वर कावड़े की जिंदगी बदल गई. दरअसल मामला दर्ज होने के बाद उन्हें पेंशन नहीं मिली और जिंदगी संघर्ष से भरी रह गई. हालांकि वह कोर्ट से बेगुनाह साबित हुए, फिर भी विभाग ने उनकी पेंशन रोक दी. अपना सब कुछ गंवा चुके परमेश्वर को पेंशन की आस थी और फिर उन्होंने अपने अधिकार की लड़ाई शुरू की. वह लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे. आखिरकार साल 2023 में तत्कालीन कलेक्टर ने उनकी पेंशन को मंजूरी दे दी लेकिन परमेश्वर का कहना है कि उन्हें अभी तक पेंशन मिलना शुरू नहीं हुई है.

रिटायरमेंट के बाद किया यह काम
परमेश्वर कावड़े रिटायरमेंट के बाद लगातार लोगों की मदद कर रहे है. वह हर मंगलवार जनसुनवाई में आते हैं और ग्रामीण अंचलों से आए लोगों के लिए आवेदन लिखते हैं. वहीं युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए वह कार्यालयों में जाकर उन्हें राह भी दिखाते हैं. उनके पास रहने के लिए न ही घर है और न ही अपने हैं. फिलहाल कलेक्टर ने उन्हें शहर के रैन बसेरा में ठहराया है. उन्हें उम्मीद है कि एक दिन उनकी पेंशन शुरू होगी और वह स्वाभिमान से अपनी छत के नीचे सांस ले सकेंगे.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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