भोपाल की 29 शराब दुकानों के लिए आज, गुरुवार को फिर से टेंडर की प्रक्रिया होगी। 7 ग्रुप में बंटे इन दुकानों की रिजर्व प्राइज करीब 520 करोड़ रुपए रखी गई है। 2 मार्च को भी इनके लिए टेंडर की प्रक्रिया हुई थी, लेकिन किसी ने भी टेंडर नहीं भरा था। इसलिए दोबारा प्रक्रिया की जा रही है। बता दें कि भोपाल में कुल 87 कम्पोजिट शराब दुकानें हैं। इस बार ठेकों को 4 की बजाय 20 ग्रुप में बांटा गया है। ताकि, छोटे और नए लाइसेंस कारोबारी भी ठेके ले सके। 29 ठेकों के लिए पहली नीलामी 2 मार्च को की गई, लेकिन एक भी टेंडर नहीं आए। इसके पीछे जिम्मेदार बड़े ग्रुप की मोनोपाली बता रहे हैं। विभाग के मुताबिक, अब नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया की जा रही है। बाकी ग्रुप के लिए भी टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, सभी 87 शराब ठेकों की रिजर्व प्राइस 1432 करोड़ रुपए है। ग्रुप वाइज में इतनी दुकानें
पहले फेज के 7 ग्रुप के लिए प्रक्रिया की गई। इनमें बागसेवनिया ग्रुप की 5 दुकान, हबीबगंज फाटक ग्रुप की 4 दुकान, भानपुर चौराहा ग्रुप की 5 दुकान, स्टेशन बजरिया ग्रुप की 5 दुकान, खजूरीकलां ग्रुप की 3 दुकान, जहांगीराबाद ग्रुप की 4 दुकान और गुनगा ग्रुप की 3 दुकानें शामिल हैं। नई आबकारी नीति लागू
प्रदेश में राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति लागू कर दी है। नई व्यवस्था में शराब दुकानों को छोटे-छोटे समूहों में बांटा है। भोपाल की 87 दुकानों को 20 ग्रुप में बांटा है। जिनके आवंटन की प्रक्रिया ई-टेंडर के जरिए की जा रही है। पहले फेज में ठेकों के टेंडर नहीं होने की ये वजह आई सामने इस बार 20% बढ़ी ठेके की कीमत
वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नीलामी की प्रक्रिया में ठेके 1193 करोड़ रुपए से ज्यादा में हुए थे, जो टारगेट से 11% यानी, 120 करोड़ रुपए अधिक थे। इस बार 1432 करोड़ रुपए रिजर्व प्राइस रखी गई है। बता दें कि वर्तमान मूल्य में 20 प्रतिशत बढ़ोत्तरी कर आरक्षित मूल्य तय किया है। इसका असर अब समूहों की कीमतों पर दिखने लगा है। भोपाल में इस बार सबसे महंगा समूह पिपलानी का है। इसमें 4 दुकानें – पिपलानी, अयोध्या नगर, रत्नागिरी तिराहा और पटेल नगर हैं। 20 फीसदी आरक्षित मूल्य बढ़ने के बाद इस समूह की कीमत 127 करोड़ 77 लाख 60 हजार 551 रुपए हो गई है। इससे पहले वर्ष 2025-26 में इन दुकानों का वार्षिक मूल्य 106 करोड़ 48 लाख से ज्यादा था। इसी तरह बाग सेवनिया समूह की कीमत करीब 101 करोड़ से बढ़कर 121 करोड़ 89 लाख से ज्यादा हो गई है। आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नीति में किए गए बदलावों के आधार पर ही ई-टेंडर के जरिए दुकानों का आवंटन होगा। छोटे समूह बनाए जाने से ज्यादा बोलीदाता सामने आएंगे व सरकार को फायदा मिलेगा। इससे नए लोगों को भी भागीदारी का मौका मिलेगा। 239 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे
विभाग की माने तो नई व्यवस्था से सरकार के खजाने में सीधे 238 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे। टेंडर फाइनल होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
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