शादी के 14 साल बाद भी जब औलाद नहीं हुई तो दंपति ने मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की और मन्नत मांगी। मन्नत पूरी हुई और घर में बेटी की किलकारी गूंज उठी। लेकिन खुशी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। जन्म के बाद जांच में पता चला कि बच्ची के दिल में छेद है। परिजनों ने बच्ची को कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन ज्यादातर ने इलाज करने से मना कर दिया। ऐसे मुश्किल समय में नारायणा अस्पताल और प्रदेश सरकार की आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) योजना बच्ची के लिए संजीवनी बनकर सामने आई। जबलपुर जिले के तिलगवां गांव में रहने वाले यादव परिवार की इस बच्ची का मुंबई के नारायणा अस्पताल में इलाज किया गया। करीब दो महीने के भीतर बच्ची का सफल ऑपरेशन हुआ। अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और परिवार में फिर से खुशियां लौट आई हैं। अक्टूबर 2025 में बच्ची का हुआ जन्म तिलगवां गांव निवासी कौशल यादव प्राइवेट जॉब करते हैं। उनकी शादी को 14 साल हो चुके थे, लेकिन संतान नहीं थी। परिवार ने कई जगह पूजा-पाठ और मन्नत मांगी। इसके बाद अक्टूबर 2025 में उनके घर बेटी का जन्म हुआ। जन्म के करीब एक सप्ताह बाद जांच में डॉक्टरों ने बच्ची के दिल में छेद होने की जानकारी दी। इसके कारण उसका शरीर लगातार नीला पड़ने लगा था। कई शहरों में दिखाया, डॉक्टरों ने ऑपरेशन से किया मना नवंबर 2025 में परिवार बच्ची को लेकर जबलपुर, नागपुर, भोपाल और रायपुर के अस्पतालों में गया। परिजनों के मुताबिक कई डॉक्टरों ने ऑपरेशन को जोखिम भरा बताते हुए इलाज से मना कर दिया। कुछ डॉक्टरों ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान बच्ची की जान को खतरा हो सकता है। आरबीएसके के माध्यम से मुंबई भेजी गई रिपोर्ट इस बीच नवंबर में ही परिवार ने जबलपुर जिला अस्पताल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) प्रभारी सुभाष शुक्ला से संपर्क किया। उन्होंने बच्ची की रिपोर्ट मुंबई के नारायणा अस्पताल भेजी। शुरुआत में वहां के डॉक्टरों ने भी ऑपरेशन से मना किया था। आरबीएसके प्रभारी और परिवार के अनुरोध पर डॉक्टरों ने बच्ची को जांच के लिए बुलाया। माता-पिता बच्ची को लेकर मुंबई पहुंचे। जांच के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने का निर्णय लिया और दिसंबर 2025 में बच्ची का ऑपरेशन किया, जो सफल रहा। मां बोलीं- उम्मीद लगभग खत्म हो गई थी बच्ची की मां ज्योति यादव ने बताया कि जन्म के बाद डॉक्टरों ने कहा था कि बच्ची ज्यादा दिन नहीं जी पाएगी। कई अस्पतालों से निराशा मिलने के बाद आरबीएसके के माध्यम से मदद मिली और मुंबई में ऑपरेशन हुआ। आज ऑपरेशन के 2 महीने बाद भी बच्ची स्वस्थ है।
आरबीएसके प्रभारी बोले, 10 साल में पहला ऐसा मामला आरबीएसके प्रभारी सुभाष शुक्ला ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में ऐसा पहला मामला देखा है, जिसमें पहले डॉक्टरों ने ऑपरेशन से मना किया और बाद में उसी बच्ची का सफल ऑपरेशन हुआ। अब बच्ची सामान्य बच्चों की तरह स्वस्थ है।
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