रबी फसल कटते ही खाली मत छोड़िए खेत! गर्मियों में कर लें ये एक काम, खरीफ में मिलेगा फायदा

रबी फसल कटते ही खाली मत छोड़िए खेत! गर्मियों में कर लें ये एक काम, खरीफ में मिलेगा फायदा


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रबी फसल कटते ही खाली मत छोड़िए खेत! गर्मियों में करें ये एक काम, मिलेगा फायदा

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Agri Tips: रबी फसलों की कटाई के बाद कई किसान अपने खेतों को खाली छोड़ देते हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह समय खेत की तैयारी के लिए बेहद अहम होता है. अगर किसान खरीफ सीजन में बेहतर पैदावार चाहते हैं तो गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करना बहुत फायदेमंद माना जाता है. इससे मिट्टी की संरचना सुधरती है और कीट-रोगों को भी काफी हद तक खत्म किया जा सकता है. साथ ही मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व पौधों के लिए अधिक उपलब्ध हो जाते हैं. यही वजह है कि कृषि वैज्ञानिक गर्मियों में गहरी जुताई करने की सलाह देते हैं.

गेहूं की कटाई के बाद खेतों में अक्सर खरपतवार और कीट छिपे रहते हैं. अगर खेत को ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो ये कीट और खरपतवार बाद में खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए किसान अगर समय रहते खेत की गहरी जुताई कर दें, तो इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

गहरी जुताई करने से मिट्टी की ऊपरी परत नीचे और नीचे की परत ऊपर आ जाती है. इससे मिट्टी के अंदर छिपे कई कीट और उनके अंडे ऊपर आ जाते हैं. तेज धूप और गर्मी के कारण ये कीट नष्ट हो जाते हैं. इससे अगली फसल को कीटों से होने वाला नुकसान कम हो जाता है और खेत साफ रहता है.

खरगोन के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह बताते हैं कि गहरी जुताई से खरपतवार का असर भी कम होता है. जब मिट्टी पलटती है तो खरपतवार की जड़ें बाहर आ जाती हैं और सूख जाती हैं. इससे खरीफ सीजन में बोई जाने वाली फसलों को बढ़ने के लिए अच्छा माहौल मिलता है और खेत में अनचाहे पौधों की संख्या कम रहती है.

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चुंकि, खरगोन जिले में गेहूं,चना के बाद खरीफ सीजन में किसान कपास, मक्का और मिर्च जैसी फसलें ज्यादा लगाते हैं. लेकिन कई बार कीट और खरपतवार के कारण उत्पादन कम हो जाता है. अगर किसान गर्मियों में करीब 15 सेंटीमीटर तक गहरी जुताई कर दें तो मिट्टी में हवा का संचार बढ़ता है और कई कीट अपने आप नष्ट हो जाते हैं.

वैज्ञानिक यह भी बताते हैं कि कई कीट मिट्टी की गहराई में अपने अंडे देते हैं. ये अंडे बारिश के बाद विकसित होकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं. लेकिन जब खेत की गहरी जुताई की जाती है तो ये अंडे ऊपर आ जाते हैं और तेज धूप से नष्ट हो जाते हैं. इससे फसल को कीटों से बचाने में मदद मिलती है.

गहरी जुताई का एक और फायदा यह है कि इससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है. जब मिट्टी पलटती है तो उसमें हवा और धूप का असर बढ़ जाता है. इससे मिट्टी में पोषक तत्व बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है और पौधों को जरूरी खनिज तत्व आसानी से मिलते हैं. इससे फसल की बढ़वार भी अच्छी होती है.

विशेषज्ञों के अनुसार गहरी जुताई हर साल करने की जरूरत नहीं होती. इसे तीन से चार साल में एक बार करना काफी होता है. जुताई करते समय खेत की ढाल का भी ध्यान रखना जरूरी है. सही दिशा में जुताई करने से मिट्टी का कटाव कम होता है और खेत की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है. इससे खरीफ फसलों की पैदावार बेहतर हो सकती है.



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