ATM मशीन से कम नहीं यह फसल, 70 दिन में होगी छप्परफाड़ कमाई, बन जाएंगे मालामाल!
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How To Grow Urad In March: मार्च में सरसों और मसूर की कटाई के बाद खाली हुए खेतों में किसान कम समय में अच्छी आमदनी के लिए उड़द की खेती कर सकते हैं. बाजार में सालभर मांग रहने के कारण इसके अच्छे दाम मिलते हैं, वहीं अधिक उत्पादन के लिए उन्नत किस्मों का चयन करना जरूरी है.
How To Grow Urad In March: मध्य प्रदेश में सीजन के हिसाब से मोटे अनाजों के साथ दलहनी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. इन्हीं में उड़द की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है. बाजार में उड़द की मांग सालभर बनी रहती है, इसलिए इसके दाम भी किसानों को अच्छे मिलते हैं. खास बात यह है कि रबी की फसल मार्च महीने में सरसों और मसूर की कटाई के बाद कई किसान अपने खेत खाली छोड़ देते हैं. ऐसे में यदि किसान उन खाली खेतों में उड़द की बुवाई कर दें, तो कम समय में एक अतिरिक्त फसल लेकर अच्छी कमाई कर सकते हैं.
वरिष्ठ किसान सलाहकार राजेश पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि रबी की फसल कटने के बाद किसान मार्च के महीने में उड़द की खेती शुरू कर सकते हैं. 15 मार्च से लेकर अप्रैल के पहले सप्ताह तक इसकी बुवाई करना सबसे उपयुक्त समय माना जाता है. इसके लिए किसान उन्नत किस्मों जैसे PU-94, T-9 और पंत-31 का चयन करें, जिससे बेहतर उत्पादन मिल सकता है.
उन्होंने बताया कि उड़द की खेती के लिए हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है. खेत में कतारों में बुवाई करनी चाहिए और पानी के निकास की उचित व्यवस्था रखना जरूरी है. गर्मी के मौसम में शाम के समय हल्की सिंचाई करना फसल के लिए फायदेमंद रहता है. यह फसल कम समय में तैयार होने वाली फसल है, जो लगभग 70 से 75 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. राजेश पटेल के अनुसार प्रति हेक्टेयर खेत के लिए लगभग 20 से 30 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है. सही तरीके से खेती करने पर किसान प्रति हेक्टेयर 30 से 35 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. उड़द एक दलहनी फसल है, जिसे किसान दो तरीकों से उगा सकते हैं. पहला तरीका यह है कि पूरे खेत में केवल उड़द की बुवाई की जाए. दूसरा तरीका यह है कि इसे गन्ने या अन्य फसलों के बीच खाली जगह में भी लगाया जा सकता है.
खेती से बड़ा फायदा
उन्होंने बताया कि उड़द की खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. दलहनी फसल होने के कारण यह मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती है, जिससे अगली फसल की पैदावार भी अच्छी होती है. कम पानी और कम मेहनत में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का अच्छा जरिया बन सकती है. हालांकि, गर्मी के मौसम में उड़द की फसल में कुछ बीमारियों का खतरा भी रहता है. इनमें मुख्य रूप से पीला मोजेक वायरस, पत्ती झुलसा और तना गलन जैसी समस्याएं शामिल हैं. पीला मोजेक वायरस सफेद मक्खी के जरिए फैलता है. इससे बचाव के लिए किसान IPU 02-43 और IPU 94-1 जैसी रोग प्रतिरोधी किस्मों की बुवाई कर सकते हैं. इसके अलावा सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड या थायामेथोक्सम का छिड़काव और बीज उपचार के लिए कार्बेन्डाजिम का उपयोग करना भी लाभदायक माना जाता है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान सरसों या अन्य रबी फसलों की कटाई के बाद खेत खाली नहीं छोड़ते और उसमें उड़द की खेती करते हैं, तो कम समय में अच्छी अतिरिक्त आय हासिल कर सकते है. इसलिए इस सीजन में उड़द की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प बन सकती है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें