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International Women’s Day 2026: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अनिता सिंह चौहान लोकल 18 से कहती हैं कि महिलाओं का सम्मान सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए. हर दिन महिलाओं का दिन है क्योंकि आज नारी शक्ति हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है.
खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा में एक ऐसी महिला हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी समाजसेवा को समर्पित कर दी. पिछले 33 सालों से अनिता सिंह चौहान बेसहारा, पीड़ित और जरूरतमंद महिलाओं की मदद कर रही हैं. उनके इस सेवाभाव के लिए उन्हें मध्य प्रदेश सरकार समेत कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है. अनिता सिंह चौहान की पढ़ाई एमएससी तक हुई है. शादी के बाद उन्होंने बीएड और एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई भी पूरी की. समाजसेवा की प्रेरणा उन्हें अपनी मां से मिली और उसी रास्ते पर चलते हुए उन्होंने 1993 से महिलाओं के लिए काम करना शुरू कर दिया. अनिता सिंह पिछले करीब 15 सालों से निराश्रित, बेसहारा और घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए परामर्श और आश्रय गृह चला रही हैं. यहां ऐसी महिलाओं को रहने की सुविधा के साथ रोजगार प्रशिक्षण, काउंसलिंग और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ जीवन जी सकें. अब तक करीब 450 महिलाओं को उनके परिवार तक वापस पहुंचाने में उनकी संस्था ने मदद की है.
खंडवा में अनिता सिंह एक ने विशेष रेस्क्यू अभियान भी चलाया, जिसके तहत सड़कों पर भटक रही मानसिक रूप से अस्वस्थ महिलाओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया. ऐसी करीब 12 से 15 महिलाओं को रेस्क्यू कर इलाज के लिए भेजा गया, जिनमें से 6 महिलाएं ठीक होकर अपने घर लौट पाईं. यह उनके काम की बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है.
बलात्कार की घटना से मिला सेवा का संकल्प
लोकल 18 से बातचीत में अनिता सिंह चौहान बताती हैं कि भोपाल में एक मासूम बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था. इसके बाद उन्होंने महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर आवाज उठाना शुरू किया. उन्होंने उस समय के राज्यपाल बलराम जाखड़ को दुष्कर्मियों को फांसी की सजा देने की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा. इसके बाद कई रैलियां और अभियान भी चलाए गए. बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी तीन बार ज्ञापन दिया गया.
2003 में शुरू की संस्था
अनिता सिंह बताती हैं कि वह पहले व्यक्तिगत स्तर पर समाजसेवा करती थीं. बाद में भोपाल की महिलाओं की सलाह पर उन्होंने 2003 में अपनी संस्था ‘सीड’ की शुरुआत की और ‘महाशक्ति सदन’ नाम से आश्रम शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने अपने निजी पैसे से सेवा कार्य शुरू किए. इस काम में उनके पति और परिवार ने भी पूरा साथ दिया. 2022 में उनके पति का निधन हो गया लेकिन उन्होंने सेवा का यह सिलसिला जारी रखा.
कई संस्थाओं से मिला सम्मान
समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई विभागों और संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. मुख्यमंत्री द्वारा भी भोपाल में उन्हें सम्मानित किया गया है. उनकी मां को भी समाजसेवा के लिए राष्ट्रपति सम्मान मिल चुका है, जिससे उन्हें प्रेरणा मिली.
महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर
अनिता सिंह चौहान महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समय-समय पर रोजगार मेले भी आयोजित करती हैं. इसके अलावा बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि वे अपने जीवन में किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकें.
महिलाओं से की खास अपील
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अनिता सिंह कहती हैं कि महिलाओं का सम्मान सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए. उनके अनुसार हर दिन महिलाओं का दिन है क्योंकि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं. वह महिलाओं से अपील करती हैं कि अगर कहीं कोई बेसहारा या जरूरतमंद महिला दिखाई दे, तो उसकी मदद के लिए आगे आएं और समाज को बेहतर बनाने में अपना योगदान दें. खंडवा की अनिता सिंह चौहान की यह कहानी बताती है कि अगर सेवा का जज्बा हो, तो एक इंसान भी सैकड़ों-हजारों लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.