बिहार में बोधगया स्थित महाबोधी महाविहार को बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। भंते धम्मशिखर ने 1949 के मंदिर अधिनियम को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे बदलने की मांग की है। इसी सिलसिले में मंगलवार, 10 मार्च को बालाघाट के आंबेडकर चौक पर आंदोलन का आह्वान किया गया है। भंते धम्मशिखर ने केंद्र और बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 1949 का कानून असंवैधानिक है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह दुनिया के अन्य धर्मों के पवित्र स्थल (जैसे मक्का-मदीना या येरुशलम) उनके अपने समुदायों के पास हैं, उसी तरह महाबोधी महाविहार पर भी बौद्धों का पूर्ण अधिकार होना चाहिए। उन्होंने मंदिर को महंतों के कब्जे से मुक्त करने की पुरजोर मांग की है। 10 मार्च को जिले में बड़ा प्रदर्शन महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन समिति ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को प्रदर्शन की योजना बनाई है। इसके तहत- आंबेडकर चौक पर धरना दिया जाएगा। शहर में रैली निकाली जाएगी। शासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। विभिन्न संगठनों का मिला समर्थन इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए जिले के कई बौद्ध अनुयायियों और संगठनों ने एकजुटता दिखाई है। समिति के अध्यक्ष विकास खांडेकर और उपाध्यक्ष शोभना ताई मेश्राम सहित एलडी मेश्राम, संतोष मेश्राम और कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लोगों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। लंबे समय से चल रही इस मांग को लेकर बौद्ध समुदाय अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है।
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