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Bhopal News: डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि सरकार मेडिकल कॉरपोरेट हब को बढ़ावा दे रही है. सरकार की आयुष्मान भारत योजना गरीब मरीजों के लिए है लेकिन सरकार फाइनल लेवल सर्टिफिकेट के जरिए बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों को फायदा पहुंचाना चाहती है.
मध्य प्रदेश के 300 अस्पतालों पर तालाबंदी का संकट नजर आ रहा है. (सांकेतिक तस्वीर)
रिपोर्ट- शिवकांत आचार्य, भोपाल. मध्य प्रदेश के 300 अस्पतालों पर संकट नजर आ रहा है. आयुष्मान भारत योजना से संबंधित 300 अस्पतालों पर तालाबंदी का संकट मंडरा रहा है. ये अस्पताल भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के हैं. बड़ी संख्या में अस्पताल संचालक, डॉक्टर और डायरेक्टर आज (मंगलवार) राजधानी भोपाल स्थित आयुष्मान भारत कार्यालय पहुंचे. वे निजी अस्पतालों के लिए NABH के फाइनल लेवल सर्टिफिकेट अनिवार्यता के नियम को खत्म करने की मांग कर रहे हैं. इस नियम के चलते अस्पताल तालाबंदी के कगार पर पहुंच गए हैं. संचालकों का कहना है कि छोटे अस्पतालों के लिए फाइनल लेवल सर्टिफिकेट लगभग नामुमकिन है.
डॉक्टरों ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार मेडिकल कॉरपोरेट हब को बढ़ावा दे रही है. सरकार की आयुष्मान भारत योजना गरीब मरीजों के लिए है. आयुष्मान भारत योजना सबके लिए और शीघ्र इलाज के लिए है लेकिन सरकार फाइनल लेवल सर्टिफिकेट के जरिए बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों को फायदा पहुंचाना चाहती है.
लाखों की संख्या में लोग होंगे बेरोजगार
प्राइवेट हॉस्पिटल डायरेक्टर्स संगठन के अध्यक्ष विशाल सिंह बघेल ने कहा कि सरकार के इस फैसले से लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार होंगे. डॉक्टर के साथ मेडिकल फील्ड से जुड़े तमाम लोग इसका विरोध कर रहे हैं और फाइनल लेवल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता के नियम को खत्म करने की मांग कर रहे हैं.
छोटे अस्पतालों के लिए मुश्किल
प्राइवेट हॉस्पिटल डायरेक्टर्स संगठन के सदस्य डॉ देवेंद्र सिंह धाकड़ ने कहा कि फाइनल लेवल सर्टिफिकेट छोटे अस्पतालों के लिए लगभग नामुमकिन है. इसकी अनिवार्यता खत्म की जाए. आयुष्मान भारत योजना गरीब वर्ग के लिए बहुत लाभकारी योजना है लेकिन सरकार फाइनल लेवल सर्टिफिकेट के माध्यम से बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों को फायदा पहुंचाना चाहती है. ऐसा नहीं होना चाहिए.
सरकारी खजाने में सेंधमारी
बताते चलें कि पिछले साल राज्य में आयुष्मान भारत योजना के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले प्राइवेट अस्पतालों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ था. दक्ष आयुष्मान मॉडल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर हुए खुलासे से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था. जांच में पता चला था कि कई निजी अस्पताल भौतिक रूप से बंद हो चुके हैं लेकिन पोर्टल पर वे चालू मिले. ये अस्पताल सरकार से लगातार क्लेम वसूल रहे थे. जिसके बाद इनपर कार्रवाई की गई थी.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.