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मध्य प्रदेश के गुना में एक बड़ा हादसा उस समय होने से टल गया, जब मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के काफिले की गाड़ियां आपस में टकरा गईं. अच्छी बात ये रही है कि इसमें उन्हें कुछ नहीं हुआ है और वह सुरक्षित हैं.
नरेंद्र सिंह तोमर के काफिले में टकराईं गाड़ियां
Narendra Singh Tomar: मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर पूर्व विधायक राव राजकुमार सिंह यादव को श्रद्धांजलि देने महुहन गए थे. इस दौरान सड़क में धूल और मिट्टी के ढेर होने की वजह से उनके काफिले की गाड़ियां आपस में टकरा गईं. इसमें कुछ लोगों को मामूली चोटें आई हैं और एक बड़ा हादसा होने से टल गया है.
सुरक्षित हैं नरेंद्र सिंह तोमर
ऐसा बताया जा रहा है कि ईसागढ़-देहरदा मार्ग पर सड़क निर्माण के दौरान काफी धूल और गिट्टी के ढेर लगे हुए थे. इसी वजह से काफिले के आगे चल रही स्टाफ की गाड़ी गिट्टी के ढेर पर चढ़ गई और फिर उससे पीछे वाली गाड़ी टकरा गई. अच्छी बात ये रही विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर अभी पूरी तरह से सुरक्षित हैं, क्योंकि उनकी गाड़ी पीछे थी.
घायलों को अस्पताल में करवाया गया भर्ती
जिन लोगों को गाड़ियां टकराने से चोटें आई हैं. उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है और अभी उनका इलाज चल रहा है. अब प्रशासन की मदद से फंसी हुई गाड़ियों को निकाला जा रहा है. पुलिस के कई बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद हैं.
सांसद रहते हुए बीजेपी ने नरेंद्र सिंह तोमर को लड़वाया था MLA का चुनाव
नरेंद्र सिंह तोमर भाजपा के वरिष्ठ नेता है और इस समय मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हैं. साल 2023 में जब भाजपा ने उन्हें दिमनी से टिकट दिया था, तो वह मुख्यमंत्री बनने की रेस में थे, क्योंकि उन्हें सांसद और मंत्री रहते हुए चुनाव लड़वाया गया था. इससे पहले वह ग्वालियर विधानसभा से दो बार विधायक भी रह चुके हैं. वह राजनीतिक रूप से सक्रिय रहते हैं और उनकी ग्वालियर-चंबल संभाग में मजबूत पकड़ है.
नरेंद्र सिंह तोमर सबसे पहले साल 1998 में ग्वालियर से विधायक चुने गए थे. इसके बाद साल 2009 में वह मुरैना से सांसद बने. फिर ग्वालियर सीट से 2014 में और मुरैना सीट से 2019 में दोबारा सांसद बने. उनके राजनीतिक अनुभव को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें साल 2012 में प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया था और साल 2014 तक वह इस पद पर रहे थे.