रणथंभौर नेशनल पार्क से निकला युवा बाघ आरबीटी-2512 पिछले चार माह से कूनो नेशनल पार्क में मूवमेंट कर रहा है। हैरानी की बात है कि कूनो में चीतों को बसाने से पहले यहां से करीब 25 बाघ-तेंदुओं को शिफ्ट किया था। तब दक्षिण अफ्रीका ने इनकी वजह से चीते देने से मना कर दिया था। लेकिन, अब वन विभाग ने इस बाघ को रेस्क्यू न करने का निर्णय लिया है। पूर्व सदस्य सचिव एनटीसीए व चीता प्रोजेक्ट की स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजेश गोपाल का कहना है कि बाघ खाद्य शृंखला में सबसे ऊपर का शिकारी है और उसकी मौजूदगी इको सिस्टम का स्वाभाविक हिस्सा है। ऐसे में कूनो को मल्टी स्पीशीज कंजर्वेशन मॉडल के तहत विकसित करना ही सही होगा। चीता प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी के एचएस नेगी का कहना है कि इको सिस्टम को संतुलित रखने में बाघ अहम भूमिका निभाता है। उसकी मौजूदगी शिकार प्रजातियों की संख्या और व्यवहार को नियंत्रित करती है। कूनो को सिर्फ एक प्रजाति केंद्रित मॉडल पर चलाया तो दीर्घकाल में पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए अब चीते, बाघ और तेंदुआ तीनों को ध्यान में रखकर प्रबंधन रणनीति बनाई जाएगी। स्टीयरिंग कमेटी के निर्देश… अब मल्टी स्पीशीज कंजर्वेशन मॉडल विकसित हो बन सकता है एक नई मिसाल
वन अधिकारियों का कहना है कि यदि आरबीटी-2512 ने कूनो में स्थायी टेरिटरी बना ली तो चीतों के मूवमेंट और शिकार पैटर्न पर असर पड़ सकता है। बाघ बड़े क्षेत्र में गश्त करता है और शिकार आधार पर सीधा दबाव डालता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यहां अपेक्स प्रिडेटर और चीता दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने में सफलता मिलती है, तो यह देश में इको सिस्टम आधारित प्रबंधन की नई मिसाल बन सकता है। अधिकारियों का कहना है कि बाघ फिलहाल चीता कोर एरिया से सुरक्षित दूरी पर है। चीतों में सह अस्तित्व विकसित होगा
मप्र वन विभाग को चीता प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी ने निर्देश दिए हैं कि बाघ को रेस्क्यू करने की नहीं बल्कि और बाघों को बसाने की जरूरत है। कूनो में वैसे ही तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है। बाघ की उपस्थित ही इको सिस्टम को संतुलित कर सकती है। वहीं इससे चीतों में सबके साथ रहने की प्रवृत्ति विकसित होगी। भारत से चीता लुप्त होने से पहले मल्टी स्पीशीज के साथ रहता था। दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया में वे मल्टी स्पीशीज के साथ ही रहते हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि कूनो को मल्टी स्पीशीज कंजर्वेशन मॉडल के तहत विकसित किया जाए। लॉन्ग टर्म एक्शन प्लान तैयार कर रहे चीता प्रोजेक्ट की स्टीयरिंग कमेटी ने जो दिशा निर्देश दिए हैं, हम उसके हिसाब से काम करेंगे। लॉन्ग टर्म एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है, ताकि मल्टी स्पीशीज कंजर्वेशन मॉडल के रूप में कूनो विकसित हो सके।’
-शुभरंजन सेन, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ वन विभाग
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