पत्तियां पीली, कीड़े परेशान? सतना के एक्सपर्ट से समझें सब्जियों को कैसे बचाएं

पत्तियां पीली, कीड़े परेशान? सतना के एक्सपर्ट से समझें सब्जियों को कैसे बचाएं


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पत्तियां पीली, कीड़े परेशान? सतना के एक्सपर्ट से समझें सब्जियों को कैसे बचाएं

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गर्मी में सब्जियों की खेती या घर की बगिया को सबसे ज्यादा नुकसान कीट और फंगस पहुंचाते हैं जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन घट जाता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सही समय पर सिस्टमिक और कांटेक्ट कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से कम लागत में पौधों को मजबूत रखा जा सकता है और गर्मी में भी अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है.

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सतना : गर्मी का मौसम आते ही घर की बगिया या खेत में लगी सब्जियों पर कीट और रोगों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. तेज धूप और बदलते मौसम के कारण टमाटर, मिर्च, लौकी, ककड़ी और खीरा जैसी फसलें जल्दी प्रभावित होती हैं. कई बार पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और कीड़े भी लग जाते हैं जिसके कारण फल लगना भी कम हो जाता है. ऐसे में लोग समझ नहीं पाते कि कम लागत में फसल को कैसे सुरक्षित रखा जाए. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सही कीटनाशकों का उपयोग किया जाए तो बहुत कम खर्च में बगिया को सुरक्षित रखा जा सकता है और गर्मी के मौसम में भी फल सब्जियों की अच्छी पैदावार मिल सकती है.

गर्मियों में क्यों बढ़ता है कीटों का खतरा
गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के साथ कई तरह के कीट तेजी से सक्रिय हो जाते हैं एफिड्स, थ्रिप्स और माइलबग्स जैसे रस चूसने वाले कीट पौधों की पत्तियों और कोमल भागों को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. वहीं इल्ली और बीटल जैसे कीट पत्तियों को खाकर पौधों को कमजोर बना देते हैं. यदि समय पर इनकी रोकथाम न की जाए तो पूरी बगिया प्रभावित हो सकती है.

सिस्टमिक और कांटेक्ट कीटनाशक का सही उपयोग
लोकल 18 को जानकारी देते हुए पेस्टीसाइड एक्सपर्ट अमित सिंह ने बताया कि गर्मियों में सिस्टमिक और कांटेक्ट दोनों प्रकार के कीटनाशक काफी प्रभावी होते हैं. सिस्टमिक कीटनाशक पौधे के अंदर अवशोषित होकर पूरे पौधे में फैल जाते हैं जिससे पत्तियों के नीचे छिपे या रस चूसने वाले कीट खत्म हो जाते हैं. इनका असर लंबे समय तक रहता है और तेज धूप या हल्की बारिश में भी जल्दी खत्म नहीं होता.

वहीं कांटेक्ट कीटनाशक सीधे कीटों के संपर्क में आने पर उन्हें नष्ट कर देते हैं. यह खासतौर पर इल्ली, बीटल और खुले में दिखने वाले कीटों के लिए ज्यादा प्रभावी माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों का संयोजन या बारी बारी से उपयोग करना सबसे अच्छा तरीका होता है. इससे एक तरफ तुरंत कीट नियंत्रण होता है वहीं दूसरी तरफ लंबे समय तक पौधों को सुरक्षा भी मिलती है.

कितना आता है कीटनाशकों पर खर्च
कीटनाशकों का खर्च फसल और दवा के प्रकार पर निर्भर करता है. सामान्य तौर पर सिस्टमिक कीटनाशकों का खर्च लगभग 300 से 1200 रुपये तक हो सकता है. इमिडाक्लोप्रिड या थियामेथोक्सम जैसी दवाओं का एक एकड़ में उपयोग करने पर लगभग 300 से 600 रुपये तक खर्च आता है. वहीं अगर एडवांस दवाएं जैसे क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल का उपयोग किया जाए तो खर्च 1000 से 1500 रुपये तक पहुंच सकता है. वहीं कांटेक्ट कीटनाशकों की बात करें तो प्रोफेनोफोस और साइपरमेथ्रिन के मिश्रण का खर्च करीब 400 से 600 रुपये तक होता है. जबकि क्विनालफॉस या डेल्टामेथ्रिन जैसी सामान्य दवाएं 200 से 400 रुपये के बीच मिल जाती हैं. कुल मिलाकर एक एकड़ सब्जी की फसल में कीटनाशकों पर लगभग 7 से 8 हजार रुपये तक खर्च आ सकता है हालांकि लौकी, खीरा और ककड़ी जैसी फसलों में यह खर्च 2 से 3 हजार रुपये में भी पूरा हो सकता है.

छिड़काव करते समय रखें इन बातों का ध्यान
कीटनाशकों का असर तभी बेहतर होता है जब उनका उपयोग सही तरीके से किया जाए. विशेषज्ञों के अनुसार एक एकड़ क्षेत्र में छिड़काव के लिए लगभग 150 से 200 लीटर पानी का उपयोग करना चाहिए. दवा को पहले थोड़े पानी में घोलकर मदर सॉल्यूशन तैयार करना चाहिए और फिर उसे स्प्रे टैंक के पानी में मिलाना चाहिए. इसके अलावा छिड़काव हमेशा सुबह जल्दी या शाम के समय करना चाहिए. दोपहर की तेज धूप में स्प्रे करने से पत्तियां जल सकती हैं और दवा का असर भी कम हो जाता है. छिड़काव करते समय पत्तियों के ऊपर और नीचे दोनों तरफ दवा पहुंचाना जरूरी होता है ताकि कीट पूरी तरह खत्म हो सकें.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर कीटनाशकों का उपयोग, जल प्रबंधन और नियमित निगरानी से गर्मियों में भी सब्जियों की खेती सुरक्षित रखी जा सकती है. थोड़ी सी सावधानी और सीमित खर्च से किसान और बागवानी करने वाले लोग अपनी बगिया को हरा-भरा बनाए रख सकते हैं और भरपूर पैदावार हासिल कर सकते हैं.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें



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