Jabalpur News: पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करने वाली नगर पालिका परिषद सिहोरा की नाक के नीचे विकास के नाम पर विनाश का खुला खेल खेला गया. कागजों पर ‘सूखे और क्षतिग्रस्त’ पेड़ों को हटाने की अनुमति लेकर हरे-भरे पेड़ों को साफ कर दिया गया. मनसकरा क्षेत्र में हुई अवैध और अंधाधुंध पेड़ कटाई के बाद अब वहां का नजारा किसी ‘पेड़ों के कब्रिस्तान’ जैसा दिखाई दे रहा है. हैरानी की बात ये कि प्रशासन के पास इन काटे गए पेड़ों का कोई हिसाब नहीं है और जिम्मेदार अधिकारी मामले पर टाल-मटोल कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं.
दरअसल, पूरे मामले में अनुमति के नाम पर ‘बड़ी हेराफेरी’ देखने को मिली है. नगर पालिका द्वारा जारी किए गए अलग-अलग आदेशों में ग्राम मनसकरा में करीब 69 पेड़ों की अनुमति आवेदिका उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की वर्षा गर्ग को दी गई थी. आवेदन में तर्क दिया गया था कि ये पेड़ सूखे, क्षतिग्रस्त और फल न देने वाले हैं. लेकिन, तस्वीरें गवाह दे रही हैं कि अधिकारियों की सांठ-गांठ से 250 से ज्यादा हरे भरे पेड़ों को काट दिया गया.
250 पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी और मशीनें!
आरोप है कि ये सब खेल अधिकारियों के साथ मिलकर खेला गया. जानकारों की मानें तो उस निजी भूमि में प्लाटिंग का काम किया जाना है. जहां बाउंड्री वॉल तैयार की जा रही है. स्थानीय लोगों के आरोप हैं कि करीब 250 पेड़ों को काट दिया गया है. इनमें से अधिकांश पेड़ पूरी तरह हरे-भरे और जीवंत थे. जहां नियमों को ताक पर रखकर पूरे क्षेत्र को ठूंठ में तब्दील कर दिया गया और मप्र वृक्षों का परिरक्षण अधिनियम-2001 की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं.
CM0 बोलीं, सिर्फ सूखे और जर्जर पेड़ों की थी अनुमति
इतने बड़े पैमाने पर हुए अवैध कटाई पर जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी जयश्री चौहान से बातचीत की गई, तब उन्होंने कहा इन सूखे और जर्जर पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई थी. लेकिन कौन-कौन से पेड़ हैं, एनओसी देखकर ही बताया जा सकेगा. करीब 69 सूखे पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है. तकरीबन तीन से चार परमिशन आवेदकों ने ली थी. सीएमओ ने कहा, मौके पर नगर पालिका की टीम गई थी और बाकायदा सर्वे भी किया था. उन्होंने कहा कि वन विभाग ने भी शायद सर्वे कराया होगा. जिस पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है, उन पेड़ों का सर्वे नगर पालिका की टीम ने किया है और उसी आधार पर फिर एनओसी दी गई है.
पेड़ों का हो गया परिवहन, वन अधिकारी को पता नहीं
इस पूरे मामले में सिहोरा के वन अधिकारी आकाश पुरी से बातचीत की गई तब उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया. इसके बाद वन विभाग सिहोरा के एसडीओ एमएल बरकड़े से पूरे मामले बातचीत की गई तब उन्होंने कहा आपके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है, इसकी जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहां, नगर पालिका पेड़ों की अनुमति दे सकता है, लेकिन पहले वन विभाग से अनुमति लेनी होती है. ऐसा हुआ है या फिर नहीं, यह देखकर ही बताया जा सकेगा. पूरे मामले की जांच कराई जाएगी.
परिवहन के लिए ये काजग जरूरी
बता दें कि पेड़ों की कटाई के बाद लकड़ी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए TP यानी ‘परिवहन अनुज्ञा-पत्र’ अनिवार्य होता है. बिना इसके लकड़ी ले जाना ‘वन अपराध’ की श्रेणी में आता है. लेकिन, इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के बाद अधिकारी सिर्फ जांच की बात कर रहे हैं, जबकि उनके नाक के नीचे बड़ी संख्या में पेड़ों का परिवहन भी हो गया.
आखिर क्या कहता हैं नियम…
वन विभाग के नियम मुताबिक पेड़ों की कटाई के बाद बिना TP के एक लकड़ी भी नहीं हिल सकती, लेकिन सिहोरा में 250 पेड़ों का ‘जनाजा’ निकल गया और प्रशासन को खबर तक नहीं. क्या इन लकड़ियों के परिवहन के लिए अधिकारियों ने आंखें मूंदकर पास जारी किए या फिर अवैध रूप से कीमती लकड़ी को खपा दिया गया?
69 पेड़ों की आड़ में 250 पेड़ कैसे साफ हो गए?
क्या क्षतिपूर्ति के नाम पर नए वृक्षारोपण का जो ‘अंडरटेकिंग’ दिया गया था, वह भी सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा? अनुमति पत्र की शर्त क्रमांक 7 के अनुसार, हर कटे हुए पेड़ के बदले नया पौधा लगाना अनिवार्य है, अन्यथा प्रति वृक्ष 500 रुपये का दंड देय होगा. लेकिन जमीनी स्तर पर न तो नए पौधे दिख रहे हैं और न ही नियमों का पालन होता नजर आ रहा है. ऐसा प्रतीत होता है कि भू-माफिया और प्रशासन की मिलीभगत से इस ‘पर्यावरण हत्याकांड’ को अंजाम दिया गया.