फूल नहीं बिके तो बना डाली खाद! बालाघाट के ‘फ्लावर किंग’ का ग्जूकोज वाला कमाल

फूल नहीं बिके तो बना डाली खाद! बालाघाट के ‘फ्लावर किंग’ का ग्जूकोज वाला कमाल


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फूल नहीं बिके तो बना डाली खाद! बालाघाट के ‘फ्लावर किंग’ का ग्जूकोज वाला कमाल

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Balaghat ke flower king : बालाघाट में फ्लावर किंग के नाम से मशहूर महेश पांचे फूलों के खेती कर दूसरे किसानों से अलग है. खास बात ये है कि वह फूलों की खेती पूरी तरह जैविक करते हैं. ऐसे में खेतों में फूल खिलने के बाद से मार्केट में तो बेच देते हैं. लेकिन कई बार फूल बिक नहीं पाते हैं. ऐसे में वह स्मार्ट किसान वेस्ट फूल से स्पेशल खाद तैयार करते हैं. इसमें कई तरह के पोषक तत्व होते

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Agri News : बालाघाट में फ्लावर किंग के नाम से मशहूर महेश पांचे फूलों के खेती कर दूसरे किसानों से अलग है. खास बात ये है कि वह फूलों की खेती पूरी तरह जैविक करते हैं. ऐसे में खेतों में फूल खिलने के बाद से मार्केट में तो बेच देते हैं. लेकिन कई बार फूल बिक नहीं पाते हैं. ऐसे में वह स्मार्ट किसान वेस्ट फूल से स्पेशल खाद तैयार करते हैं. इसमें कई तरह के पोषक तत्व होते हैं, जिससे न सिर्फ पौधों को पोषक तत्व मिलते हैं बल्कि भूमि भी उपजाऊ होती है. महेश पांचे उस स्पेशल खाद को पौधों का ग्लूकोज कहते हैं. ऐसे में हम जानेंगे कि पौधों का ग्लूकोज कैसे बनता है.

कैसे बनता है फूलों का खाद
फूलों का खाद बनाने के लिए किसान भाई को 1 एकड़ के लिए 10 लीटर गौमूत्र,  गुड़, 30 किलो फूल की जरूरत होती है. इसे मिलाकर आप फूलों का लिक्विड वाला खाद बना सकते हैं. यह आमतौर पर 90 दिनों में बनकर तैयार होता है लेकिन आप इसे कल्चर मिलाकर सिर्फ 21 दिन में तैयार कर सकते हैं. इसमें ऐसा जरूरी नहीं है कि कोई विशेष जाति के फूल की ही जरूरत हो. इसमें आप मौजूद फूल से भी खाद बना सकते हैं. इस मिश्रण को आपको एक बार मिलाकर रखना फिर सीधे 21 दिनों में ही ये लिक्विड खाद तैयार हो जाता है.

जानिए कैसे करें छिड़काव
पौधे के ग्लूकोज यानी फूलों के लिक्विड खाद को तैयार करने के बाद आप इसे खेत में आसानी से छिड़क सकते हैं. अगर आप ड्रिप इरिगेशन के माध्यम से इसे सिंचना चाहते हैं, तो एक एकड़ खेत के लिए 10 लीटर लिक्विड खाद की जरूरत पड़ती है. वहीं, स्प्रे पंप के माध्यम से छिड़कना है, तो आपको पानी  5 एमएल प्रति लीटर मिलाना चाहिए.

बंजर हो रही भूमि के लिए रामबाण
महेश पांचे का कहना है कि बीते सालों में भूमि में कई तरह के बदलाव आए है. पहले रासायनिक खादों से खेत की उर्वरा शक्ति चली गई. नतीजतन अब इंसान की सेहत पर भी असर पड़ रहा है. ऐसे में भूमि को सुधारने की जरूरत है. अब किसानों को जैविक खेती की तरफ आने की जरूरत है. इससे खेती में सही बदलाव के साथ अच्छी शुरुआत होगी. इस खाद के इस्तेमाल से किसान भाई अपने खेत को जरूरी बैक्टीरिया बढ़ाने में मदद करता है. केंचुआ सहित दूसरे जरूरी जीव खेत को बेहतर बना सकते हैं. इससे खेती को प्राकृतिक तरीके से सुधार हो सकता है.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें



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