बंद खदान दो दिन पहले ही शुरू हुई थी: जांच के घेरे में संचालन; दतिया में धमाका होने से दो मजदूर झुलस गए थे – datia News

बंद खदान दो दिन पहले ही शुरू हुई थी:  जांच के घेरे में संचालन; दतिया में धमाका होने से दो मजदूर झुलस गए थे – datia News




दतिया में उनाव थाना क्षेत्र के गोविंदगढ़ मौजा में रविवार शाम पत्थर की एक खदान में अचानक हुए धमाके ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में दो मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें उपचार के लिए ग्वालियर भेजा गया है। सोमवार को सामने आया कि जिस खदान में यह घटना हुई वह करीब पांच माह से बंद थी और हाल ही में दो दिन पहले ही दोबारा काम शुरू किया गया था। सोमवार को दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची तो खदान में सन्नाटा पसरा था। हालांकि कुछ पुलिसकर्मी खनिज विभाग की टीम के साथ यहां जरूर खड़े दिखे। मजदूरों और आसपास के ग्रामीणों से बातचीत में घटना की पूरी तस्वीर सामने आई। खदान में काम करने वाली मजदूर महिला इमरती देवी ने बताया कि वह पिछले सात-आठ वर्षों से यहां काम कर रही हैं और मजदूरों के लिए खाना बनाती हैं। उनके मुताबिक हादसे के समय मजदूर मशीनों से पत्थर काटने और ग्राइंडर चलाने का काम कर रहे थे। इमरती देवी के अनुसार, अचानक जोरदार धमाका हुआ। आवाज इतनी तेज थी कि सभी लोग घबरा गए और कमरे से बाहर भागे। धमाके के बाद अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद मजदूरों ने किसी तरह घायल मजदूरों को बाहर निकाला। बताया जा रहा है कि दोनों मजदूरों के शरीर करीब 80 से 85 प्रतिशत तक झुलस गए हैं। कोई भी जिम्मेदार मौके पर मौजूद नहीं था
ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद खदान पर कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं था। खदान के मालिक तस्वीर सिंह और धर्मवीर सिंह बताए जा रहे हैं, जो मुरैना जिले के निवासी हैं। घटना रविवार शाम करीब चार बजे की बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह खदान पहले गिट्टी क्रेशर के रूप में संचालित होती थी, लेकिन धीरे-धीरे यहां खुदाई गहरी होने लगी। इसके बाद यहां से बड़े आकार की पत्थर की सिल्लियां निकलने लगीं। इन पत्थरों की खासियत यह है कि पॉलिश करने के बाद ये पूरी तरह ग्रेनाइट की तरह चमकते हैं। यही कारण है कि इस पत्थर की मांग दतिया के बाहर भी है। निर्माण कार्यों में इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि खदान संचालकों के लिए यह पत्थर काफी कीमती साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी लालच में बंद पड़ी खदान को फिर से शुरू किया गया। ग्रामीणों के अनुसार चार-पांच दिन पहले ही खदान में दोबारा काम शुरू हुआ था और अब तक यहां से करीब दो ट्रक पत्थर बाहर भेजे जा चुके थे। हादसे के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

ग्रामीण लंबे समय से कर रहे हैं ब्लास्टिंग का विरोध
गोविंदगढ़ मौजा की जिस खदान में रविवार को धमाका हुआ, वह लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों के विरोध और विवाद का केंद्र रही है। गांव के लोगों का कहना है कि यहां पहले भी कई बार ब्लास्टिंग को लेकर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन इसके बावजूद खदान का संचालन जारी रहा। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक यह खदान पहले सामान्य गिट्टी क्रेशर के रूप में चलती थी। गांव के लोगों का आरोप है कि पहले जब यहां ब्लास्टिंग की जाती थी तो आसपास के इलाकों में कंपन महसूस होता था और पत्थर दूर दूर तक बोल की तरह गिरते थे। कई बार ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया था। उनका कहना है कि धमाकों की वजह से खेतों और आसपास के घरों को नुकसान होने का डर बना रहता था। खदान के आसपास बड़ी संख्या में कृषि भूमि है। ग्रामीणों के मुताबिक, अगर ब्लास्टिंग या मशीनों से चिंगारी निकलती है तो इससे फसलों में आग लगने का खतरा भी बना रहता है। इसी वजह से गांव के लोगों ने कई बार प्रशासन से शिकायत भी की थी। रविवार को हुए धमाके के बाद ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आशंकाएं अब सच साबित हो रही हैं।

न रॉयल्टी कट रही थी, न संचालन था
अधिकारियों की मानें तो खदान का संचालन बंद था। हालाकि खदान स्वीकृत थी। जिला खनिज अधिकारी पीके भूरिया के अनुसार, क्रेशर की रॉयल्टी नहीं कट रही थी और क्रेशर बंद भी पड़ा था। अब वह इस मामले की जांच कराने की बात कर रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि जब क्रेशर बंद था तो वहां संचालन शुरू कैसे हुआ। दो ट्रक माल निकालकर बाहर भी भेजा जा चुका है। खास बात यह है कि कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े अवैध खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई करने के निर्देश दे रहे हैं तो जिले में ऐसी बंद खदानों पर अचानक खनन कैसे शुरू हो रहे हैं। इसकी भनक अधिकारियों को क्यों नहीं लग पा रही है।



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