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राजगढ़ के ब्यावरा में एक निजी स्कूल ने फीस बकाया होने पर 11वीं की छात्रा को परीक्षा देने से रोक दिया. छात्रा को अपने पिता के साथ थाने जाना पड़ा, जिसके बाद थाना प्रभारी के हस्तक्षेप से उसे परीक्षा में बैठने दिया गया. हालांकि तब तक उसे केवल आखिरी आधे घंटे में ही पेपर देने का मौका मिला.
राजगढ़ से निजी स्कूल की मनमानी का मामला सामने आया है.
राजगढ़. जिले के ब्यावरा में सिस्टर निवेदिता स्कूल से परेशान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां 11वीं की छात्रा को बकाया फीस के कारण परीक्षा देने से रोक दिया गया. छात्रा ने अपने पिता को जानकारी दी. इसके बाद वह पिता के साथ थाने पहुंची. मामला बढ़ने पर थाना प्रभारी को हस्तक्षेप करना पड़ा. जब थाना प्रभारी स्कूल पहुंचे तो उनके साथ भी बुरा व्यवहार किया गया और उन्हें धमकी दी गई कि यदि स्कूल के अंदर कदम रखा तो परिणाम भुगतने होंगे. थाना प्रभारी इस पर खुद बोले कि ये स्कूल वाले मेरा अपमान कर रहे हैं. परीक्षा के समय में छात्रा आरती दांगी और उसके पिता भटकते रहे. बड़ी कठिनाई के बाद केवल आधे घंटे का समय दिया गया, जिसमें छात्रा ने परीक्षा दी.
जानकारी के अनुसार मामला सिस्टर निवेदिता स्कूल का है. छात्रा आरती दांगी को परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया. स्कूल प्रबंधन ने साफ कहा कि पहले पूरी फीस जमा की जाए. इसके बाद ही परीक्षा देने की अनुमति मिलेगी. छात्रा के पिता जगदीश दांगी ने आंशिक फीस जमा करने की कोशिश की. उन्होंने बाकी रकम के लिए समय भी मांगा, लेकिन प्रबंधन नहीं माना. परेशान छात्रा अपने पिता के साथ थाने पहुंची. यहां थाना प्रभारी वीरेंद्र धाकड़ को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई. छात्रा के भविष्य को देखते हुए थाना प्रभारी तुरंत स्कूल पहुंचे. यहां स्कूल प्रबंधन ने उन्हें भी बुरा भला कहा. इस पर उन्होंने नाराजगी जताई. उन्होंने एसडीएम को भी इसकी जानकारी दी. इसके बाद मामला और गंभीर हो गया. आखिरकार स्कूल संचालक के हस्तक्षेप के बाद छात्रा को परीक्षा में बैठने दिया गया.
स्कूल की शर्त बनी बाधा
ब्यावरा के सिस्टर निवेदिता स्कूल में 11वीं की छात्रा आरती दांगी को परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया. कारण था बकाया फीस. छात्रा के पिता ने आंशिक फीस जमा करने की कोशिश की, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने पूरी फीस पहले जमा करने की शर्त रख दी. इसके चलते छात्रा को परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया.
थाने पहुंची छात्रा, पुलिस ने किया हस्तक्षेप
परेशान छात्रा अपने पिता के साथ सीधे थाने पहुंची. थाना प्रभारी वीरेंद्र धाकड़ ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत स्कूल पहुंचे. उन्होंने प्रबंधन से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन बात बन नहीं पाई. स्कूल प्रबंधन ने पुलिस अफसर को ही नीचा दिखाया और अपमान किया. पुलिस अफसर ने इसकी जानकारी एसडीएम को दी. इसके बाद स्कूल संचालक ने परीक्षा शुरू होने के करीब ढाई घंटे बाद छात्रा को परीक्षा देने की अनुमति दी. हालांकि पूरे मामले में स्कूल प्रबंधन ने मीडिया के सामने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. घटना के बाद निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि फीस के कारण किसी छात्र को परीक्षा से वंचित करना उचित नहीं है.
आधे घंटे में देना पड़ा पूरा पेपर
आरती दांगी ने कहा कि स्कूल प्रबंधन की देरी के कारण छात्रा को परीक्षा का अधिकांश समय नहीं मिल पाया. उसे केवल आखिरी आधे घंटे में ही पेपर हल करने का मौका मिला. इससे उसके प्रदर्शन पर असर पड़ने की आशंका है. छात्रा के पिता ने कहा कि वे हमेशा फीस जमा करते रहे हैं. इस बार थोड़ी देरी हुई थी और उन्होंने समय मांगा था. छात्रा ने भी बताया कि उसने आंशिक फीस जमा कर दी थी और बाकी के लिए मोहलत मांगी थी. इसके बावजूद उसे परीक्षा से रोका गया.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें