बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा ने स्वास्थ्य विभाग में सालों से अटकी शिकायतों पर कार्रवाई की है। मंगलवार को उन्होंने खुद शिकायत करने वालों से बात की और उनकी समस्याओं का हल निकाला। काम में लापरवाही बरतने पर कलेक्टर ने एक कर्मचारी को नौकरी से निकालने और बड़े अधिकारियों को नोटिस देने के निर्देश दिए हैं। लापरवाही पर कार्रवाई कलेक्टर ने गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली ‘प्रसूति सहायता’ और ‘जननी सुरक्षा योजना’ के पैसों में देरी करने पर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने डेटा एंट्री में लापरवाही करने वाली कर्मचारी राखी की सेवा समाप्त करने का प्रस्ताव भेजने को कहा। जिला अस्पताल के लखन बिसेन और दीपक तुरकर को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। ठीक से निगरानी न करने के आरोप में जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) विक्रम सिंह ठाकुर को भी नोटिस थमाया। 511 दिनों से अटकी थी शिकायत सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले मामले सामने आए: ताराचंद दुधबुरे की शिकायत 511 दिनों से पेंडिंग थी। उनकी पत्नी का नसबंदी ऑपरेशन फेल होने के बाद भी उन्हें मुआवजा नहीं मिला था। संध्या पंचेश्वर की शिकायत 381 दिनों से लंबित थी। अस्पताल में बच्चे के जन्म के बाद भी उन्हें सरकारी योजना का पैसा नहीं मिला था क्योंकि उनकी आईडी पोर्टल पर अपडेट नहीं की गई थी। इसी तरह सिवनी और बालाघाट की अन्य महिलाओं की शिकायतें भी 300 से 360 दिनों से धूल फांक रही थीं। कुल 618 शिकायतों का मामला जांच में पता चला कि प्रसूति सहायता और जननी सुरक्षा योजना के पैसे न मिलने की कुल 618 शिकायतें आई थीं। कलेक्टर ने साफ कर दिया कि शासन की योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी पात्र महिलाओं को उनका हक जल्द से जल्द दिलाया जाएगा।
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