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Sagar News: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ देवेंद्र अहिरवार ने लोकल 18 से कहा कि दमोह के नरसिंहगढ़ और पथरिया जैसे इलाकों के पानी में फ्लोराइड और भारी तत्वों की मात्रा ज्यादा है. यह पानी पहले किडनी में स्टोन बनाता है, जो इलाज न मिलने पर किडनी फेलियर में बदल जाता है.
सागर. मध्य प्रदेश का बुंदेलखंड अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से कम पानी के लिए जाना जाता है. यहां का इलाका मिश्रित जलवायु वाला और पथरीला है और इन्हीं पथरीले स्थान पर होने वाले नलकूप, तालाब और कुएं का पानी पीने में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोगों की किडनी पर भारी पड़ रहा है. सागर संभाग से किडनी से परेशान मरीजों के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनका ग्राफ देखकर हर किसी की नींद उड़ सकती है क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि सागर संभाग में पिछले पांच साल से किडनी से संबंधित बीमारी से ग्रस्त मरीजों की संख्या में पांच प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है, जो बेहद चिंताजनक है. सागर में एकमात्र संभाग का बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज है, जहां लगभग पांच जिलों के लोग इलाज के लिए आते हैं. इसी दौरान देखा गया है कि मेडिकल कॉलेज में जो मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं, उनमें किडनी फेलियर के 10 में से लगभग 7 मरीज अकेले दमोह जिले के नरसिंहगढ़ और स्टेशन पथरिया क्षेत्र से हैं.
बीएमसी की ओपीडी के आंकड़े बताते हैं कि यहां हर साल किडनी से संबंधित शिकायतों के साथ 7000 से 8000 मरीज पहुंच रहे हैं. इनमें से 1500 से 2000 मरीज ऐसे होते हैं, जिनकी स्थिति क्रोनिक किडनी डिसीज (सीकेडी) यानी गंभीर किडनी फेलियर तक पहुंच चुकी होती है. इन मरीजों को जीवित रहने के लिए नियमित डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है. विडंबना यह है कि संभाग के सभी सरकारी अस्पतालों सहित बीएमसी में भी कोई नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) पदस्थ नहीं है. गंभीर मरीजों का उपचार मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों को करना पड़ता है और स्थिति बिगड़ने पर उन्हें भोपाल, इंदौर या जबलपुर रेफर कर दिया जाता है.
प्राइवेट हॉस्पिटल में भी होता है इलाज
सागर में एक प्राइवेट हॉस्पिटल भी है, जहां पर आयुष्मान योजना के तहत किडनी ट्रांसप्लांट का इलाज किया जाता है. यहां के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टर विकास गुप्ता ने लोकल 18 से कहा कि दो साल पहले सागर संभाग से इस अस्पताल में लगभग 200 मरीजों का डायलिसिस होता था लेकिन आज की स्थिति में 950 से अधिक लोगों का हर महीने डायलिसिस हो रहा है. यहां तक कि 35 लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन भी हो चुका है.
किडनी की बीमारी बढ़ने की वजह
डॉ गुप्ता ने कहा कि किडनी के मरीज बढ़ने के पीछे कुछ मुख्य वजह हैं. लोगों में शुगर तेजी से बढ़ रही है, बीपी की समस्या हो रही है और पथरी हो रही है, जिससे किडनी में परेशानी आ रही है. इसके अलावा इस बीमारी को लेकर लोग अब जागरूक भी हो रहे हैं, जिससे वे समय पर जांच करवाते हैं और उन्हें पता चलता है, तो प्रॉपर इलाज भी ले रहे हैं. इससे समस्या आगे बढ़ने से रुकती है. यहां तक कि वह डायलिसिस करके उनकी जान भी बचा पाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी के चेहरे पर सूजन है, पिंडलियों में सूजन है, भूख नहीं लगती है, नींद नहीं आती है, कमजोरी महसूस हो रही है, तो यह किडनी से संबंधित बीमारी के लक्षण हो सकते हैं. ऐसा होने पर उन्हें अस्पताल में चेकअप करवाना चाहिए.
पानी में फ्लोराइड और भारी तत्वों की अधिकता
बीएमसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ देवेंद्र अहिरवार लोकल 18 को बताते हैं कि दमोह के नरसिंहगढ़ और पथरिया जैसे क्षेत्रों के पानी में फ्लोराइड और भारी तत्वों की अधिकता है. यह पहले किडनी में स्टोन (पथरी) बनाता है, जो इलाज न मिलने पर किडनी फेलियर में बदल जाता है. बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक गोलियों का लगातार सेवन किडनी को सीधा नुकसान पहुंचा रहा है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.