सड़क हादसे में कोमा, कोर्ट ने दिलाए ₹1.52 करोड़! कोई भी व्यक्ति ऐसे ले सकता है मुआवजा

सड़क हादसे में कोमा, कोर्ट ने दिलाए ₹1.52 करोड़! कोई भी व्यक्ति ऐसे ले सकता है मुआवजा


दिल्ली मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने एक गंभीर सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को 1.52 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. ये मामला फरवरी 2022 की एक तेज रफ्तार वाली कार से हुई दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें पीड़ित भारत घई को 100 प्रतिशत स्थायी अक्षमता हो गई.

11 फरवरी 2022 को दिल्ली में हुई इस दुर्घटना में एक तेज गति से आ रही कार ने भारत घई को टक्कर मार दी. ट्रिब्यूनल के अनुसार, दुर्घटना रैश और लापरवाह ड्राइविंग (rash and negligent driving) के कारण हुई, जिससे पीड़ित को गंभीर सिर की चोटें आईं. इन चोटों के चलते उन्हें हाइपॉक्सिक ब्रेन इंजरी (hypoxic brain injury) हुई. दुर्घटना के बाद से ही भारत घई कोमा में चले गए और अब वे पूरी तरह बिस्तर पर पड़े हुए हैं.

MACT ने क्या कहा?

ट्रिब्यूनल के प्रेसाइडिंग ऑफिसर सुदीप राज सैनी ने 16 मार्च 2026 को दिए गए आदेश में कहा कि पीड़ित की स्थिति ऐसी है कि वे अपनी दैनिक जरूरतों के लिए भी पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं. उन्हें लगातार मेडिकल देखभाल और नर्सिंग की आवश्यकता है. ट्रिब्यूनल ने माना कि पीड़ित को जीवन भर कम से कम एक फुल-टाइम अटेंडेंट की सेवाओं की जरूरत रहेगी. इस आधार पर मुआवजे की राशि तय की गई है. इसमें मेडिकल खर्च, भविष्य की देखभाल, दर्द-कष्ट, आय की हानि और अन्य नुकसानों को शामिल किया गया है.

इस तरह का क्लेम लेने के लिए क्या करना चाहिए?

अगर आपके साथ कभी ऐसी दुर्घटना होती है, तो आप भी लीगली इसकी शिकायत करके हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा क्लेम कर सकते हैं. मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 (सेक्शन 166) के तहत मुआवजा क्लेम करने की प्रक्रिया इस प्रकार है-

1. दुर्घटना की तुरंत रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराएं: सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवाएं. FIR क्लेम के लिए अनिवार्य दस्तावेज है, जो दुर्घटना की तारीख, समय, स्थान और परिस्थितियों को प्रमाणित करता है.

2. बीमा कंपनी को सूचित करें: दुर्घटना के बारे में जितनी जल्दी हो सके, दुर्घटना में शामिल वाहन के मालिक/ड्राइवर की बीमा कंपनी को जानकारी दें. अगर आप थर्ड-पार्टी हैं, तो उनके इंश्योरेंस डिटेल्स लें.

3. जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करें: FIR की कॉपी, मेडिकल रिपोर्ट्स (MLC, डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट), इलाज के बिल, डॉक्टर की रिपोर्ट, गवाहों के बयान, दुर्घटना की फोटो/वीडियो, वाहन के दस्तावेज, पीड़ित की आय प्रमाण (सैलरी स्लिप आदि) को जुटाएं.

4. मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) में क्लेम पिटीशन फाइल करें: क्लेम सेक्शन 166 के तहत फाइल होता है. इसे उस MACT में दाखिल करें जहां दुर्घटना हुई, पीड़ित/क्लेमेंट रहता है या बीमा कंपनी/ड्राइवर/मालिक का पता है.

जरूरी बात: क्लेम पिटीशन में दुर्घटना का विवरण, चोटें, मुआवजे की मांग आदि पूरी करह से साफ शब्दों में लिखें. अगर आपको लीगलिटी समझ न आए, तो एक वकील की मदद ले सकते हैं. क्योंकि पिटीशन और एफिडेविट सही ढंग से तैयार करने पड़ते हैं.

आगे क्या होता है?

इस प्रोसेस के बाद MACT नोटिस जारी करता है, सुनवाई होती है, सबूत पेश किए जाते हैं. ट्रिब्यूनल जस्ट कंपेंसेशन तय करता है, जिसमें फ्यूचर मेडिकल खर्च, अटेंडेंट कॉस्ट आदि शामिल हो सकते हैं. ये प्रक्रिया पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बनी है. ऐसे मामलों में जल्दी एक्शन और सही दस्तावेज बहुत महत्वपूर्ण हैं. अगर आप इन सब कानूनी पचड़ों से बचते हुए खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो हमेशा ट्रैफिक नियमों को मानें और गाड़ी को लिमिटेड स्पीड में ही चलाएं.



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