MP में आनंद विभाग, फिर भी 4 साल में 56000 दे चुके जान! लोग क्यों उठा रहे ऐसा कदम? जानें

MP में आनंद विभाग, फिर भी 4 साल में 56000 दे चुके जान! लोग क्यों उठा रहे ऐसा कदम? जानें


भोपाल: मध्य प्रदेश में आनंद विभाग होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अवसाद में जा रहे हैं. हाल ही में सामने आए आंकड़ों ने एक गंभीर सामाजिक संकट की तस्वीर पेश की है. 1 जनवरी 2022 से अब तक राज्य में 56 हजार से अधिक लोगों ने आत्महत्या की है, जो चिंता का कारण है. इन मामलों के पीछे नशे की लत, आर्थिक तंगी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आई हैं.

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन साल में 5 हजार से ज्यादा आत्महत्याएं नशे की वजह से हुई हैं. मनोचिकित्सकों का मानना है कि लोगों में बढ़ता तनाव और नींद की कमी भी एक अवसाद का बड़ा कारण है. यह समस्या अकेले भोपाल की नहीं, मध्य प्रदेश के कई जिलों में सुसाइड की घटनाएं सामने आई हैं. विशेषज्ञ ऐसी घटनाओं के कई कारण बता रहें. जिसके सबसे बड़ा कारण इंटरनेट की लत है.

कर्ज, आर्थिक दबाव, प्रेम प्रसंग भी बड़ा कारण
बीते कुछ सालों के आंकड़े के देखें तो करीब 4000 लोगों ने कर्ज और आर्थिक दबाव के चलते अपनी जान दी. यह स्थिति दर्शाती है कि राज्य में आर्थिक अस्थिरता और बढ़ता सामाजिक दबाव लोगों को मानसिक रूप से कमजोर बना रहा है. मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति भी चिंताजनक है.

इन कारणों पर भी गौर करें
डिप्रेशन से जुड़े 7 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं. इसके अलावा लगभग 16% मामलों में पारिवारिक कलह, 14% में अवसाद, 11% में लंबी बीमारी और 9% मामलों में नशे की लत प्रमुख कारण रही है. करीब 7% मामलों में आर्थिक तंगी और कर्ज का दबाव भी आत्महत्या की वजह बना. सीनियर साइकैट्रिस्ट डॉ सत्यकांत त्रिवेदी का कहना है कि संयुक्त परिवार से एकल परिवार, कम नींद, पूंजीवाद डिप्रेशन, सुसाइड के बड़े कारण बन रहे हैं.

डिजिटल डिपेंडेंसी भी खतरा
डिजिटल लत डिप्रेशन की एक नई और उभरती चिंता है. करीब 2.2% मामलों (1200 से ज्यादा) में मोबाइल, ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया की लत को जिम्मेदार पाया गया है. पहले ये समस्या बड़े शहरों तक सीमित थी, लेकिन अब सागर, मुरैना और हरदा जैसे छोटे शहरों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं. भौगोलिक रूप से देखें तो सागर, भोपाल, खरगोन, धार और ग्वालियर जैसे शहरों में आत्महत्या के मामले ज्यादा दर्ज किए गए हैं, जो यह संकेत देता है कि यह समस्या पूरे राज्य में फैल चुकी है.

सरकार का आनंद विभाग सिर्फ BJP के लिए
सुसाइड के मामले पर अब सियायत भी शुरू हो गई है. कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने कहा कि किसान, युवा, महिला सभी परेशान हैं, लेकिन सरकार का आनंदम विभाग सिर्फ भाजपा के लोगों के आनंद के लिए रह गया है.

ऐसी नीतियां बनाएंगे, जिससे ग्राफ गिरे…
सबसे गंभीर पहलू है मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी. मध्य प्रदेश में मनोचिकित्सकों की कमी से इनकार नहीं किया जा सकता. इसी वजह से मेंटल हेल्थ को लेकर कम अवेयरनेस भी है. कई सरकारी अस्पतालों में काउंसलर और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के पद खाली हैं. भाजपा के प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि सुसाइड के मामले चिंताजनक हैं. इस दिशा में सरकार काम कर रही है, हम ऐसी नीतियां बनाएंगे, जिससे ग्राफ में गिरावट आए.

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत
वहीं बड़ी संख्या में लोगों को यह तक नहीं पता कि उनकी मानसिक समस्या का इलाज संभव है. यह स्थिति स्पष्ट करती है कि राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, नशामुक्ति और आर्थिक परामर्श जैसी सुविधाओं को बढ़ाने की तत्काल जरूरत है, ताकि लोगों को समय रहते सहारा मिल सके और ऐसे दुखद मामलों को रोका जा सके.



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