250 पेड़ों का ‘कत्लेआम’, अब खेत में मिलीं 400 कुंतल लकड़ियां, कार्रवाई कब?

250 पेड़ों का ‘कत्लेआम’, अब खेत में मिलीं 400 कुंतल लकड़ियां, कार्रवाई कब?


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Jabalpur News: मध्य प्रदेश वृक्षों का परिरक्षण अधिनियम-2001 के तहत हर काटे गए पेड़ के बदले नए पौधे लगाना अनिवार्य है लेकिन सिहोरा में न पौधे दिख रहे हैं और न ही कोई कार्रवाई होती दिख रही है. अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या खेत में मिली करीब 400 कुंतल लकड़ी वही है.

जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित सिहोरा के मनसकरा में विकास के नाम पर 250 से ज्यादा हरे-भरे पेड़ों की बलि चढ़ाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और सनसनीखेज बरामदगी ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है. मनसकरा के पास एक निजी खेत में करीब 400 क्विंटल बेशकीमती लकड़ियां लावारिस हालत में मिली हैं. आशंका जताई जा रही है कि ये वही लकड़ियां हैं, जिन्हें कागजी अनुमति की आड़ में काटा गया था. ताजा मामला मनसकरा के पास का है, जहां वार्ड नंबर तीन के किसान सुभाष मल्लाह के मनसकारा फोरलाइन हाईवे के नजदीक खेत में रातोंरात अज्ञात लोगों ने भारी मात्रा में लकड़ियां डंप कर दीं. सुभाष मल्लाह ने इसकी लिखित शिकायत सिहोरा थाने में दर्ज कराई है. पीड़ित ने शिकायत की है कि बिना जानकारी के अज्ञात लोगों द्वारा खेत में कई क्विंटल लकड़ियां डाल दी गई हैं. जिसके बाद अब यही सवाल उठा रहा है कि आखिर 400 क्विंटल लकड़ी किसकी है. किसके इशारे पर इसे दूसरे के खेत में ठिकाने लगाया गया. क्या यह सबूतों को मिटाने की कोशिश है या अवैध परिवहन की कोई बड़ी साजिश. इसकी जानकारी के लिए जब जबलपुर के डीएफओ पुनीत सोनकर से संपर्क किया गया, तब उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला.

पूरा मामला अनुमति की आड़ में अंधाधुंध कटाई का है. नगरपालिका सिहोरा ने आवेदक वर्षा गर्ग निवासी उत्तर प्रदेश को ग्राम मनसकरा में महज 69 सूखे और क्षतिग्रस्त पेड़ों को काटने की अनुमति दी थी लेकिन जमीन पर मंजर कुछ और ही था. दावा था कि पेड़ सूखे और फल न देने वाले थे लेकिन हकीकत में करीब 250 से ज्यादा जीवित और हरे-भरे पेड़ों पर मशीनें और कुल्हाड़ी चला दी गई. बताया जा रहा है कि मकसद सिर्फ एक था कि इस जमीन पर प्लॉटिंग और बाउंड्री वॉल का काम होना है, जिसके लिए पूरे जंगल को ही साफ कर दिया गया.

जिम्मेदार अधिकारियों का टालमटोल रवैया
इस मामले में जब लोकल 18 ने जिम्मेदारों से सवाल किए, तब वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आए. सीएमओ जयश्री चौहान ने कहा कि सिर्फ 69 पेड़ों की एनओसी दी गई थी. टीम ने सर्वे भी किया था. जबकि वन विभाग के डीएफओ ने जांच की बात कही है. फिलहाल जिन 250 पेड़ों को काटा गया और दूसरी जगह परिवहन भी कर दिया गया लेकिन फिलहाल टीपी से जुड़ी कोई भी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है क्योंकि लकड़ी के परिवहन के लिए वन विभाग से टीपी लेना अनिवार्य है. बिना इसके लकड़ी हिलाना वन विभाग के कानून में अपराध है.

वन विभाग के अधिकारियों को अभी भी भनक नहीं
हैरानी की बात यह है कि नगरपालिका क्षेत्र में पेड़ों का कत्लेआम कर दिया गया लेकिन अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी. इतना ही नहीं, जानकारी मिलने के बाद भी अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है जबकि वन विभाग की नाक के नीचे से परिवहन भी हो गया. वहीं जानकारों को कहना है कि जिस खेत में करीब 400 क्विंटल लावारिस लड़कियों का जखीरा मिला है, उसे वन विभाग की मिलीभगत से रखा गया है. फिलहाल अब देखना होगा कि विभाग लकड़ी के जखीरे को कब तक जब्त करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है.

माफिया और तंत्र की सांठ-गांठ?
मध्य प्रदेश वृक्षों का परिरक्षण अधिनियम-2001 के तहत हर कटे पेड़ के बदले नए पौधे लगाना अनिवार्य है लेकिन सिहोरा में न पौधे दिख रहे हैं, न जुर्माना और न ही कार्रवाई. अब सवाल यही उठ रहे हैं कि क्या खेत में मिली करीब 400 क्विंटल लकड़ी वही है, जिसे अवैध तरीके से काटा गया. पुलिस और वन विभाग अब तक लकड़ी मालिक का पता क्यों नहीं लगा पाए. क्या भू-माफियाओं को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है या फिर सिहोरा में पर्यावरण संरक्षण के दावे सिर्फ फाइलों तक सिमट कर रह जाएंगे. 250 पेड़ों का जनाजा निकल चुका है और अब देखना यह है कि सुभाष मल्लाह के खेत में मिली लकड़ियों के जरिए पुलिस असली गुनहगारों तक पहुंचती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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