देश भर में ‘इरादतन ऋण ना चुकाने वालों’ (Willful Defaulters) की टॉप- 10 लिस्ट में मध्य प्रदेश की कंपनियां न केवल शामिल हैं, बल्कि वे अरबों रुपए का बकाया दबाकर बैठी हैं। संसद में 2014 से लेकर 2025 तक के ऐसे लोन न चुकाने वालों की जानकारी मांगी गई थी।
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27 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, अकेले एमपी से जुड़ी टॉप-2 कंपनियों पर ही ₹8,34,919 लाख (करीब 8,349 करोड़ रुपए) का कर्ज बकाया है।
देश की टॉप-10 सूची में एमपी का कनेक्शन
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 31 मार्च 2025 की स्थिति में देश के शीर्ष 10 डिफॉल्टरों में एमपी से जुड़ी कंपनियां इस लिस्ट में शामिल हैं।
बीटा नेफ्थोल – खरगोन का वो ‘दाग’ जो देश में तीसरे नंबर पर
इसका रजिस्टर्ड ऑफिस इंदौर (सपना संगीता रोड) में है और मुख्य फैक्ट्री खरगोन जिले के बड़वाह में स्थित थी। कंपनी ने कई बैंकों से वर्किंग कैपिटल और टर्म लोन लिया, लेकिन उसे व्यवसाय में लगाने के बजाय अन्यत्र डाइवर्ट करने का आरोप है। इसे 2014 से ही विलफुल डिफॉल्टर की श्रेणी में रखा गया है।
बैंक ने इसे ‘इरादतन चूककर्ता’ घोषित कर इसकी संपत्तियों को कुर्क किया है । वर्तमान में यह कंपनी परिसमापन (Liquidation) की प्रक्रिया में है। प्रमोटरों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
गिल्ट पैक लिमिटेड – पीथमपुर का ‘अरबपति’ डिफॉल्टर
यह कंपनी धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र (सेक्टर-1) में स्थित है और इसका कॉर्पोरेट ऑफिस इंदौर के तुकोगंज में रहा है। इस कंपनी पर बैंक लोन की किश्तें जानबूझकर न चुकाने और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं।
सेबी (SEBI) ने कंपनी और इसके निदेशकों को पूंजी बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। बैंक ने इनकी क्रेडिट सुविधा पूरी तरह रोक दी है और वसूली के लिए कानूनी वाद (Suits) दायर किए हैं।
एस कुमार्स (SKNL) – खंडवा और देवास का ‘टेक्सटाइल किंग’ जो डूबा
इस कंपनी का मुख्यालय मुंबई था, लेकिन, इसकी मुख्य उत्पादन इकाइयां देवास और खंडवा में थीं। भारी कर्ज लेकर उसे चुकाने में नाकाम रहने और फंड की हेराफेरी के आरोप है। वर्ष 2015 में यह कंपनी टॉप-10 की लिस्ट में 5वें नंबर पर थी।
SFIO (सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस) ने इस ग्रुप के खिलाफ जांच की थी। देवास स्थित इनकी मिलों को बैंकों ने अपने कब्जे में लेकर नीलामी की कोशिशें की थीं।
रूची सोया – इंदौर से शुरू हुआ, दिवालिया होकर बिका
इसका जन्म और मुख्यालय इंदौर में ही था। साल 2019 की रिपोर्ट में यह ₹1,62,398 लाख के बकाया के साथ टॉप-10 में थी। सीबीआई (CBI) और अन्य एजेंसियों की जांच के बाद कंपनी IBC (दिवाला संहिता) के तहत गई । बैंकों का बकाया वसूलने के लिए इसका अधिग्रहण पतंजलि आयुर्वेद द्वारा किया गया।
मध्य प्रदेश से जुड़ी कंपनियों का वर्षवार बकाया और विवरण
| वर्ष (31 मार्च की स्थिति) | कंपनी/बकायेदार का नाम | बकाया राशि (₹ लाख में) | मध्य प्रदेश से संबंध और मुख्यालय |
| 2014 | बीटा नेफ्थोल | 69,240 | मुख्यालय: इंदौर (सपना संगीता रोड)। औद्योगिक इकाई बड़वाह (खरगोन) में स्थित थी। |
| 2015 | बीटा नेफ्थोल | 77,431 | खरगोन: यह कंपनी मप्र की सबसे पुरानी बड़ी डिफॉल्टर है। |
| 2015 | एस कुमार्स नेशनवाइड (SKNL) | 70,193 | देवास/खंडवा: इसकी बड़ी टेक्सटाइल मिलें देवास और खंडवा में संचालित थीं। |
| 2016 | बीटा नेफ्थोल | 99,684 | इंदौर: RoC-ग्वालियर के पास पंजीकृत और इंदौर से संचालित। |
| 2018 | बीटा नेफ्थोल | 1,44,304 | बड़वाह: फैक्ट्री क्षेत्र में बैंक ने वसूली के लिए कुर्की की कार्यवाही शुरू की। |
| 2019 | बीटा नेफ्थोल | 1,73,613 | खरगोन: लगातार पांच वर्षों से टॉप-10 की सूची में बनी रही। |
| 2019 | रूची सोया इंडस्ट्रीज | 1,62,398 | इंदौर: इसका जन्म और मुख्यालय इंदौर में ही था। |
| 2021 | बीटा नेफ्थोल | 2,51,411 | इंदौर: बकाया राशि बढ़कर 2,500 करोड़ के पार पहुंची। |
| 2021 | शक्ति भोग फूड्स | 2,34,155 | नर्मदापुरम: होशंगाबाद (नर्मदापुरम) में इसकी बड़ी उत्पादन इकाइयां और मिलें थीं। |
| 2022 | बीटा नेफ्थोल | 3,02,457 | खरगोन: देश के टॉप-3 डिफॉल्टरों में शामिल हुई। |
| 2024 | गिल्ट पैक लिमिटेड | 2,84,583 | पीथमपुर (धार): धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी फैक्ट्री और इंदौर में ऑफिस। |
| 2025 | बीटा नेफ्थोल | 5,26,848 | इंदौर/खरगोन: वर्तमान में देश की तीसरी सबसे बड़ी डिफॉल्टर। |
| 2025 | गिल्ट पैक लिमिटेड | 3,08,071 | पीथमपुर: पीथमपुर सेक्टर-1 स्थित इकाई के कारण टॉप-10 में बरकरार। |
जूम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड: एमपी का सबसे पुराना और बड़ा ‘महाडिफॉल्टर’
देश के टॉप-10 बकाएदारों में शामिल जूम डेवलपर्स का मध्य प्रदेश से गहरा नाता है और इसके खिलाफ जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी कार्रवाइयां हुई हैं। जूम डेवलपर्स का पंजीकृत कार्यालय इंदौर (यसंवत निवास रोड) में स्थित है। यह कंपनी RoC-ग्वालियर के पास पंजीकृत है। इसके प्रमोटर विजय चौधरी का मुख्य कार्यक्षेत्र इंदौर ही रहा है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, यह कंपनी वर्ष 2014, 2015 और 2016 में देश के टॉप-10 इरादतन चूककर्ताओं की सूची में पहले स्थान पर थी ।
बकाया राशि का ग्राफ
- 2014: ₹1,89,030 लाख
- 2018: ₹1,65,657 लाख
- 2022: ₹2,16,617 लाख
एजेंसियों का ‘एक्शन’ और बड़े आरोप
ज़ूम डेवलपर्स के खिलाफ भारत की लगभग सभी बड़ी जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की है। ईडी, सीबीआई, इंटरपोल और बैंकों ने जूम डेवलपर्स के खिलाफ एक्शन लिए हैं।
- प्रवर्तन निदेशालय (ED): ईडी ने इस कंपनी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा मामला दर्ज किया था । जांच में पाया गया कि कंपनी ने बैंकों से कर्ज लेकर उसे विदेशों में फर्जी कंपनियां बनाकर डाइवर्ट कर दिया। ईडी ने इंदौर सहित देश के अन्य शहरों में इनकी करोड़ों की संपत्तियां कुर्क की हैं।
- सीबीआई (CBI): सीबीआई ने बैंकों के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में कंपनी के प्रमोटरों के खिलाफ कई एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं ।
- इंटरपोल (Interpol): कंपनी के प्रमोटर विजय चौधरी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था।
- बैंकों की कार्रवाई: बैंकों ने इसे ‘विलफुल डिफॉल्टर’ घोषित किया है और वर्तमान में यह कंपनी परिसमापन (Liquidation) की प्रक्रिया में है ।