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Maheshwari Saree: गर्मी के मौसम में शादी फंक्शन के लिए हल्की और स्टाइलिश साड़ी चुनना जरूरी हो जाता है. ऐसे में माहेश्वरी साड़ी महिलाओं की पहली पसंद बनती जा रही है. यह साड़ी सिर्फ आरामदायक ही नहीं, बल्कि 260 साल से ज्यादा पुरानी विरासत भी अपने साथ लेकर चलती है, जो किसी भी फंक्शन में आराम के साथ रॉयल लुक देती है.
शादी फंक्शन में दिखना सबसे अलग, लेकिन गर्मी की टेंशन तो पहने माहेश्वरी साड़ी, जानें क्यों है खास गर्मी के मौसम में शादी का सीजन आते ही महिलाओं की सबसे बड़ी चिंता होती है कि ऐसा क्या पहनें जो सुंदर भी लगे और आरामदायक भी हो. भारी लहंगे और मोटी साड़ियां पहनना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में माहेश्वरी साड़ी एक ऐसा विकल्प है जो स्टाइल के साथ आराम दोनों देती है.
माहेश्वरी साड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसकी हल्की बनावट होती है. इसे पहनने के बाद ज्यादा वजन महसूस नहीं होता. लंबे समय तक शादी या किसी भी फंक्शन में शामिल होने के दौरान यह साड़ी आराम बनाए रखती है. यही वजह है कि समर वेडिंग में इसकी मांग बढ़ रही है.
मध्यप्रदेश के खरगोन के पर्यटन नगर महेश्वर में बनने वाली इस साड़ी का इतिहास करीब 259 साल पुराना है. इसकी शुरुआत वर्ष 1767 में मालवा की प्रसिद्ध शासिका अहिल्याबाई होलकर ने करवाई थी. उन्होंने हैदराबाद और गुजरात जैसे शहरों से कुशल कारीगरों को महेश्वर बुलाकर स्थानीय लोगों को बुनाई का प्रशिक्षण दिलवाया.
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शुरुआत में यहां सूती साड़ियां, पगड़ी, साफा और अन्य पारंपरिक वस्त्र तैयार किए जाते थे. खास बात यह थी कि माहेश्वरी साड़ियां राजघराने की महिलाओं और विशेष अतिथियों को उपहार के रूप में दी जाती थीं. धीरे-धीरे यह साड़ी आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय होती चली गई.
माहेश्वरी साड़ियों की सबसे खास पहचान यह है कि ये पूरी तरह हथकरघा पर हाथों से बुनी जाती हैं. इनके पल्लू और बॉर्डर पर महेश्वर किला की नक्काशी की झलक देखने को मिलती है. बुनकर अजीज अंसारी बताते है कि, महेश्वर में करीब 5500 हैंडलूम संचालित हैं, जहां सिल्क, कॉटन, प्योर सिल्क और टिशू समेत 60 से ज्यादा वैरायटी की साड़ियां और दुपट्टे तैयार किए जाते हैं.
माहेश्वरी साड़ियों की कीमत लगभग 2000 रुपए से शुरू होकर लाखों रुपए तक जाती है. इन साड़ियों के लिए कॉटन कोयंबटूर से, सिल्क बेंगलुरु से और जरी सूरत से मंगाई जाती है. इनमें इस्तेमाल होने वाला खास सिल्क सोने-चांदी के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो इन्हें अलग पहचान देता है.
यह पूरी तरह हैंडमेड साड़ियां होती हैं और इनमें किसी भी तरह की इलेक्ट्रिक मशीन का उपयोग नहीं किया जाता. यही वजह है कि भारत के साथ-साथ मलेशिया, श्रीलंका, नेपाल, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में भी माहेश्वरी साड़ियों की अच्छी मांग बनी हुई है. गर्मी के शादी फंक्शन में स्टाइल और आराम का बेहतर विकल्प होने के कारण इनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.