पटना: बिहार सीनियर महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान रह चुकी 18 वर्षीय वैदेही यादव आज अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा कर रही हैं. महज 9 साल की उम्र में जब वैदेही ने क्रिकेट खेलने का सपना देखा तो पिता ने एक शर्त रखी. अगर वह 7 दिनों में सही तरीके से हाथ घुमाकर गेंद डाल देंगी तो उसे क्रिकेट एकेडमी में दाखिला दिलाया जाएगा, लेकिन नन्ही खिलाड़ी ने यह चुनौती सिर्फ 3 दिनों में पूरी कर सबको चौंका दिया. अब वैदेही अपने खेल से हर टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींच रही हैं. साथ ही अपने पिता के अधूरे सपने को भी पूरा करने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही हैं.
आपको बता दें कि वैदेही यादव अबतक अंडर 15, अंडर 19, अंडर 23 की कप्तान और सीनियर महिला टीम की उपकप्तान भी रह चुकी हैं. फिलहाल वह इस समय बीसीए के घरेलू मुकाबलों में धमाकेदार प्रदर्शन कर रही हैं.
पिता को देख थामा था बल्ला
वैदेही ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए बताया कि ‘मेरे पिताजी क्रिकेट खेलते थे, लेकिन उन्हें उतना मौका नहीं मिला कि वे अपने इस सपने को पूरा कर सकें. उस समय मैं बाकी खेल लोकल लेवल पर खेलती थी, लेकिन कभी बैट या गेंद नहीं पकड़ी थी. पिताजी ने भी कभी नहीं सोचा था कि उनकी दोनों बेटियों में से कोई क्रिकेट खेलेगी, क्योंकि उस समय लड़कियों और क्रिकेट का कोई खास नाता नहीं माना जाता था, लेकिन जब मैंने अपने पिताजी को बैटिंग करते हुए देखा तो मेरे मन में क्रिकेट के प्रति जिज्ञासा होने लगी.
वैदेही यादव ने आगे कहा कि एक दिन मैंने अपने पिताजी से क्रिकेट खेलने की इच्छा जाहिर की. पहले तो उन्हें लगा कि मैं मजाक कर रही हूं. उस समय मेरी उम्र महज 9 साल थी, लेकिन जब मैंने जिद की तो उन्होंने कहा कि अगर तुम 7 दिनों के अंदर हाथ घुमा कर सही तरीके से बॉल डाल दी तो मैं तुम्हें क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन करवा दूंगा. मैंने इस चैलेंज को सिर्फ 3 दिनों में पूरा कर लिया. इसके बाद पिताजी ने मुझे क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन करवा दी और तभी से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया.
जो भी हूं पिता की वजह से हूं
वैदेही ने आगे कहा कि आज मेरी हर जीत के पीछे मेरे पिता का ही हाथ है. उन्होंने मेरे इस सफर में भरपूर साथ दिया है और आज भी साए की तरह मेरे साथ खड़े हैं. अगर वो नहीं होते, तो शायद मैं क्रिकेट नहीं खेल रही होती. मेरे पिता मेरे बेस्ट फ्रेंड जैसे हैं. इसलिए जब भी मैं जीतती हूं तो सबसे पहले उन्हें ही कॉल करती हूं.
उन्होंने आगे कहा कि उनकी वजह से ही पिछले दो सालों से मैं ट्रेनिंग के लिए बेंगलुरु में रह रही हूं और ओपन स्कूलिंग के जरिए अपनी पढ़ाई भी जारी रख रही हूं. सिर्फ पिता ही नहीं, मां का भी मुझे पूरा सहयोग मिलता है. आपको बता दें कि वैदेही की छोटी बहन भी खेलों से जुड़ी हुई है और शूटिंग करती हैं. दोनों बहनों को पूरे परिवार का भरपूर सहयोग मिल रहा है.
हरमनप्रीत कौर को मानती है आदर्श
वैदेही यादव भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को अपना आदर्श मानती हैं और क्रिकेट के प्रति उनके एग्रेसिव अंदाज को काफी पसंद करती हैं. इस बारे में उन्होंने बताया कि 2017 महिला वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत और ऑस्ट्रेलिया के मैच में हरमनप्रीत कौर ने 171 रनों की शानदार पारी खेली थी. उनकी बल्लेबाजी देखकर मुझे भी उनके जैसा बनने की प्रेरणा मिली. इसके बाद से मैं क्रिकेट को लेकर और भी गंभीर हो गई. अब मेरी पूरी कोशिश है कि महिला प्रीमियर लीग में मेरा चयन हो और मैं टीम इंडिया का हिस्सा बन सकूं. इसके लिए मैं जीतोड़ मेहनत कर रही हूं और मेरा पूरा फोकस अपनी प्रैक्टिस पर ही रहता है.