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Vinayak Chaturthi 2026: भगवान गणेश को संकटों को दूर करने वाले और बुद्धि प्रदान करने वाले देवता माना जाता है. विनायक चतुर्थी के पावन अवसर पर श्रद्धा और विधिपूर्वक उनकी पूजा करने से जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं. साथ ही भक्तों की इच्छाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.
Vinayak Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में हर तिथि और वार का अलग महत्व बताया गया है, और पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है. यह पावन दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिन्हें विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव माना जाता है. इस दिन भक्तजन व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करते हैं, जिससे जीवन में सुख-शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है.
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई उपासना से सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में खुशहाली का वास होता है. उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस बार चैत्र माह की विनायक चतुर्थी विशेष फलदायी मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन शुभ योग का संयोग बन रहा है. इस दिन को वासुदेव चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. ऐसे में अगर भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-अर्चना करें, तो भगवान गणेश की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं.
कब रखा जाएगा वासुदेव चतुर्थी का व्रत?
वासुदेव चतुर्थी को चैत्र वासुदेव विनायक चतुर्थी और मनोरथ चतुर्थी के नाम से भी जाता है. यह पर्व चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की तिथि की शुरुआत 21 मार्च को रात में 11 बजकर 56 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 22 मार्च को रात 9 बजकर 16 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए वासुदेव चतुर्थी का व्रत 22 मार्च 2026 को रखा जाएगा.
शुभ योग मे मनाई जाएगी विनायक चतुर्थी
ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, इस साल चैत्र माह की विनायक चतुर्थी को वासुदेव चतुर्थी भी कहा जाता है. इस बार इस दिन विशेष शुभ योग बन रहे हैं. इस दिन रवि योग और भद्रावास योग का संयोग रहेगा. रवि योग रात 10 बजकर 42 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जबकि भद्रावास योग सुबह 10 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगा. इन योगों में भगवान गणेश की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
विनायक चतुर्थी का महत्व?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार चैत्र माह में आने वाली वासुदेव विनायक चतुर्थी का व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है.मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और हर कार्य में सफलता के मार्ग खुलते हैं. भगवान गणेश को ज्ञान और बुद्धि के अधिष्ठाता देव माना गया है, जिनकी आराधना से मानसिक शांति और विवेक की प्राप्ति होती है. साथ ही इस दिन किया गया दान-पुण्य व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शुभ फल लेकर आता है.
जानिए किस विधि से करें पूजा?
विनायक चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना करनी चाहिए. जलाभिषेक करना चाहिए. भगवान गणेश को पुष्प फल और पीला चंदन अर्पित करना चाहिए. तिल का लड्डू अथवा मोदक का भोग लगाना चाहिए. भगवान गणेश के मंत्रो का जाप करना चाहिए और उसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी की आरती करनी चाहिए.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें