Last Updated:
न्यूज 18 हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत में 101 रणजी मैच खेल चुके विकेटकीपर बल्लेबाज विनायक सावंत ने खुलाा किया कि उन्होंने तब कोटला के नाम से जाने जाने वाले मैदान पर गौतम गंभीर को बहुत पिन मारा था और हालात इतने बिगड़ गए कि हाथापाई की नौबत आ गई थी. तब से आज का दिन है जब हेड कोच देखकर भी इस विकेटकीपर को अनदेखा कर देते है.
नई दिल्ली. जुनून और अनुशासन की बारीक लकीर को क्रिकेट को ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता है, लेकिन जब जीत का जुनून सिर चढ़कर बोलता है, तो कभी-कभी अनुशासन की सीमाएं लांघ दी जाती हैं. रणजी ट्रॉफी, जो भारतीय क्रिकेट की लाइफलाइन मानी जाती है, कई ऐतिहासिक मुकाबलों की गवाह रही है लेकिन साल 2005 में मुंबई और दिल्ली के बीच हुए एक मैच में कुछ ऐसा हुआ, जिसने खेल की सुर्खियों को स्कोरबोर्ड से हटाकर खिलाड़ियों के आपसी टकराव पर मोड़ दिया. यह टकराव था मुंबई के विकेटकीपर विनायक सावंत और दिल्ली के आक्रामक सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर के बीच.
न्यूज 18 हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत में 101 रणजी मैच खेल चुके विकेटकीपर बल्लेबाज विनायक सावंत ने खुलासा किया कि उन्होंने तब कोटला के नाम से जाने जाने वाले मैदान पर गौतम गंभीर को बहुत पिन मारा था और हालात इतने बिगड़ गए कि हाथापाई की नौबत आ गई थी. तब से आज का दिन है जब हेड कोच देखकर भी इस विकेटकीपर को अनदेखा कर देते है.
क्या थी पूरी घटना?
यह घटना दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेले गए एक महत्वपूर्ण रणजी मैच के दौरान हुई. गौतम गंभीर अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में बल्लेबाजी कर रहे थे और मुंबई के गेंदबाज उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे. मैच के दौरान स्लेजिंग (छींटाकशी) का दौर जारी था. इसी बीच, विकेट के पीछे खड़े विनायक सावंत और गंभीर के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई. बात तब बढ़ गई जब सावंत ने गंभीर की बल्लेबाजी या किसी शॉट पर कोई टिप्पणी की. गंभीर, जो अपने ‘शॉर्ट-टेम्पर्ड’ स्वभाव और आक्रामक खेल के लिए जाने जाते थे, ने तुरंत पलटवार किया.
मैदान पर हाई-वोल्टेज ड्रामा
चश्मदीदों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों खिलाड़ियों के बीच बहस इतनी तीखी हो गई कि अंपायरों को बीच-बचाव करने के लिए दौड़ना पड़ा. विनायक सावंत विकेट के पास आकर कुछ कह रहे थे, वहीं गंभीर ने अपनी जगह से बढ़कर सावंत का सामना किया. दृश्य ऐसा था कि लग रहा था कि दोनों के बीच शारीरिक टकराव हो जाएगा. मुंबई के तत्कालीन कप्तान और साथी खिलाड़ियों ने सावंत को पीछे खींचा, तब जाकर मामला थोड़ा शांत हुआ.
विवाद का कारण और परिणाम
इस विवाद की जड़ में रणजी ट्रॉफी की पुरानी प्रतिद्वंद्विता थी. मुंबई और दिल्ली की टीमें हमेशा से एक-दूसरे को नीचा दिखाने का मौका नहीं छोड़तीं. इस मैच में भी दोनों टीमें मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करना चाहती थीं. हालांकि, इस घटना के बाद मैच रेफरी ने दोनों खिलाड़ियों की क्लास लगाई. गौतम गंभीर पर उनकी आक्रामकता के लिए और विनायक सावंत पर उकसाने के लिए जुर्माना भी लगाया गया था. इस घटना ने गंभीर की उस छवि को पुख्ता कर दिया कि वे मैदान पर किसी भी स्लेजिंग को बर्दाश्त नहीं करते, चाहे सामने कोई भी हो.